Top 5 Dalit news: जब दलितों की बहु बेटियों के उत्पीड़न की बात होती है, तो वहां कभी जाति नहीं देखी जाती लेकिन वहीं जब उनसे रिश्ते की बात होती हैं तो उनकी जाति का हवाला देकर पल्ला झाड़ किया जाता है, उनका गलत इस्तेमाल किया जाना, उन्हें बरगलाना आसान समझा जाता हैं, और जब कोई मुकदमा हो तो एससीएसटी कानून के खिलाफ राग अलापा जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने सवर्ण समाज को घेरा
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है। आजाद इस वक्त ऐसा नेता बन चुके है जिनमें पूरे दलित समाज को अपना मसीहा नजर आता है। अभी हाल ही में आजाद ने खुद को कट्टर हिंदू कहने वाले और बहुजन समाज के खिलाफ आंदोलन करने वाले के खिलाफ जमकर निशाना साधा है। आजाद ने कहा वैसे तो कुछ लोग कहते हैं कि सभी हिंदू भाई भाई हैं लेकिन जब SC-ST-OBC के अधिकारों की बात आती है, उनके हितों की बात आती तो यही कथित हिंदू भाई दलितों बहुजनों के खिलाफ आंदोलन चलाते हैं।
ऐसे भाई से तो दुश्मन दुश्मन अच्छे है क्योंकि इसे तथाकथित भाई बहरूपिए बनकर हमारा गला काट रहे हैं। चुनाव से पहले भाई बताते हैं और फिर हमारे सिर पर पेशाब करते हो और चोटियां काटते हो” फिर दलित समाज कैसे इनका भाई हो गया। ये केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए होने वाला प्रपंच है, जिससे अब बहुजन समाज को जागने को जरूरत है। वैसे आजाद का ये बयान कहीं न कहीं दलित समाज को जागरूक करने के लिए उठाया गया बेहतर कदम है, जो बस कोशिश कर रहे है कि बहुजन समझ मनुवादी हिंदुओं के हाथों की कठपुतली बन कर न रहे।
राजधानी दिल्ली में महिला कर्मचारी के साथ भेदभाव
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी नई दिल्ली से है, जहां एक दलित महिला ने अपने काम के दौरान बेहतर कपड़े क्या पहने, बीजेपी पार्षद की जातिवादी मानसिकता सामने आ गई। ये घटना दिल्ली के मंडावली क्षेत्र की है, पीड़िता रजनी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वो मंडावली नगर निगम में सफाई कर्मचारी है। 9 जनवरी 2026 को दोपहर के करीब 12 बजे अपना काम खत्म करके वो निगम पार्षद के ऑफिस में लगे हीटर पर हाथ सेंकने लगी थी।
पीड़िता के मुताबित उस दिन बहुत ठंड थी और उसकी तबियत खराब थी, लेकिन फिर भी उसने काम से छुट्टी नहीं ली, लेकिन तभी बीजेपी निगम पार्षद शशि चांदना वहां आ गई और उसने सफाई कर्मचारी को उसकी जाति के लिए अपशब्द करते हुए अपमान किया। पीड़िता के अच्छे कपड़ों पर टिप्पणी की कि दलित होकर इतने अच्छे क्यों पहनती हैं, गंदी औरतों की तरह ऑफिस के क्यों घुस आई है। पीड़िता ने जब इसका विरोध किया तो पार्षद के जबरन महिला के कपड़े बदलवाए। इतना ही नहीं ये भी आदेश सुना दिया कि कोई दलित कर्मचारी अच्छे कपड़े पहन कर काम पर नहीं आएगा।
पीड़िता ने जब पुलिस के इसकी शिकायत दर्ज करानी चाही तो पुलिस वालों ने ये कह कर पल्ला झाड़ लिया कि उनकी जाति ही ऐसी है कि वो गंदे कपड़े ही पहन सकते है। इतना ही नहीं महिला को लगातार तबादले का भी डर दिखाया जा रहा है। ऐसे में देखना ये होगा कि इस मुद्दे के सामने आने के बाद सरकार के आला कमान का क्या रिएक्शन होता है।
सम्भल में दलितों से श्रीराम शोभायात्रा रोकी
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के सम्भल से है, जहां 22 जनवरी को श्री राम मंदिर की स्थापना दिवस के दूसरे वर्षगांठ के मौके पर निकलने वाले जुलूस को दलित बस्ती में रोक दिया गया, जिसे लेकर पहले तो काफी हंगामा हुआ लेकिन जब दलितों की आपबीती सुनी गई तो समझ आया कि यहां अन्याय तो दलितों के साथ ही हुआ। दरअसल ये घटना संभल के सैंजनी गांव की है। पुलिस को तहरीर दी गई कि श्रीराम शोभायात्रा को दलित बिरादरी के इलाके में जाने के बाद यात्रा को एक घंटे तक रोके रखा गया।
इतना नहीं दलित समाज और सवर्ण समाज के बीच बुरी तरह से झड़प भी हुई, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों से 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन जब दलित समाज से जुलूस को रोकने का कारण पूछा गया तो उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए बताया कि दलित समाज के साथ वहां की पुलिस भी भेदभाव करती है। सम्भल में अक्सर होने तनाव को देखने हुए भी पुलिस के श्रीराम शोभायात्रा की इजाजत दे दी, लेकिन वहीं जब बीते महीने जब दलित समाज बाबा साहब आंबेडकर के पुण्यतिथि पर एक जुलूस निकालना चाहता था तब सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का हवाला देकर उन्हें इजाजत नहीं दी गई।
जबकि बाबा साहब तो दलितों से साथ साथ पूरे देश के लिए सम्माननीय है। क्षेत्र अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि दलितों ने अपने गुस्से के कारण ट्रैक्टर ट्रॉली लगा कर रास्ता रोक था, लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मामले को शांत करा दिया है। गिरफ्तार किए सभी लोगों को चेतावनी दे कर छोड़ दिया गया, और आगे ऐसा न करने की चेतावनी दी है। हैरानी की बात है कि जब बात दलितों के अधिकारों की होती है तो उन्हें दबाने के लिए प्रशासन भी अच्छे खासे हथकंडे अपनाने से पीछे नहीं हटती, लेकिन क्या हरकतें सवर्णों के साथ क्यों नहीं। ये सवाल मौजूदा समय में हर एक दलित के मन में है।
महोबा में एक दलित टीचर की पिटाई
4, दलित से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के महोबा से है, जहां एक दलित टीचर के साथ लेवल इसलिए उसके घर में घुसकर मारपीट की गई, उसे जातिसूचक गलियां दी गई क्योंकि उसने दबंगों के ट्यूबवेल से पानी लेने से इनकार कर दिया था। ये घटना महोबा जनपद के महोबकंठ थाना क्षेत्र के कुनाटा गांव की है। पीड़ित टीचर राजेश अहिरवार ने कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए बताया कि 21 जनवरी को शाम को वो अपने घर में खाना खा रहे थे, तभी गांव के कुछ लोग उनके घर आ धमके।
उन लोगों ने पहले तो राजेश को जातिसूचक गालियां दी, और फिर उसके साथ मारपीट करके उसे जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित अध्यापक ने बताया कि आरोपी का अपना निजी ट्यूबवेल है, और वो पानी बेचने का काम करता है। लेकिन किसी कारण पीड़ित उसके यहां से पानी भी लेता, जिससे नाराज होकर आरोपी ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर पीड़ित का उत्पीड़न किया।
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, मामले की गंभीरता को देखते हुए महोबकंठ थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार सरोज ने तुरंत कार्यवाही करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, और बाकियों की तलाश जारी है। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है।
दलित उत्पीड़न पर दिल्ली हाईकोर्ट का बस फैसला
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को लेकर है, जहां हाइकोर्ट ने दलित महिला के साथ धोखाधड़ी और प्यार का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सीधे तौर पर कहा कि अगर कोई दलित के साथ रिश्ते में है, और आपसी सहमति से दोनों साथ रह रहे है, और इस दौरान किसी तरह का कोई जातिगत भेदभाव नहीं हुआ तो रिश्ता टूटने के बाद ये कोई जातिगत उत्पीड़न का मामला नहीं माना जाएगा।
दिल्ली हाई कोर्ट जज स्वर्ण कांता शर्मा ने एक एससीएसटी एक्ट के कैसे को रद्द करते हुए फैसला सुनाया, उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से बने संबंध के बिगड़ने को पिछली तारीख से आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता, और खासकर तब जब रिश्ता जातिगत भेदभाव के कारण न टूटा हो। एससीएसटी एक्ट तभी लगेगा तब अपराध का आधार जाति हो।
कोर्ट का ये फैसला असल में दलित बहुजन समाज की बहु बेटियों को जागरूक करने वाला फैसला है जो ये समझता है कि कुछ लोगों के झांसे में आकर शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार होने वाली दलित महिलाओं को तब तक न्याय नहीं मिलेगा, जब तक ये प्रमाण न हो जाए कि आरोपी ने शादी का झांसा दिया था, या धोखा किया था। ऐसे में कोर्ट में उनकी कोई मदद नहीं करने वाला है, क्योंकि कोर्ट तो सबूतों पर चलता है, तो जरूरी है अपनी सुरक्षा बहुजन समाज की महिलाओं को खुद करनी होगी। वैसे अपनी इस पर क्या राय है हमें कमेंट करके बताए।



