Dalit CJI OF INDIA: देश को मिले अभी तक के दलित मुख्य न्यायाधीश ने दिलाया समानता को नया आयाम

Justice Br Gavai, Chief Justice Br Gavai
Source: Google

Dalit CJI OF INDIA:  14 मई 2025 केवल भारतीय न्यायपालिका के लिए ही नहीं बल्कि भारत के दलित समाज के लिए भी बेहद ऐतिहासिक दिन था। भारत के उच्चतम न्यायालय को दूसरी बार दलित चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गंवई मिले थे। जस्टिस बी आर गंवई, जिनका कार्यकाल भले मात्र 6 महीने का ही था लेकिन उनकी नियुक्ति ने बताया कि भारत की न्याय पालिका सबके लिए क्यों समान है।

हालांकि दलित जजों की नियुक्ति कम ही होती है लेकिन बाबा साहब आंबेडकर ने संविधान में जो ताकत दी है उससे ये बात साफ है कि सबको एक समान अधिकार दिया गया है। न्याय पालिका ही वो कड़ी है जो इन अधिकारों की रक्षा करती है, उन्हें बनाए रखती है। और चीफ जस्टिस के एक दलित होने से कहीं न कहीं इस बात का भरोसा भी जगा कि आने वाले समय में दलितों को न्याय पालिका ने ऊंचा स्थान मिलेगा, और इनके लिए न्याय की रफ्तार और तेज हो रही है।

न्यायमूर्ति ए. वरदराजन – Justice A. Varadarajan

1, न्यायमूर्ति ए. वरदराजन:  10 दिसंबर 1980 की तारीख सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरो में अंकित मानी जायेगी। इस दिन पहली बार सुप्रीम कोर्ट को दलित जस्टिस मिला था। न्यायमूर्ति अप्पाजी वरदराजन, जिन्हें जस्टिस ए वरदराजन के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि उन्हें चीफ जस्टिस का पद नहीं मिला था लेकिन वो पहले दलित समुदाय से चुने गए जज थे। उन्होंने 1980 से लेकर 16 अगस्त 1985 तक जज के पद पर कार्य किया था। 17 अगस्त 1920 को मद्रांस प्रेसिडेंसी के वेल्लोर जिले के जोलारपेट्टई में एक दलित परिवार में जन्में ए वरदराजन के लिए वकालत की राह आसान नहीं थी.

उन्होंने तिरुपत्तूर के म्युनिसिपल हाई स्कूल से मैट्रिक, वूरहीस कॉलेज (वेल्लोर) से इंटरमीडिएट, लोयोला कॉलेज (मद्रास) से B.A. और डॉ. अंबेडकर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज (मद्रास) से LLB किया पूरा किया था।  1944 में उन्होंने बतौर वकील करियर की शुरूआत की और ओरिजिनल और अपीलेट साइड्स में सिविल और क्रिमिनल दोनो मामलों में वकालत शुरु की। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि 1974 में उन्हें सब-जज, डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज, एडिशनल जज और परमानेंट जज के तौर पर प्रमोट किया गया था। 1980 में वो सुप्रीम कोर्ट के जज बनने वाले पहले दलित जज थे, हांलांकि 1985 में जज से पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने प्रकाश अंबेडकर के साथ मिलकर दलितों के अधिकारों की लड़ाई में सहयोग करना शुरु कर दिया। 15 अक्टूबर 2009 को तमिलनाडु में उनका देहांत हो गया था।

न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन – Justice K.G. Balakrishnan

2, दूसरे नंबर के दलित जज है न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन- सुप्रीम कोर्ट के पहले दलित चीफ जस्टिस के पद को संभालने वाले थे जस्टिस के जी बालाकृष्णन। 14 जनवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट के 37वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लेने वाले जस्टिस कोनकुप्पकतिल गोपिनाथन बालकृष्णन, जिन्हें के जी बालाकृष्णन के नाम से जाना जाता है। 12 मई 1945 को केरल के त्रावणकोर के कस्बे थलायोलपारम्बू में एक पुलाया दरिद्र परिवार में जन्मे थे के जी बालाकृष्णन। 11 मई 2015 को वो अपने पद से रिटायर हो गए थे और अब वो केरल में ही रहते है।

 न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले –  न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले

3, तीसरे नंबर पर है न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले: न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले भारत के तीसरे जज है जो कि दलित जाति से आते है। वराले ने 25 जनवरी 2024 को सर्वोच्च न्यायलय के जज के तौर पर शपथ ली थी, उनका कार्यकाल अभी भी जारी है। वराले 15 अक्टूबर 2022 से लेकर 24 जनवरी 2024 तक कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे चुके हैं। इससे पहले वो 2008 से लेकर 2022 तक बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे। 23 जून 1962 को कर्नाटक के निपानी में जन्मे वराले दलित जाति से आते है। वो अभी भी सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश के तौर पर कार्यरत है।

Chief Justice BR Gavai – B R Gavai

4, अगली नंबर पर है चीफ जस्टिस बीआर गवईं- बी आर गवई, यानि कि भूषण रामकृष्ण गवईं, जिन्होंने 14 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के 52वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली थी। वो बौद्ध समुदाय से सीजेआई का पद संभालने वाले पहले न्यायाधीश भी बने थे। हालांकि बचपन में दलित जाति से आने वाले बीआर गवईं बाबा साहब अंबेडकर के नक्शे कदम पर चल कर बौद्ध हो गए थे, लेकिन फिर भी उन्हें दलित चीफ जस्टिस कहा गया। हालांकि 23 नवंबर 2025 को ही उनका कार्यकाल पूरा हो गया और वो अपने पद से रिटायर हो गए। हम इस बात को इग्नोर नहीं कर सकते है कि न्याय पालिका में दलितो को अभी भी काफी कम स्थान दिया जा रहा है, हालांकि धीरे धीरे ही दलित जाति से जजों की नियुक्ति कानून और न्याय व्य़वस्था को दलितों के प्रति मजबूत बनायेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *