251 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 251 उस स्थिति से संबंधित है जिसमें कोई व्यक्ति एक अपराधी को छिपाने या उसे कानूनी दंड से बचाने के लिए उपहार या संपत्ति की बहाली (Restoration of Property) की पेशकश करता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 251 क्या कहती है? BNS Section 251 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 250 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 251 उस व्यक्ति को दंडित करती है जो किसी अन्य व्यक्ति को उपहार देता है/देने का कारण बनता है, या देने की पेशकश करता है/देने के लिए सहमत होता है, या किसी संपत्ति को इस इरादे से वापस करता है/वापस करवाता है…
किसी अपराध के किए जाने को छुपाना।
किसी व्यक्ति को उस अपराध के लिए कानूनी दंड से बचाना।
किसी व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी दंड की कार्यवाही को रोकना।
BNS 251 Important Points
- धारा का प्राथमिक उद्देश्य भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को रोकना है, ताकि अपराधियों को किसी प्रकार का संरक्षण न मिले।
- इस धारा के प्रावधान उन मामलों पर लागू नहीं होते हैं जिनमें अपराध कानूनी रूप से समझौता (Compoundable) किया जा सकता है।
- उदहारण के लिए.. बैंक डकैती एक गंभीर अपराध है जिसके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। इस मामले में, ‘A’ ने ‘B’ को सजा से बचने के लिए ₹5 लाख की रिश्वत दी। ‘B’ ने जानबूझकर यह राशि स्वीकार की और अपराधी को छुपाने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को रोकने का प्रयास किया। सीआरपीसी की धारा 251 इसी तरह के कृत्य के लिए दंडनीय है, जिसमें कोई व्यक्ति किसी गंभीर अपराध (डकैती) के लिए अपराधी को सजा से बचाने के बदले में ₹5 लाख का उपहार स्वीकार करता है। ‘B’ ने इस धारा का उल्लंघन किया है और उसे सात साल तक की कैद और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
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बीएनएस धारा 251 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 251 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यदि झूठा आरोप किसी ऐसे अपराध से संबंधित है, जिसके लिए मृत्यु दंड, आजीवन कारावास (life imprisonment), या 3 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है, तो दोषी को 3 वर्ष के कारावास (imprisonment) से दंडनीय है, या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।



