321 BNS in Hindi: हर रोज़, हमें अखबारों में या अपने आस-पास ऐसे लोगों के बारे में कई खबरें मिलती हैं, जिन्होंने बेईमानी से किसी से उधार लिया हुआ पैसा चुका न पाने पर, अपनी संपत्तियों का मालिकाना हक किसी तीसरे पक्ष को चाहे गुपचुप तरीके से या औपचारिक रूप से हस्तांतरित कर दिया है ताकि लेनदार उनकी संपत्तियों को ज़ब्त करके, उन्हें बेचकर अपने बकाया कर्ज़ की भरपाई न कर सकें। तो ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 321 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 321 क्या कहती है? BNS Section 321 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 321 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 321 मुख्य रूप से उस व्यक्ति पर लागू होता है जो कोई व्यक्ति कानूनी रूप से किसी ऋण को चुकाने के लिए बाध्य होता है, लेकिन जान-बूझकर अपनी संपत्तियों या निधियों को छिपा लेता है या हस्तांतरित कर देता है, ताकि उसके लेनदार अपना पैसा वसूल न कर सकें।
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BNS section 321 Important points
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 321, पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 422 का आधुनिक रूप है। जिसे नए नियमो के साथ BNS में बदला है।
- यदि कोई व्यक्ति दिवालिया घोषित होने वाला हो और अपनी संपत्तियाँ किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर हस्तांतरित कर दे।
- यदि कोई व्यक्ति अदालत के आदेश (डिक्री) के तहत भुगतान से बचने के लिए जान-बूझकर अपनी आय के स्रोतों को छिपाए।
BNS section 321 example
मान लीजिए मोहित नाम के किसी व्यक्ति ने कोई लोन लिया है, और उसे चुकाने से बचने के लिए, वह रातों-रात अपनी संपत्ति किसी रिश्तेदार के नाम पर ट्रांसफर कर देता है, ताकि बैंक या लेनदार उसे बेच न सकें। तो यह धारा उस इंसान पर लागू होती है।
बीएनएस धारा 321की और सजा
इसके अलावा, BNS का सेक्शन 321 फ्रॉड पर भी लागू होता है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति, अपने फायदे के लिए अपनी पहचान छुपाकर किसी दुसरे व्यक्ति के साथ धोखा करता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 6 महीने तक की सज़ा जिसे बढाकर 2 साल तक किया जा सकता है या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं।



