BNS Section 230 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 230 मृत्युदंड से दंडनीय अपराध में दोषी ठहराया के इरादे से झूठे सबूत देने या गढ़ने से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में व्यभिचार के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 230 क्या कहती है? BNS Section 230 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 230 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 230 जो कोई व्यक्ति झूठा साक्ष्य पेश करता है या गढ़ता है।
जिसमें उसका इरादा या ज्ञान यह होता है कि उसके कार्य के कारण किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया जा सकता है। जिसके लिए भारतीय कानून के तहत मृत्युदंड का प्रावधान है, उसे गंभीर दंड का सामना करना पड़ेगा।
बीएनएस धारा 230 की महतवपूर्ण बातें
- यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को उपधारा (1) में निर्दिष्ट मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया जाता है और मृत्यु दण्डादेश दिया जाता है, तो ऐसा मिथ्या साक्ष्य देने वाले व्यक्ति को या तो मृत्यु दण्ड या उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दण्ड से दण्डित किया जाएगा।
- जो कोई भी व्यक्ति ऐसा झूठा साक्ष्य देता है या गढ़ता है, उसे आजीवन कारावास या कठोर कारावास से दंडित किया जा सकता है जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकती है, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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बीएनएस धारा 230 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 230 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, यदि किसी को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है या फिर कठोर कारावास का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी अवधि दस साल तक हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, आरोपी को पचास हजार रुपये तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। वही यदि झूठे साक्ष्य के कारण निर्दोष व्यक्ति को फाँसी दी जाती है, तो इसके परिणामस्वरूप दंड और भी अधिक गंभीर हो जाता है।



