BNS Section 242 in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 242 मुख्य रूप से झूठे प्रतिरूपण से संबंधित है जो किसी मुकदमे या अभियोजन में कार्य करने के उद्देश्य से किया जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey Nyaay Sanhita) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 242 क्या कहती है? BNS Section 242 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 242 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 242 के अनुसार, जो कोई जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति का प्रतिरूपण करता है (अर्थात, उसकी पहचान ग्रहण करता है) और उस झूठी पहचान में रहते हुए, निम्नलिखित में से कोई भी कार्य करता है।
इसका मतलब है कि कानूनी कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए किसी का रूप धारण करना, जैसे किसी और की ओर से बयान देना या स्वीकारोक्ति करना, दंडनीय है। इस धारा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी कार्यवाही निष्पक्ष और धोखाधड़ी से मुक्त हो।
बीएनएस धारा 242 की महतवपूर्ण बातें
- जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया को धोखा देने के लिए गलत पहचान का इस्तेमाल करता है।
- यदि व्यक्ति दोषी करार किया जाता है, तो उसे तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना, या इन दोनों में से किसी एक से दंडित किया जा सकता है।
- यह अपराध अ-संज्ञेय श्रेणी में आता है, जिसका अर्थ है कि पुलिस इसे बिना वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती।
- यह जमानती है, जिसका मतलब है कि अभियुक्त को जमानत मिल सकती है। इस मामले की सुनवाई पहले श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी।
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बीएनएस धारा 242 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 242 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, दोषी व्यक्ति को निम्नलिखित सजा दी जा सकती है…. वही किसी भी प्रकार की अवधि के लिए जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही उसे पाँच हजार रुपये तक का जुर्माना। इसके अलवा कारावास (Imprisonment)) और जुर्माना (Fine Charges) दोनों हो सकते हैं।



