BNS Section 227 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 227 के तहत, कोई भी व्यक्ति जो कानूनी रूप से सच बोलने के लिए बाध्य है (चाहे शपथ द्वारा या किसी अन्य कानून के तहत) और जानबूझकर या अनजाने में झूठा बयान देता है, वह झूठी गवाही देने का दोषी है। यह अपराध मौखिक रूप से, लिखित रूप से या किसी अन्य तरीके से किया जा सकता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 227 क्या कहती है? BNS Section 227 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 226 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 227 “झूठी गवाही देने” से संबंधित है। यह धारा उन व्यक्तियों को दंडित करने के लिए बनाई गई है जो कानूनी कार्यवाही की अखंडता को कमज़ोर करते हैं। यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 191 के प्रावधानों के समान है।
उदहारण के लिए यदि ‘क’ एक अदालत में यह शपथ देता है कि उसने ‘ख’ को किसी अपराध के दौरान देखा, जबकि उसे पता है कि ‘ख’ उस दिन शहर में मौजूद नहीं था, तो यह माना जाएगा कि ‘क’ झूठी गवाही दे रहा है।
बीएनएस धारा 227 की महतवपूर्ण बातें
- इसमें किसी भी प्रकार का बयान शामिल हो सकता है, चाहे वह मौखिक हो या किसी अन्य रूप में, जैसे कि लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड।
- साक्ष्य देने वाले व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया (जैसे अदालत या ट्रिब्यूनल) में शपथ लेकर या कानून के अनुसार सच बोलने के लिए विवश किया जाएगा।
- बयान केवल असत्य होना ही पर्याप्त नहीं है; व्यक्ति को यह भी समझना चाहिए कि वह झूठ बोल रहा है, या उसे अपने बयान की सत्यता पर संदेह होना चाहिए।
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बीएनएस धारा 227 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 227 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, धारा 227 में इस प्रकार के दंड (Punishment) का प्रावधान है। इस अपराध की सज़ा साधारण कारावास है, जो एक वर्ष तक हो सकती है, या जुर्माना, या दोनों। इसके अलावा, सामुदायिक सेवा भी सज़ा में शामिल हो सकती है।



