BNS Section 277: नकली और हानिकारक दवाओं के व्यापार पर कानूनी शिकंजा

BNS Section 277, BNS Section 277 in Hindi
Source: Google

277 BNS in Hindi:  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 277 मुख्य रूप से ‘जहर या किसी खतरनाक पदार्थ या दवाई के संबंध में लापरवाही बरतने’ से जुड़ी है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

Also Read: BNS Section 274: खाने-पीने की चीज़ों में मिलावट पर कितने साल की सजा?

धारा 277 क्या कहती है? BNS Section 277 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 277 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 277…यह धारा उन स्थितियों पर फोकस करता है जहाँ कोई व्यक्ति ज़हरीले पदार्थ को इस तरह से संभालता या इस्तेमाल करता है जिससे इंसानी ज़िंदगी खतरे में पड़ जाए। कोई जानबूझकर ऐसी गैर-कानूनी दवाएँ बेच रहा हो या बना रहा हो जिससे इंसानी ज़िंदगी खतरे में पड़ सकती है। इसका धारा का मुख्य मकसद केमिकल्स और ज़हरीले पदार्थों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।

BNS 277 Important Points

  • यह धारा पुरानी IPC की धारा 284 के समान है। जो अब बदलकर BNS की धारा 277 हो गयी हैं।
  • जानबूझकर कोई ऐसी दवा बेचना, बेचने के लिए पेश करना, या फ़ार्मेसी से देना जो मिलावटी हो, जिससे वह कम असरदार, बदली हुई, या नुकसानदायक हो जाए, भले ही खरीदने वाले को मिलावट के बारे में पता न हो।

बीएनएस धारा 277 का उदहारण 

  • For Example: यदि एक लैब के मालिक या कीटनाशक विक्रेता ज़हरीले रसायनों की बोतल को सड़क पर खुला छोड़ देता है या बिना चेतावनी के लेबल वाले कंटेनर में संग्रहित करता है, तो इस लापरवाही के परिणामस्वरूप अगर किसी राहगीर या बच्चे की जान को खतरा होता है, तो उस मालिक के खिलाफ कानून की धारा 277 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

Also Read: BNS Section 273: क्वारंटाइन नियमों के उल्लंघन पर जाने क्या सज़ा और प्रावधान

बीएनएस धारा 277 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 277  के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, अपराधी को 6 महीने तक की जेल, पाँच हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *