BNS Section 246 in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 246 अदालत में धोखाधड़ी से झूठा दावा प्रस्तुत करने से जुड़ी है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey Nyaay Sanhita) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 246 क्या कहती है? BNS Section 246 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 246 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 246 के मुताबिक कोई भी व्यक्ति यदि धोखाधड़ी से या बेईमानी के साथ, किसी अन्य व्यक्ति को परेशान या नुकसान पहुँचाने के इरादे से, अदालत में ऐसा दावा पेश करता है जिसे वह जानता है कि वह झूठ है, तो वह इस धारा का उल्लंघन करता है।
उदहारण के मान लीजिये यदि अगर कोई व्यक्ति फर्जी रसीदें या गवाही का सहारा लेकर किसी पर कर्ज का झूठा आरोप लगाता है, जिससे उसे परेशान करने का प्रयास किया जाता है, तो उसे इस धारा के तहत दंडित किया जाएगा। यह मामला बीएनएस की धारा 246 के अनुपालन में एक अपराध माना जाएगा। इस धारा का मुख्य उद्देश्य अदालतों को असंगत और दुर्भावनापूर्ण मुकदमों से सुरक्षित रखना है।
धारा 246 की महतवपूर्ण बातें
- यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठा दावा अदालत में प्रस्तुत करता है, बावजूद इसके कि वह जानता है कि यह जानकारी गलत है।
- इस कृत्य के अंतर्गत व्यक्ति का उद्देश्य किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुँचाना या उसके लिए समस्याएँ खड़ी करना होता है।
- इस प्रावधान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति बिना आधार के मुकदमे दायर करके दूसरों को परेशान न करे और न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग न होने पाए।
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बीएनएस धारा 246 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 246 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, दोषी व्यक्ति को निम्नलिखित सजा दी जा सकती है…. वही किसी भी प्रकार की अवधि के लिए जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही उसे पाँच हजार रुपये तक का जुर्माना। इसके अलवा कारावास (Imprisonment)) और जुर्माना (Fine Charges) दोनों हो सकते हैं।



