क्या कहती है BNS की धारा 197, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें

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BNS Section 197 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 197  राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता की रक्षा के लिए बनाई गई है और ऐसे कृत्यों या बयानों पर रोक लगाती है जो विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य पैदा करते हैं या भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करते हैं। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 197 क्या कहती है? BNS Section 197 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 197 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। बीएनएस (BNS) की धारा 197, यह धारा भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय एकता और सार्वजनिक शांति की रक्षा करती है।
दंडनीय क्या है – ऐसे कार्य या कथन जो विभिन्न समुदायों के बीच विभाजन को बढ़ावा देते हैं।
मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना, जिससे भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरा हो।

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बीएनएस धारा 197 की महतवपूर्ण बातें  

  • यह धारा केवल उन्हीं मामलों में लागू होती है जहाँ व्यक्ति जानबूझकर समन की अवहेलना करने का दोषी पाया जाता है।
  • यदि व्यक्ति के पास उपस्थित न होने का कोई वैध कारण है, तो उसे इस धारा के तहत दंडित नहीं किया जा सकता।
  • इस धारा के तहत अपराध को गैर-जमानती अपराध माना जाता है। इसका अर्थ है कि अभियुक्त को जमानत पर रिहा होने के लिए न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता होगी।
  • इस धारा के तहत दंड का उद्देश्य लोक सेवकों के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाले व्यक्तियों को दंडित करना है।
  • यह धारा मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक और डिजिटल सामग्री पर लागू होती है।
  • यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए उत्तरदायित्व सुनिश्चित करता है ताकि किसी भी समुदाय को बदनाम न किया जाए और राष्ट्रीय एकता बनी रहे।

बीएनएस धारा 197 की सजा 

इसके अलवा आपको बता दें कि धारा (Section) 197 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की कैद और/या जुर्माना, और अगर अपराध किसी पूजा स्थल पर किया जाता है तो पाँच साल तक की कैद हो सकती है।

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