BNS Section 290: निर्माण और मरम्मत के दौरान लापरवाही अब पड़ेगी भारी, जाने कितनी मिलेगी सजा

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290 BNS in Hindi:  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 289 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 290 यह इंडियन पीनल कोड (IPC) की पुरानी धारा 288 का आधुनिक वर्जन है, जिसे BNS की धारा 290 से बदल दिया गया है। यह धारा खास तौर पर कंस्ट्रक्शन या रिपेयर के काम के दौरान लोगों की सुरक्षा पक्का करने के लिए बनाई गई है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 290 क्या कहती है? BNS Section 290 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 290 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 290..जब कोई पुरानी बिल्डिंग गिराई जा रही होती है, किसी बिल्डिंग की मरम्मत हो रही होती है, या नया कंस्ट्रक्शन चल रहा होता है, तो अक्सर मलबा गिरने या पूरी बिल्डिंग के ढहने का खतरा रहता है। यह सेक्शन उन लोगों को ज़िम्मेदार ठहराता है जो ज़रूरी सुरक्षा उपायों को लागू करने में नाकाम रहते हैं और इसके कारण किसी की जान माल को नुकसान हो।

BNS 290 Important Points

  • इस धारा के अंतर्गत यह कार्य आता है जब किसी बिल्डिंग का निर्माण हो रहा हो तो उसको को गिराना, रिपेयर करना या बनाना उसमे सावधानी बरतना ।
  • लापरवाही या चूक जैसी घटना – जब कोई व्यक्ति जानबूझकर या लापरवाही से इंसानी ज़िंदगी को खतरे से बचाने के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपाय नहीं करता है।
  • संभावित खतरा यह ज़रूरी नहीं है कि असल में किसी की मौत हो या कोई घायल हो; अगर व्यक्ति की लापरवाही से इंसानी ज़िंदगी को संभावित खतरा पैदा होता है, तो इसे अपराध माना जाएगा।

बीएनएस धारा 290 का उदहारण 

For Example: अगर कोई ठेकेदार किसी व्यस्त सड़क के किनारे पुरानी दीवार को बिना किसी सेफ्टी नेट या बैरिकेड के तोड़ता है, जिससे गिरने वाले मलबे से राहगीरों की जान को खतरा होता है, तो उस पर कानून की धारा 290 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है और अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा हो सकती हैं।

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बीएनएस धारा 289 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 290 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, 6 महीने तक का साधारण कारावास (Simple imprisonment) और अपराधी को 2000 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता हैं। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।

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