Bhimrao Ramji Ambedkar: मनुवादियों के मुंह पर करारा तमाचा, डेढ़ करोड़ रूपय का पेन, केवल बाबा साहब के नाम समर्पित

1.5 Crore rupees pen
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Bhimrao Ramji Ambedkar: भले ही कुछ मनुवादी मानसिकता वाले संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब के दिए गए योगदानों को लेकर विरोधी टिप्पणी कर के देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हो, लेकिन सच तो ये है कि बाबा साहब के योगदान को तो पूरी दुनिया सलाम करती है, फिर ये कुछ मनुवादियों की क्या ही बिसात जो उनके योगदान पर सवाल खड़ा करे, जहां एक विरोधी खड़ा होता है तो वहीं बाबा साहब के योगदान की व्याख्या करने वाले 1000 खड़े हो जाते है।

विकृत मानसिकता वालों के गाल पर करारा तमाचा

बाबा साहब का केवल दलित समाज पर ही नही बल्कि पूरी दुनिया में उनके व्यक्तित्व का क्या असर है…इसका उदाहरण हम अक्सर देख ही लेते है..बाबा साहब का अपमान करने वाले विकृत मानसिकता वालों के गाल पर करारा तमाचा जड़ा है मुम्बई के रहने वाले रोहित पिसाल ने…. जिन्होंने दलितों की ताकत को तो दर्शाया ही साथ ही बाबा साहब को भी एक बड़ा सम्मान दिया है। आइये जानते है कि आखिर ऐसा क्या किया है रोहित पिसाल ने..जिसने मनुवादियों के पेट में दर्द करा दिया है।

डेढ़ करोड़ रुपए का पेन

दरअसल अभी हाल ही में मुम्बई में बना एक पेन काफी चर्चा में रहा.. पेन जिसे अक्सर आप लोगो की जेब में देखते है, हर पढ़ने वाले स्टूडेंस के पेन सबसे जरूरी हिस्सा है, उसके बिना एक स्टूडेंट ही नहीं टीचर भी अधूरे ही होते है..पेन जो नॉर्मली 2, 5, 10 या फिर 100-200 का ही हम कैरी करके चलते है.. लेकिन क्या हो अगर हम आपसे ये कह सके कि एक ऐसा पेन बनाया गया है जिसकी कीमत पूरे डेढ़ करोड़ रुपए है तो क्या कहना चाहेंगे आप..जी हां, सोने का पेन..सोने और हीरे से बने इस बेशकीमती पेन की सबसे बड़ी खासियत है इस पेन पर छपा हस्ताक्षर.. जो किसी और का नहीं बल्कि खुद डॉ. बाबा साहब भीम राव अंबेडकर का है।

आइये जानते है कि क्यों बनाया गया ये पेन

दरअसल पेन को बनाने वाले रोहित पिसाल, सोने से अलग अलग तरह की चीजें बनाने के लिए काफी मशहूर है। रोहित ने पेन बना कर इस बात की भी मिसाल पेश की है कि कुछ लड़ाई तलवारों ने नहीं कलम की ताकत से जीती जाती है, रोहित कहते है कि बाबा साहब को संविधान निर्माता भारत रत्न बनाने में उनकी पत्नी रमाबाई का पूरा योगदान रहा है और दलितो, मजदूरो को मजबूती देने में बाबा साहब का योगदान कौन भूल सकता है।

बाबा साहब की ही तरह बुद्ध के रास्ते पर चलने वाले रोहित एक मर्सिडीस कार बनाना चाहते है जो कि सोने की हो और उस पर बाबा साहब के हस्ताक्षर किये हुए हो। रोहित को गोल्ड काफी पसंद है, और गोल्ड के प्रति उनके लगाव को उनके आसपास के परिवेश से भी समझा जा सकता है। एक तरफ उनके ऑफिस में आपको गोल्ड ही गोल्ड नजर आता है तो वहीं वो खुद भी काफी गोल्ड पहनना पसंद करते है।

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बाबा साहब के जीवन से प्रेरित रोहित

बाबा साहब के जीवन से प्रेरित होने वाले रोहित बाबा साहब के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर करने के लिए अब तक सोने की साइकिल, चादर, और सोने का बिस्किट भी बना चुके है, जिन पर बाबा साहब की तस्वीर बनी हुई है, जो बाबा साहब की विचारधारा का प्रतीक है। रोहित का कहना है कि ये सोने का पेन बताता है कि दलित और पिछड़े कमजोर नहीं है, कलम की ताकत तलवार की ताकत से बड़ी होती है..

और केवल कलम की ताकत के दम पर ही आप मजबूत हो पायेंगे। कलम के दम पर क्रांति लाई जा सकती है। रोहित ने बता दिया कि कोई कितना भी बुरा कह ले, लेकिन जो जितना जलेगा, जितना बाबा साहब का अपमान करेगा..बाबा साहब की ख्याति उतनी ही बढ़ेगी। लोगो की नजरों में बाबा साहब की वैल्यू उतनी ही बढ़ती जायेगी।

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