BNS Section 287: आग या ज्वलनशील पदार्थों से लापरवाही पड़ेगी भारी, जानें सजा और नियम

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287 BNS in Hindi:  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 287 आग या ज्वलनशील केमिकल से संबंधित लापरवाही भरे व्यवहार से जुड़ी हुई है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 287 क्या कहती है? BNS Section 287 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 287 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 287…के अनुसार, यह सेक्शन लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है ताकि यह पक्का किया जा सके कि लोग आग या ज्वलनशील चीज़ों (जैसे पेट्रोल, गैस, केमिकल वगैरह) का इस्तेमाल करते समय लापरवाही न करें।

अगर कोई व्यक्ति लापरवाही से आग या किसी भी ज्वलनशील चीज़ को इस तरह से इस्तेमाल करता है जिससे दूसरे व्यक्ति की जान खतरे में पड़ जाए, या उस चीज़ के ज़हरीले स्वभाव के कारण मौत हो जाए, या चोट या नुकसान की संभावना बढ़ जाए, तो वह व्यक्ति अपराधी माना जाएगा। इसमें न सिर्फ़ गलत काम करना शामिल है, बल्कि अपने पास मौजूद आग या ज्वलनशील चीज़ों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए ज़रूरी सावधानियां न बरतना भी शामिल है।

BNS 287 Important Points

  • आपको बता दें, इस सेक्शन का मकसद आग से जुड़े खतरों को कम करना और लोगों को ज्वलनशील चीज़ों को ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा देना है। यदि कोई इसके विपरीत कार्य करता है तो उसके कड़ी सजा हो सकती है।

बीएनएस धारा 287 का उदहारण 

For Example: यह सेक्शन तब लागू हो सकता है जब कोई व्यक्ति बिना किसी सुरक्षा सावधानी के रिहायशी इलाके में बड़ी मात्रा में पटाखे बनाता है, या खुली जगह में ज्वलनशील गैसें छोड़ता है, जिससे आम जनता की जान को खतरा होता है। या, अगर ज़हरीली गैस से लोगों की मौत होती है, तो भी कानून का यह सेक्शन लागू होगा।

बीएनएस धारा 287 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 287 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, 6 महीने तक का साधारण कारावास (Simple imprisonment) और अपराधी को 2000 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता हैं। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।

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