302 BNS in Hindi: हमने अक्सर लोगों को दूसरों के धार्मिक समारोहों और धर्मग्रंथों को पढ़ते हुए देखा है, लेकिन साथ ही, वे दूसरों की धार्मिक मान्यताओं का अपमान भी करते हैं। इतना ही नहीं, वे दूसरे धर्मों के देवी-देवताओं का भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करके अपमान करते हैं। लेकिन क्या आप जानते है ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 302 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 302 क्या कहती है? BNS Section 302 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 302 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 302…धार्मिक सद्भाव बनाए रखना और ऐसे कामों को रोकना जो जानबूझकर किसी की धार्मिक मान्यताओं को निशाना बनाते हैं और मनमुटाव पैदा करते हैं। उदाहरण के लिए, आपने हाल ही में बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह के बारे में खबर सुनी होगी, जिन्होंने कथित तौर पर ऐसे हावभाव बनाये जिस कारण एक फिल्म में दक्षिण भारतीय देवता का अपमान किया था।
BNS 302 Important Points
- यह सेक्शन ऐसे किसी भी व्यक्ति पर लागू होता है जो जानबूझकर ऐसे शब्द बोलता है, आवाज़ें निकालता है, हाव-भाव दिखाता है, या ऐसी चीज़ें दिखाता है जो दूसरे धर्मों के लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाती हैं।
- आपको बता दें, इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 302 में हत्या की सज़ा का प्रावधान था, जिसे अब BNS की धारा 103 में ट्रांसफर कर दिया गया है।
बीएनएस धारा 302 का उदहारण
For Example: उदाहरण के लिए, हाल ही में एक फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी में बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने साउथ इंडियन फिल्म कांतारा में भगवान के हाव-भाव की नकल की, जिससे कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। ऐसे मामलों में, कानून की यह धारा लागू होगी।
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बीएनएस धारा 302 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 302 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से किसी की धार्मिक भावना को नुकसान पहुँचता है या फिर किसी की मौत हो जाने पर अंतिम संस्कार में मुश्किले पैदा करता है तो इस सेक्शन के तहत अपराधी को साधारण दंड और 1 साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।



