291 BNS in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 291 यह सेक्शन लोगों की सुरक्षा पक्का करने के लिए बनाया गया है, ताकि पालतू जानवरों या अपने पास रखे जानवरों के मालिकों की लापरवाही से किसी को नुकसान न पहुँचे। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
धारा 291 क्या कहती है? BNS Section 291 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 291 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 291..आपने शायद अक्सर लोगों को बिल्लियों और कुत्तों जैसे अपने पालतू जानवरों को बाहर घुमाते हुए देखा होगा। हालाँकि, कभी-कभी ये जानवर किसी को काट लेते हैं। ऐसे हालात से निपटने के लिए धारा 291 बनाई गयी, यह तब लागू होती है जब किसी का पालतू जानवर किसी दूसरे व्यक्ति को काट लेता है।
यह धारा तब भी लागु होती है जब व्यक्ति जानबूझकर या लापरवाही से जानवर की उचित देखभाल नहीं करता, जिससे दूसरों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। वही ये धारा केवल वास्तविक चोट पहुंचाने पर ही नहीं लागू होती है, बल्कि “गंभीर चोट” का खतरा भी सजा का कारण बन सकता है।
BNS 291 Important Points
- जानवर का स्वामित्व या नियंत्रण जानवर उस व्यक्ति के पास होना चाहिए या उसकी देखरेख में होना चाहिए।
- आपको बता दें, पुराने कानून, इंडियन पीनल कोड (IPC) के तहत, यह प्रावधान सेक्शन 289 के तहत आता था। BNS 291 में मुख्य बदलाव जुर्माने की रकम में बढ़ोतरी और कानूनी ढांचे का आधुनिकीकरण है।
बीएनएस धारा 291 का उदहारण
For Example: अगर कोई व्यक्ति अपने आक्रामक कुत्ते को ऐसी जगह पर बिना रस्सी के घूमने देता है जहाँ बच्चे खेल रहे हैं, और कुत्ता ऐसी स्थिति पैदा करता है कि वह किसी पर हमला कर सकता है या फिर कर देता है। जिस कारण किसी को गंभीर चोट लग जाती या फिर जान का खतरा है, तो मालिक पर कानून की धारा 291 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
Also Read: BNS Section 288: सावधान! विस्फोटकों के साथ लापरवाही पड़ सकती है महंगी, हो सकती है जेल
बीएनएस धारा 291 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 290 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, 6 महीने तक का साधारण कारावास (Simple imprisonment) और अपराधी को 2000 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता हैं। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।



