BNS Section 315: मृतक की संपत्ति हड़पना अब पड़ेगा भारी, जानें क्या कहती है नई धारा?

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315 BNS in Hindi: अक्सर हम ऐसी खबरें सुनते हैं जो हमारे अपने परिवार या पड़ोस से होती हैं जहां किसी की मौत के बाद उसकी प्रॉपर्टी उसके असली मालिक तक पहुंचने से पहले ही हड़प ली जाती है। तो ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 315 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 315 क्या कहती है? BNS Section 315 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 315 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 315 मुख्य रूप से उस व्यक्ति पर लागू होती है। जो यह जानते हुए कि प्रॉपर्टी किसी मरे हुए व्यक्ति की है (और वारिसों को नहीं दी गई है) उसे अपने इस्तेमाल के लिए ले लेता है या उसे नष्ट कर देता है, तो यह सेक्शन 315 के तहत एक अपराध है।

BNS 315 Important Points

  • इंडियन पीनल कोड (IPC) का सेक्शन 315 पहले IPC का सेक्शन 404 था, जिसे नए नियम से बदल दिया गया है।
  • इस सेक्शन का मुख्य मकसद मरे हुए लोगों के परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना और प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल निजी फायदे के लिए होने से रोकना है।

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BNS 315 example

मान लीजिये अगर परिवार में किसी महिला की मौत हो जाती है और मौत के तुरंत बाद उसका पड़ोसी या जान-पहचान वाला उसकी ज्वेलरी या कैश लेकर बेच देता है, तो उसे इस सेक्शन के तहत अपराधी को सज़ा हो सकती है।

बीएनएस धारा 315  की और सजा

इसके अलावा, (BNS) का सेक्शन 315 चोरी के दोषी व्यक्ति के लिए सज़ा तय करता है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति किसी की मौत के बाद अपनी निजी संपत्ति अपने फायदे के लिए ले लेता है और उसे उसके असली मालिक को नहीं देता।तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 साल की जेल का प्रावधान है, जिसे 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही जुर्माना भी देना होगा। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं।

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