BNS section 266: दंड की माफी के उल्लंघन पर क्या कहता है कानून और कितनी मिलेगी सजा?

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266 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 266 एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रावधान है जो दंड की माफी (Remission of Punishment) की शर्तों के उल्लंघन से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 266 क्या कहती है? BNS Section 266 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 266 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 266 “जो कोई भी, सज़ा में कंडीशनल छूट मिलने के बाद, जानबूझकर उन शर्तों को तोड़ता है जिन पर ऐसी छूट दी गई थी, उसे वही सज़ा दी जाएगी जो उसे शुरू में मिली थी।”

इसका मतलब है कि अगर किसी दोषी व्यक्ति को कुछ शर्तों के आधार पर उसकी जेल की सज़ा में छूट दी जाती है, और वह जानबूझकर उन शर्तों को तोड़ता है, तो उसकी छूट रद्द कर दी जाएगी और उसे अपनी असली सज़ा काटनी होगी।

BNS 266 Important Points

सेक्शन 266 से जुड़ी सबसे ज़रूरी बातें और इसे तोड़ने के नतीजे इस तरह हैं कि…

  • कंडीशनल रिमिशन (Conditional Remission) – यह सेक्शन तभी लागू होता है जब रिमिशन किसी शर्त पर दी गई हो।
  • जानबूझकर किया गया उल्लंघन: शर्त का उल्लंघन जानबूझकर किया जाना चाहिए। यह सेक्शन अनजाने में किए गए अपराध पर लागू नहीं होगा।
  • अगर कोई हिस्सा पूरा नहीं हुआ है – अगर दोषी ने अभी तक असली सज़ा का कोई हिस्सा पूरा नहीं किया है (रिमिशन मिलने पर रिहा हो गया था), तो उसे पूरी असली सज़ा काटनी होगी।
  • जैसे अगर दोषी कि सजा का कुछ हिस्सा पूरा हो गया है – अगर दोषी ने असली सज़ा का कुछ हिस्सा पहले ही काट लिया है (जैसे पैरोल पर रिहा होना), तो उसे बाकी असली सज़ा काटनी होगी।
  • For example: मान लीजिए किसी आदमी को चोरी के लिए 5 साल जेल की सज़ा हुई। 2 साल बाद, उसे इस शर्त पर रिहा किया गया कि वह पुलिस को बताए बिना अपना शहर नहीं छोड़ेगा। नहीं तो उसे अपने बच्चे हुए 3 साल की सजा को वापस से पूरा करना पड़ेगा।

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बीएनएस धारा 266 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 266 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यदि व्यक्ति ने मूल सजा का कुछ हिस्सा पहले ही भुगत लिया है, तो उसे शेष हिस्से को पूरा करना होगा। आपको बता दें, इस धारा के तहत पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। वही जमानत मिलना आसान नहीं होता, यह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।

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