285 BNS in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 285 सार्वजनिक सुरक्षा (Public safety) और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रावधान है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
धारा 285 क्या कहती है? BNS Section 285 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 285 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 285…के अनुसार, सार्वजनिक मार्ग (Public way) या नौपरिवहन लाइनों (Line of Navigation) में किसी तरह की खतरा या बाधा उत्पन्न या फिर किसी व्यक्ति को चोट (Injury) पहुचने से संबंधित है, जो किसी व्यक्ति की गतिविधि या लापरवाही के कारण होती है।
BNS 285 Important Points
- यह सेक्शन न केवल जानबूझकर किए गए कामों पर बल्कि चूक पर भी लागू होता है।
- यह सेक्शन पब्लिक जगहों (सड़कों, जलमार्गों) पर सुरक्षा बनाए रखने और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को रोकने पर ज़ोर देता है, जैसा कि पहले इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 283 के तहत कवर किया गया था, लेकिन अब सज़ा बढ़ा दी गई है।
बीएनएस धारा 285 का उदहारण
For Example: मान लीजिये कोई व्यक्ति अपना मकान बनवा रहा है और उसने अपने घर के पास ही सड़क किनारे घर बनाते समय सड़क पर ईंटें या मलबा छोड़ दिया है। जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है और किसी को भी गंभीर चोट आ सकती है। इस सिचुएशन में बीएनएस धारा 285 लागु होती है।
वही अगर कोई दुकानदार अपना सामान सड़क या फुटपाथ पर फैला देता है, जिससे पैदल चलने वालों को परेशानी होती है। कानून का यह सेक्शन तब भी लागू किया जा सकता है, जब सड़क पर किसी भी तरह का ट्रैफिक जाम हो।इसके अलवा जलमार्गों में रुकावट जैसे कि नदी या नहर के बीच में कोई ढांचा बनाना जिससे नावों के लिए खतरा पैदा हो।
बीएनएस धारा 285 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 285 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, 6 महीने तक का साधारण कारावास (Simple imprisonment) और अपराधी को 5000 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता हैं। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।



