273 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 273 “क्वारंटाइन नियमों के उल्लंघन” से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 273 क्या कहती है? BNS Section 273 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 273 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 273…मुख्य रूप से संक्रामक बीमारियों (Infectious diseases) के फैलने के दौरान क्वारंटाइन नियमों की जानबूझकर अनदेखी करने से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि जो लोग सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों का उल्लंघन करते हैं, खासकर वे नियम जो ट्रांसपोर्ट (Transport) के साधनों या प्रभावित इलाकों के बीच आवाजाही से संबंधित हैं, उन्हें छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सज़ा हो सकती है। COVID-19 महामारी के दौरान भी ऐसा ही देखा गया था। पूरे देश को कुछ समय के लिए क्वारंटाइन में रखा गया था, और जिन्होंने इस नियम का उल्लंघन किया, उन्हें कड़ी सज़ा और जुर्माना देना पड़ा था।
BNS 273 Important Points
- आपको बता दें, यह सेक्शन नीचे दिए गए नियमों के उल्लंघन को अपराध मानता है…परिवहन के साधनों (जैसे वाहन, ट्रेन, जहाज या विमान) के क्वारंटाइन से जुड़े नियम।
- क्वारंटाइन किए गए परिवहन के साधनों और दूसरी जगहों के बीच संपर्क को नियंत्रित करने वाले नियम।
- संक्रामक बीमारियों से प्रभावित इलाकों और दूसरे इलाकों के बीच संपर्क को नियंत्रित करने वाले नियम।
बीएनएस धारा 273 का उदहारण
- For example: मान लीजिये अगर किसी ट्रक ड्राइवर को पता है कि उसके इलाके में कोई संक्रामक बीमारी (Infectious disease) फैल रही है और सरकार ने आदेश दिया है कि सभी ट्रकों को एक तय चेकपॉइंट पर क्वारंटाइन (Quarantine) से गुज़रना होगा, लेकिन वह जानबूझकर उस चेकपॉइंट को बाईपास करता है, तो उसे BNS की धारा 273 के तहत सज़ा दी जा सकती है।
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बीएनएस धारा 273 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 273 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, अपराधी को 6 महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलवा यह एक संज्ञेय अपराध है, जिसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। यह जमानती अपराध है। इस पर किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है।



