300 BNS in Hindi: आपने न्यूज़ डिबेट्स और अख़बारों के आर्टिकल्स में कई बार सुना और पढ़ा होगा कि किसी ने जानबूझकर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिससे दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची।लेकिन क्या आप जानते है ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 300 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 300 क्या कहती है? BNS Section 300 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 300 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 300… यह धारा उस पर लागू होती है जो किसी भी समुदाय के लोग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और हीन भाव तरीके से ठेस पहुँचाता, या फिर उनकी धर्म का मजाक बनता है साथ ही धार्मिक मान्यताओं का अपमान करता है तो यह धारा लागू होती है।
BNS 300 Important Points
- यह धारा पहले IPC की पुरानी धारा 295A थी। जिसे अब बदलकर BNS की धारा 300 में बदल दिया है।
- यह सेक्शन तब भी लागू होता है जब कोई बोलने, लिखने या डिजिटल माध्यमों से प्रचार करके धार्मिक अपमान करता है।
- गए धार्मिक अपमान के लिए 3 साल तक की कैद या जुर्माना का प्रावधान करती है।
बीएनएस धारा 300 का उदहारण
For Example: मान लीजिए कि कोई व्यक्ति जानबूझकर सोशल मीडिया (फेसबुक/इंस्टाग्राम) पर किसी खास धर्म के पवित्र प्रतीकों या पूजनीय हस्तियों के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करता है या आपत्तिजनक मीम्स शेयर करता है। उसका मकसद उस धर्म को मानने वालों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना और सार्वजनिक शांति भंग करना है। इस मामले में, धारा 300 लागू होगी क्योंकि यह काम सार्वजनिक रूप से किया गया है और साफ तौर पर धार्मिक नफरत भड़काने के इरादे से किया गया है।
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बीएनएस धारा 300 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 300 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत अपराधी को साधारण दंड और 3 साल की सजा के जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।



