क्या कहती है BNS की धारा 235, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें

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BNS Section 235 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 235 झूठे प्रमाण पत्र को सच्चे प्रमाण पत्र के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 235 क्या कहती है? BNS Section 235 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 235 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 235 जो कोई भी व्यक्ति किसी प्रमाण पत्र को किसी भी तरह से झूठा जानते हुए भी गलत तरीके से उसका उपयोग करता है या प्रमाण पत्र के रूप में उपयोग करने का प्रयास करता है, उसे दंडित किया जाएगा। ऐसे व्यक्ति को उसी तरह दंडित किया जाएगा जैसे उसने झूठी गवाही दी हो (अर्थात, झूठी गवाही के लिए निर्धारित दंड)।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए रमेश नाम का एक व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर रहा है। आवेदन करते समय, वह अपनी शैक्षिक योग्यता के समर्थन में स्नातक की डिग्री का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करता है। हालाँकि, रमेश जानता है कि यह प्रमाण पत्र जाली है और उसने कभी स्नातक की डिग्री प्राप्त नहीं की है। प्रमाण पत्र पर विश्वविद्यालय के हस्ताक्षर और मुहर भी नकली हैं। हालाँकि, इन दस्तावेजों की जाँच करने पर, अधिकारी इन्हें असली मानकर उसे नौकरी दे देते हैं। हालाँकि, जाँच करने पर, उन्हें सभी दस्तावेज नकली मिलते हैं। यह दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 235 के अंतर्गत एक दंडनीय अपराध होगा।

बीएनएस धारा 235 की महतवपूर्ण बातें 

  • यह अपराध तब होता है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी झूठे प्रमाणपत्र को सत्यापित प्रमाणपत्र के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयास करता है, यह जानते हुए कि वह झूठा है और भ्रष्ट इरादे से ऐसा करता है।
  • प्रमाणपत्र किसी न किसी रूप में झूठा होना चाहिए।
  • इस अपराध के लिए दंड वही है जो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में उल्लिखित झूठी गवाही देने के लिए निर्धारित है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यह धारा पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 198 के समतुल्य है।

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बीएनएस धारा 235 की और सजा

इसके अलवा आपको बता दें कि BNS  की धारा (Section) 235 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, दोषी व्यक्ति को उसी तरह दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो या गढ़ा (fabricated) हो। इसका अर्थ है कि इसका दण्ड BNS की धारा 235 (मिथ्या साक्ष्य देना) के तहत निर्धारित दण्ड के समान होगा।

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