BNS Section 274: खाने-पीने की चीज़ों में मिलावट पर कितने साल की सजा?

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274 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 274 मुख्य रूप से बेचने के लिए बनाए गए खाने-पीने की चीज़ों में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स से संबंधित है। जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुविधा, शालीनता और नैतिकता को प्रभावित करने वाले अपराध शामिल हैं। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 274 क्या कहती है? BNS Section 274 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 274 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 274…जो कोई भी किसी खाने या पीने की चीज़ में इस तरह मिलावट करता है कि वह खाने या पीने के लिए नुकसानदायक या खतरनाक हो जाए, और ऐसा बेचने के इरादे से करता है, या यह जानते हुए करता है कि उसे खाने या पीने की चीज़ के तौर पर बेचा जा सकता है, तो वह इस सेक्शन के तहत अपराध का दोषी होगा।

BNS 274 Important Points

  • यह सेक्शन खाने में मिलावट जैसी अनैतिक हरकतों पर कड़ी सज़ा देकर पब्लिक हेल्थ की सुरक्षा और कंज्यूमर अधिकारों की रक्षा करता है।

बीएनएस धारा 274 का उदहारण 

  • For example: जैसे अगर कोई दूध बेचने वाला ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए दूध में पानी मिलाता है और उसे खराब होने से बचाने के लिए उसमें एक नुकसानदायक केमिकल प्रिजर्वेटिव भी मिलाता है, जिससे दूध पीने के लिए असुरक्षित हो जाता है, तो उस पर BNS की धारा 274 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
  • इसी तरह, अगर कोई घी बेच रहा है और उसे असली घी जैसा स्वाद और खुशबू देने के लिए उसमें वनस्पति (हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल ऑयल) मिलाता है, और साथ ही ऐसे केमिकल भी मिलाता है जो ग्राहक की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, तो इस मामले में भी उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

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बीएनएस धारा 274 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 274 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, अपराधी को 6 महीने तक की जेल, पाँच हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलवा यह एक संज्ञेय अपराध है, जिसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। यह जमानती अपराध है। इस पर किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है।

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