294 BNS in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 अश्लील सामग्री की बिक्री, वितरण और प्रदर्शन से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 294 क्या कहती है? BNS Section 294 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 293 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 293… धारा 294 के अनुसार, यह सेक्शन किसी भी अश्लील सामग्री पर रोक लगाता है। कानून के अनुसार, कंटेंट को अश्लील तब माना जाता है जब वह सेक्शुअली एक्सप्लिसिट (sexually explicit) हो, यौन इच्छाओं को भड़काए, या पब्लिक नैतिकता को खराब करे।
इस सेक्शन के तहत निम्नलिखित कामों को अपराध माना जाता है, जैसे कि अश्लील किताबें, तस्वीरें, या इलेक्ट्रॉनिक सामग्री (जैसे वीडियो/फोटो) बेचना, किराए पर देना, या बांटना। वही ऐसी content को Publicly रूप से दिखाना। इसके अलवा अश्लील कंटेंट बनाना या (कमर्शियल मकसद से) अपने पास रखना। जो कि विज्ञापन के रूप में दिखया जा सकें।
BNS 294 Important Points
- BNS की धारा 294 में साफ़ तौर पर “इलेक्ट्रॉनिक रूप” में दिखाए गए कंटेंट (जैसे WhatsApp, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर) को शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि अब इसी धारा के तहत डिजिटल अश्लीलता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
बीएनएस धारा 294 का उदहारण
For Example: उदाहरण के लिए, अगर कोई आपको इंटरनेट पर WhatsApp के ज़रिए ऐसा कंटेंट भेजता है जो अश्लील है और तनाव और सामाजिक अशांति फैलाता है, तो कानून की यह धारा उस अपराधी पर लागू की जा सकती है जिसने सोशल मीडिया पर वह कंटेंट फैलाया।
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बीएनएस धारा 294 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 294 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत पहला अपराध करने पर अपराधी को 3 साल तक की जेल और ₹5 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। वही दूसरी बार अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और ₹5,000 तक का जुर्माना अगर यह मामला नाबालिगों से जुड़ा हो। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।



