BNS section 258: भ्रष्ट अधिकारी की मनमानी पर लगेगी लगाम

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258 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 258 किसी लोक सेवक या ऐसे व्यक्ति से संबंधित जिसके पास किसी व्यक्ति को परीक्षण के लिए भेजने या उसे कारावास में रखने का कानूनी अधिकार है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 258 क्या कहती है? BNS Section 258 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 258 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 258 किसी व्यक्ति को मुकदमे के लिए सौंपने या किसी व्यक्ति को जेल में निरुद्ध करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किसी पद पर होते हुए, भ्रष्ट या द्वेषपूर्ण ढंग से किसी व्यक्ति को मुकदमे के लिए सौंपता है या किसी व्यक्ति को जेल में निरुद्ध करता है, यह जानते हुए कि ऐसा करने से वह कानून के विरुद्ध कार्य कर रहा है।

यदि कोई विधिक प्राधिकारी (जैसे पुलिस अधिकारी, मजिस्ट्रेट, आदि) व्यक्तिगत द्वेष या भ्रष्टाचार के कारण, बिना किसी विधिक आधार के, किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करता है, निरुद्ध करता है, या मुकदमे के लिए भेजता है, यह जानते हुए कि उसका कार्य कानून के विरुद्ध है, तो वह इस धारा के अंतर्गत दोषी होगा।

BNS 258 Important Points

  • इस धारा का उद्देश्य व्यक्तियों को ऐसे अधिकारियों की मनमानी से बचाना है जो अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं और न्याय व निष्पक्षता बनाए रखना है। 

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बीएनएस धारा 258 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 258 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। दोषी पाए जाने पर आरोपी को अधिकतम सात साल तक की कैद या जुर्माना, या दोनों से ही दण्डित किया जाता है। इसके अलवा आपको बता दें, भारतीय न्याय संहिता (BNS) में हुए नए बदलाव के बाद आरोपी भ्रष्टचार करते हुए पाया जाता है तो दोषी को कड़ी-से -कड़ी सजा होती है। चाहे फिर कोई भी व्यक्ति क्यों ही न हो। यह एक असंज्ञेय अपराध है (पुलिस बिना वारंट के गिरफ़्तारी नहीं कर सकती)। यह एक ज़मानती अपराध है और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

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