BNS section 262: गिरफ्तारी से बचने या हिरासत से फरार होने पर कितनी साल की सज़ा?

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262 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 262 उस व्यक्ति से संबंधित है जो अपनी वैध गिरफ्तारी में रुकावट डालता है, या वैध हिरासत से भागने का प्रयास करता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 262 क्या कहती है? BNS Section 262 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 262 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 262 के तहत कोई भी व्यक्ति जो जानबूझकर अपनी वैध गिरफ्तारी के दौरान बाधा डालता है या अवरोध उत्पन्न करता है, उस पर आरोप लगाया गया है या उसे दोषी ठहराया गया है। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति विधिपूर्वक हिरासत में है और वह वहां से भागने का प्रयास करता है, तो भी यह एक अपराध है।

For example: यदि किसी व्यक्ति पर चोरी का आरोप है और जब उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस पहुंचती है, तो वह दरवाजे के सामने भारी सामान रखकर पुलिस को घर में प्रवेश करने से रोकता है, यह वैध गिरफ्तारी में बाधा देने वाला कार्य माना जाएगा। इस स्थिति में, उसे चोरी के आरोप के साथ-साथ BNS की धारा 262 के तहत भी दंडित किया जा सकता है।

BNS 262 Important Points

  • इस कानून का मकसद यह पक्का करना है कि गिरफ्तारी के दौरान कानून की प्रक्रिया में किसी भी तरह से रुकावट न आए और अपराधी को न्याय से बचने का मौका न मिले।

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बीएनएस धारा 262 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 262 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यदि यह सिद्ध होता है कि कोई लोक सेवक जानबूझकर किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ने में चूक करता है, जो आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध के लिए जिम्मेदार था, तो उसे जुर्माने के साथ या उसके बिना 2 साल तक की जेल हो सकती है।

संज्ञेय/असंज्ञेय (Cognizable/Non-Cognizable) – यह एक असंज्ञेय अपराध है। इसका अर्थ है कि पुलिस मजिस्ट्रेट (Police Magistrate) के आदेश के बिना गिरफ्तारी नहीं कर सकती।

जमानती/गैर-जमानती (Bailable/Non-Bailable) – यह एक जमानती अपराध है, जिसका अर्थ है कि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

विचारणीय न्यायालय (Triable By) – यह मामला किसी भी मजिस्ट्रेट (Any Magistrate) द्वारा विचारणीय है।

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