313 BNS in Hindi: हम अक्सर ऐसी खबरें सुनते हैं और जानते हैं कि किसी की मौत के बाद उसकी प्रॉपर्टी को बेईमानी से बेचना या यूज़ करना जुर्म माना जाता है। तो ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 313 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 313 क्या कहती है? BNS Section 313 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 313 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 313 मुख्य रूप से उस व्यक्ति पर लागू होती है जो यह जानते हुए कि कोई व्यक्ति मर चुका है, बेईमानी से उस व्यक्ति की प्रॉपर्टी जो मौत के समय उसके पास थी। उसे उसके असली वारिस को नहीं देता है बल्कि बेचता है, तो अपराधी के खिलाफ यह धारा लागू होती है।
BNS 313 Important Points
- इस सेक्शन का मुख्य मकसद उन लोगों की रक्षा करना है जो वारिस होने के बावजूद प्रॉपर्टी से वंचित हैं और किसी तीसरे व्यक्ति को किसी की मौत का फायदा उठाकर प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करने से रोकना है।
- मृत व्यक्ति के पास मौजूद संपत्ति (पैसे, गहने, सामान) का वारिसों तक पहुंचने से पहले गबन।
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BNS 313 example
मान लीजिए सुरेश नाम का एक व्यक्ति है जो अपने दोस्त के साथ किसी दूसरी जगह रहता है और उसकी मौत हो जाती है, लेकिन उसके पास लाखों रुपये की प्रॉपर्टी और ज्वेलरी है जिसे उसका दोस्त असली वारिस को देने के बजाय खुद हड़पने की कोशिश करता है, तो ऐसे में यह सेक्शन उस पर लागू होता है।
बीएनएस धारा 313 की और सजा
इसके अलावा, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (BNS) का सेक्शन 313 धोखे से चोरी के दोषी व्यक्ति के लिए सज़ा तय करता है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति मृत इंसान के प्रॉपर्टी चोरी करने के इरादे से फ्रॉड करके लूटता है। तो इस सेक्शन के तहत अपराधी को साधारण दंड और 3 साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं।



