क्या कहती है BNS की धारा 239, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें

BNS Section 239, BNS Section 239 in Hindi
Source: Google

BNS Section 239 in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 239 उन अपराधों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति जानबूझकर अपराध की सूचना देने में चूक करता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey Nyaay Sanhita) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

Also Read: क्या कहती है BNS की धारा 238, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें

धारा 239 क्या कहती है? BNS Section 239 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 239 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 239 यह धारा उन व्यक्तियों पर लागू होती है जो जानते हैं या जिनके पास यह विश्वास करने का ठोस कारण है कि किसी प्रकार का अपराध हुआ है।

हालांकि, वे इसे सूचित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होते हैं। यह प्रावधान उन लोगों पर भी लागू होता है जिनके पास किसी अपराध के बारे में जानकारी है या जिनका ऐसा मानने का कारण है कि अपराध हुआ है, लेकिन फिर भी वे जानबूझकर उस सूचना को प्रकट नहीं करते हैं।

उदहारण के लिए जैसे एक पुलिस अधिकारी (या कोई भी व्यक्ति जो कानूनी रूप से किसी अपराध की सूचना देने के लिए बाध्य है) जानता है कि उसके पड़ोस में कोई गंभीर अपराध (जैसे डकैती या हत्या का प्रयास) हुआ है। वह जानबूझकर पुलिस को इसकी सूचना नहीं देता, जिससे अपराधी बच निकलता है। इस जानबूझकर की गई चूक के लिए, वह अधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 239 के तहत दोषी है।

बीएनएस धारा 239 की महतवपूर्ण बातें 

  • इस धारा का उद्देश्य उन व्यक्तियों को दंडित करना है जो कानूनी रूप से जिम्मेदार होने के बावजूद अपराधों को छिपाने या प्रकट नहीं करने का प्रयास करते हैं।

Also Read: क्या कहती है BNS की धारा 237, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें

बीएनएस धारा 239 की और सजा

इसके अलवा आपको बता दें कि BNS  की धारा (Section) 239 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, दोषी व्यक्ति को उसी तरह दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो या गढ़ा (fabricated) हो। इस धारा के अंतर्गत दोषी पाए गए व्यक्ति को दंड दिया जाता है। इसमें अपराध की गंभीरता के आधार पर कारावास, जुर्माना या दोनों शामिल हो सकते हैं। इतना ही नहीं यदि अपराध इस धारा में 6 महीने तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *