297 BNS in Hindi: सोचिए कि आप लॉटरी जीत जाते हैं, लेकिन फिर आपको पता चलता है कि आपने जो लॉटरी टिकट खरीदा था, वह इनवैलिड और गैर-कानूनी है। ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 297 लागू होती है। कानून का यह सेक्शन मुख्य रूप से समाज में जुए के चलन को रोकने और लोगों को अवैध लॉटरी के ज़रिए धोखाधड़ी से बचाने के लिए बनाया गया था। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
Also Read: BNS Section 295: बच्चों को अश्लील कंटेंट से बचाने के लिए क्या है सजा का प्रावधान?
धारा 297 क्या कहती है? BNS Section 297 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 297 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 297… उस पर लागू होती है जो कोई भी सरकारी इजाज़त (स्टेट लॉटरी) के बिना लॉटरी चलाने के मकसद से कोई ऑफिस या जगह रखता है, और गैर क़ानूनी तरीके से चलता है तो उसे छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सज़ा हो सकती है।
BNS 297 Important Points
अवैध लॉटरी ऑफिस – अगर कोई व्यक्ति अवैध लॉटरी ऑफिस खोलता है या ऐसी जगह पर चलता है जिसकी राज्य सरकार ने मंज़ूरी नहीं दी है, और वो फिर भी ऐसा करता है तो उसे 6 महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
विज्ञापन पर रोक – कोई भी व्यक्ति ऐसी किसी भी अवैध लॉटरी से जुड़े किसी भी प्रस्ताव या टिकटों के बंटवारे का विज्ञापन या प्रकाशन नहीं करेगा।
आपको बता दें भारत में, सिर्फ़ वही लॉटरी कानूनी मानी जाती हैं जिन्हें ‘लॉटरी (रेगुलेशन) एक्ट, 1998’ के तहत खास राज्य सरकारों से मंज़ूरी मिली हो। या फिर केन्द्र सरकार द्वारा मंजूरी मिली हो।
बीएनएस धारा 297 का उदहारण
For Example: मान लीजिये यदि कोई व्यक्ति अवैध लॉटरी का विज्ञापन या प्रमोशन करता है जिसकी सरकार ने मंजूरी नहीं दी है तो उस व्यक्ति पर ₹5,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
Also Read: BNS Section 294: अश्लील सामग्री बेचना या दिखाना अब पड़ेगा भारी, जानें क्या है नया कानून?
बीएनएस धारा 297 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 297 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत अपराधी को साधारण दंड और 3 महीने की सजा के ₹1,000 जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।



