BNS Section 162 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 162 एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो भारतीय सेना, नौसेना या किसी भी जहाज के अधिकारियों, सैनिकों, नाविकों या वायुसैनिकों द्वारा अपने वरिष्ठों पर हमला करने के लिए उकसाने से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
Also Read: भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 153: शांतिपूर्ण विदेशी राज्यों के विरुद्ध युद्ध छेड़ने पर दंड
धारा 162 क्या कहती है? BNS Section 162 in Hindi
इस धारा में कहा गया है कि जो कोई भारत सरकार की सेना (Indian Government’s Army), नौसेना या वायु सेना के किसी अधिकारी, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को उसके पद के निष्पादन में किसी वरिष्ठ अधिकारी पर हमला करने के लिए उकसाता है, यदि ऐसा हमला उस उकसावे के परिणामस्वरूप किया जाता है, तो उसे कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
बीएनएस धारा 162 की मुख्य बातें
- यह धारा विशेष रूप से भारतीय सशस्त्र बलों के सदस्यों द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान अपने वरिष्ठों पर किए गए हमलों से संबंधित है।
- यह धारा हमले के बजाय हमले को “उकसाने” पर केंद्रित है। उकसाने का अर्थ है किसी को अपराध करने के लिए उकसाना, सहायता करना या उसके साथ षड्यंत्र करना।
- उकसाने वाले को तभी दंडित किया जाएगा जब हमला वास्तव में उसके उकसाने के परिणामस्वरूप किया गया हो।
- इस अपराध के लिए अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है।
- यह एक संज्ञेय अपराध है, जिसका अर्थ है कि पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है। यह गैर-जमानती भी है, जिसका अर्थ है कि जमानत आसानी से नहीं मिलती। इस मामले की सुनवाई प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी।
Also Read: क्या कहती है BNS की धारा 154, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें
बीएनएस धारा 162 उदाहरण – BNS Section 162 Example
बीएनएस (BNS) धारा 162उदाहरण कुछ इस तरह से है कि…उदाहरण 1 –
मान लीजिए, भारतीय सेना की एक प्लाटून किसी संवेदनशील क्षेत्र में तैनात है। एक सैनिक ‘A’ (उकसाने वाला) किसी कारणवश अपने प्लाटून कमांडर ‘B’ (वरिष्ठ अधिकारी) से नाराज़ है। ‘A’ अपने कुछ साथी सैनिकों ‘C’, ‘D’ और ‘F’ के सामने ‘B’ की लगातार बुराई करता है और उन्हें भड़काता है कि ‘B’ उनके साथ अन्याय कर रहा है। ‘A’ बार-बार ‘C’, ‘D’ और ‘F’ से कहता है, “यह कमांडर हमें कभी आराम नहीं करने देता, हमेशा हमें मुश्किल काम देता है। हमें इसे सबक सिखाना होगा। हमें इस पर हमला करना होगा और इसे अपनी ताकत दिखानी होगी।”
‘A’ के लगातार उकसावे के परिणामस्वरूप, एक दिन ‘C’ (सैनिक) क्रोधित हो जाता है और अपने वरिष्ठ अधिकारी ‘B’ पर हमला कर देता है, जिससे ‘B’ घायल हो जाता है।
इसके अलवा आपको बता दें कि धारा 162 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर अपराधी को किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जा सकता है, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही, उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बात दें, दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की पुरानी धारा 162 पुलिस को दिए जाने वाले दस्तावेजों से संबंधित थी और इसमें कहा गया था कि पुलिस डायरी में दर्ज दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएँगे और न ही उन्हें कुछ विशिष्ट तथ्यों को सुरक्षित रखने के लिए साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। भारतीय ऐतिहासिक संहिता (BNS) के आने के बाद, इस कानून में संशोधन किया गया है और धारा 162 का प्रारूप अब शैक्षिक सैन्य अपराधों से संबंधित है।



