8 नवंबर 2016 की तारीख तो आपको याद ही होगी.. ये वहीं तारीख है जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में भ्रष्टाचार को रोकने और इस पर लगाम लगाने के लिए 1000 और 500 रूपय के नोटो को बंद करने का ऐलान किया था। अचानक लिये गए इस फैसले के बाद जैसे एक क्रांति सी आ गई थी देश में.. एक तरफ सरकार इस कदम की सराहना कर रही थी, तो वहीं दूसरी तरह विपक्ष ने इसे देश को आर्थिक रूप से कमजोर करने वाला फैसला बताया था। हालांकि जब लोगो ने इस फैसले की अवहेलना की तो इसे सत्ताधारियों ने ये कह कर बाबा साहब अंबेडकर पर डालने की कोशिश भी की कि नोटबंदी का आईडिया बाबा साहब का था..
और नोटबंदी करने का सुझाव भी उन्होंने ही पहली बार दिया था… लेकिन सवाल ये उठता है कि सत्ता पक्ष के इन दावों में कितनी सच्चाई है। क्योंकि दावा तो किया गया कि ऐसा करने से काला धन देश में वापिस आयेगा..लेकिन क्या सच में काले धन पर लगाम लगी..ये कहना तो मुश्किल है..लेकिन बाबा साहब की आड़ में सरकार ने खुद को बखूबी बचाने की कोशिश की..तो चलिए आपको इस लेख में जानते है कि वाकई में बाबा साहब ने नोटबंदी को समर्थन दिया था या नहीं।
बाबा साहब की किताब
बाबा साहब ने 1912 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएश किया था, और फिर अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। अपने स्नातक उपाधि के दौरान उन्होंने शोध किया था जिसमें उनका विषय था प्राचीन भारत का वाणिज्य” । बाबा साहब यहीं नहीं रूके उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस एम. सी. और विधि संस्थान में बैरिस्टर ला किया था। बाबा साहब को कानून के साथ साथ अर्थशास्त्र का भी अच्छा खासा ज्ञान था.
देश में मुद्रा को मजबूत बनाने और देश में भ्रष्टाचार को रोकने का उपाय बताते हुए एक किताब लिखी थी जिसका नाम है- THE PROBLEM OF RUPEE। इस किताब में बाबा साहब ने नोट बंदी करने का सुझाव भी दिया है.. लेकिन जिस तरह से मोदी सरकार ने नोटबंदी की क्या ये बाबा साहब का सुझाव था..तो जवाब है नहीं.. तो फिर नोटबंदी करने को लेकर बाबा साहब ने क्या कहा था.. इसे भी जान लेते है।
नोटबंदी को बताया सही
दरअसल बाबा साहब जानते थे कि एक समय के बाद देश में रूपय की वैल्यू विदेशी मुद्रा से कम होती जायेगी..जो मंहगाई,भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा.. इसलिए अपनी किताब में बाबा साहब ने नोटबंदी करने की सलाह दी थी, लेकिन सच्चाई ये है कि बाबा साहब ने सुझाव दिया है कि पैसे की वैल्यू को कम होने से बचाने के लिए जरूरी है हर 10 या 15 साल में रूपय को बदल देना चाहिए। इसे DEPRICIATION OF RUPEES को रोकने में मदद मिलती.. उन्होंने भ्रष्टाचार को रोकने जैसी कोई बात नहीं की थी। लेकिन जनता को हद से ज्यादा परेशान करने वाला नोटबंदी का फैसला बड़ी आसानी ने सत्ता पक्ष के कुछ नेताओ ने बाबा साहब पर डाल दिया जो बेहद हास्यस्पद है।
आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ा
सच तो ये है कि नोटबंदी का फैसला केवल मोदी सरकार के कुछ लोगो ने किया था, इस बात को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी अपनी किताब ‘द प्रेसिडेंशियल इयर्स’ में बताया था, जब उन्होंने कहा था कि नोटबंदी का फैसला पीएम मोदी का एकतरफा फैसला था, उसके लिए उनसे चर्चा तक नही की गई थी, उन्हें भी इसकी खबर देश भर की जनता की तरह न्यूज के माध्यम से लगी थी। यानि कि कुल मिलाकर हम ये कह सकते है।
कि बाबा साहब ने जो उपाय बताया ता वो देश में आर्थिक कमजोरी को दूर बनाये रखने के लिए था लेकिन नोटबंदी ने आर्थिक कमजोरी दूर नहीं हुई थी बल्कि देश की आम जनता को बेहद समस्याओं का सामना करना पड़ा था। नवंबर की सर्दियों में लंबी कतारे भला कौन भूल सकता है। ये सच बताया कि केवल सरकार ने केवल बाबा साहब का नाम लेकर अपनी कमियां छिपाने की कोशिश की थी। आपकी इस पर क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।



