BNS section 267: न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा भंग करने पर सज़ा 6 महीने की सजा

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267 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 267 उस व्यक्ति को सज़ा देता है जो किसी सरकारी कर्मचारी को जानबूझकर बेइज्जत करता है या उसके काम करने में रुकावट डालता है, जब वह किसी भी न्यायिक कार्रवाई के किसी भी स्टेज पर बैठा हो। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 267 क्या कहती है? BNS Section 267 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 267 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 267  यह सेक्शन पब्लिक जस्टिस के खिलाफ अपराधों के चैप्टर 14 के तहत आता है। इसका मकसद न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और सुचारू कामकाज को बनाए रखना है।

जिसके तहत जो कोई भी यह अपराध करता है तो उसे  छह महीने तक की साधारण कैद और पाँच हज़ार रुपये तक का जुर्माना। ये दोनो सजा कोर्ट द्वारा दी जाति हैं।

BNS 267 Important Points

  • यह सेक्शन किसी सरकारी कार्रवाई के दौरान जानबूझकर किसी सरकारी कर्मचारी का अपमान करना या उसके काम में रुकावट डालना एक अपराध बनाता है।
  • इस अपराध की सुनवाई उस कोर्ट में होती है जिसमें यह किया गया है, या अगर कोर्ट में नहीं, तो किसी मजिस्ट्रेट द्वारा।
  • For example: इस धारा के तहत यदि कोई बेवजह चिल्लाता है, या गलत बातें कहता हो, या फिर कोर्ट की कार्रवाई के दौरान जज के काम में रुकावट डालना शामिल है।

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बीएनएस धारा 267 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 267 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। वही दोषी पाए जाने पर आरोपी को इस धारा के तहत आरोपी को 6 महीने की सजा और जुर्माना (Fine) हैं। जिसे पांच हजार रुपये तक या दोनों के साथ बढ़ाया जा सकता है। वही जमानत मिलना आसान नहीं होता, यह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है। आपको बता दें, इस धारा के तहत पुलिस बिना वारंट के किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। दूसरी और ये अपराध यह अपराध जमानती (Bailable) है।

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