Top 5 Dalit news: कहते हैं न कि जो ताकत दे सकता है है वो ले भी सकता है, कुछ ऐसा ही अब देश में उन लोगों के साथ हो रहा है, जिन्होंने दलितों को अपने पैरों की जूती समझा, लेकिन दलितों की ताकत के आगे अब बाबा साहब के संविधान का अपमान करने वालों को ये समझ आ जाएगा कि उन्हें बचाने के लिए भी संविधान ही सहायक होगा।
मनुवादी वकील अनिल मिश्रा पहुंचा जेल
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से है जहां बहुजन समाज को एकजुटता को जीत हुई और बाबा साहब को अपमानित करने वाला मनुवादी विवादित वकील अनिल मिश्रा आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गया है। जी हां, बाबा साहब का पुतला फूंका, उनकी तस्वीर जलाई और उनके लिए तमाम अपशब्द कहे, लेकिन अब बहुजन ने अपनी एकता और साथ ही संविधान की।ताकत के बल पर बता दिया है कि अनिल मिश्रा जैसे कितने भी आ जाए, लेकिन अब दलित कमजोर और मजबूर नहीं है। कोर्ट ने अनिल मिश्रा और उसके गुर्गों को सोमवार तक हिरासत में रखने का आदेश दिया है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रही हैं जब अनिल मिश्रा को पुलिस पकड़ कर ले जा रही थी जहां न तो उसने मीडिया के सामने एक शब्द कहा और न ही उसके चेहरे पर कोई मुस्कान थी। हैरानी की बात है कि जिन बाबा साहब के बनाएं संविधान पर वो अब तक छींटाकसी करता आ रहा था, अब वहीं संविधान उसे जेल की सलाखों से बचा सकता है। अनिल मिश्रा को गिरफ्तारी को लेकर दलित समाज में काफी राहत है तो वहीं सवर्ण समाज काफी रोष दिखा रहा है। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मांग रखी है कि अनिल मिश्रा और उसके गुर्गों पर बाबा साहब का अपमान करने के लिए रासुका लगना चाहिए। हालांकि अनिल मिश्रा फिलहाल सोमवार तक जेल में रहने वाला है, उस पर आगे का फैसला सोमवार को किया जाएगा।
बरेली में नाबालिक दलित युवक को पीट
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के बरेली से है, जहां एक दलित नाबालिक युवक को इस कड़ाके की ठंड ने नंगा करके पीटने और उसे 15 जनवरी तक जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। ये घटना बरेली के कैंट थाना क्षेत्र के सदर बाजार इलाके का है, पीड़ित दलित किशोर की मां आरती देवी ने पुलिस को तहरीर दी कि 31 दिसंबर की रात को उनका 16 साल का बेटा घर के पास टहल रहा था, तभी पास के गांव से ही 5 लोगों बाइक्स पर सवार होकर आए और उसे जबरन उठा कर चनेहटा रोड पर बने तालाब के पास ले गए जहां पहले तमंचा दिखा कर उसे नंगा किया गया और फिर उसकी बुरी तरह से पिटाई की गई।
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। पीड़ित की मां ने 5 आरोपियों मुकुल यादव, सुभाष यादव उर्फ एडी, सुल्तान, आयुष और बासु के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए बताया कि उन लोगों ने पीड़ित को धमकी भी दी है कि वो 15 जनवरी तक उसे जान से मार देंगें। पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी मुकुल की पीड़ित से इंस्टाग्राम पर किसी बात को लेकर बहस हुई थी। जिसके कारण ही इस घटना को अंजाम दिया गया। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश कर रही है।
मारपीट मामले में एक दलित युवक को 20 सालों बाद मिला न्याय
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से है, जहां एक दलित युवक को अपने साथ हुई मारपीट के लिए न्याय मिलने में 20 सालों का लंबा इंतजार करना पड़ा, जिसने दलितों के न्याय व्यवस्था कितनी सुस्त है इसका भंडा फोड़ दिया। दरअसल ये घटना 13 अक्टूबर 2005 को घटित हुई थी जब हमीरपुर के जलालपुर थाना क्षेत्र के कूपरा गांव की रहने वाली राजरानी ने पुलिस को तहरीर दी कि उनका बेटा सिद्धू गांव के ही एक दुकान से गुटकी लेने गया था लेकिन तभी पुरानी रंजिश के चलते सवर्ण समाज से आने वाले तीन आरोपी ध्रुव मिश्रा, हनुमान और राजकुमार ने दुकान पर आकर उसे लाठी डंडों से पीटना शुरू कर दिया।
मारपीट से वो बुरी तरह से घायल हो गया। पीड़ित की मां ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन तब से इस मामले में सुनवाई चल रही थी और अखिला 20 सालों के बाद विशेष न्यायाधीश एससी एसटी रणवीर सिंह ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 5 सालों को सजा सुनाई है और साथ ही 48 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। शायद इसे ही कहते है देर आए दुरुस्त आए।
मध्य प्रदेश में डर के साये में जी रहे है दलित
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर से है, जहां दलित को हमेशा डर से साए के जीना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि कब उन्हें मकान गिर जायेंगें। जी हां, राज्य में दलित के विकास और उत्थान करने की बात करने वाली सरकार असल में दलितों की अनदेखी किस तरह से कर रही है उसका जीता जागता उदाहरण है ग्राम पंचायत देरी के पास स्थित खीर महेरी गांव में रहने वाले 50 दलित परिवारों के घर। पीड़ित परिवार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि अभी तक 30 परिवारों को अपना घर तक नहीं मिला, वो लोग कच्चे मकान में रहते है, और हर वक्त उन्हें घर गिर जाने का डर बना रहता है।
इतना ही नहीं जब उन लोगों के सरकारी अधिकारियों से मदद मांगी तो वो लोग 2-3 हजार रुपए घूस मांगते है। दलित समुदाय ने जिला प्रशासन से भी कई बार अर्जी लगाई है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्हें डर है कि कहीं मकान गिर गए तो वो अपने परिजनों को न खो दें। हैरानी की बात है कि बार बार अर्जी देने के बाद भी प्रशासन की नजरों में दलितों के जान को कोई वैल्यू नजर नहीं आ रही है। दलितों की स्थिति बताती है कि राज्य के दलितों के साथ वाकई में कैसा व्यवहार किया जाता है।
हिमाचल प्रदेश को छात्रा की लुधियाना में मौत
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से है, जहां एक दलित छात्रा करीब 3 महीनों तक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ती रही लेकिन आखिर कर वो ये जंग हार गईं। लेकिन मरने से पहले उसने एक वीडियो बनाया जिसने कॉलेज में इसके साथ होने वाले व्यवहार का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। दरअसल लुधियाना के डिग्री कॉलेज में सेकंड ईयर की दलित छात्रा ने वीडियो में बताया कि कॉलेज में उसके एक प्रोफेसर अशोक कुमार पर क्लास और कैंपस में गंदी हरकतें करने और तीन छात्राओं- हर्षिता, आकृति और कोमोलिका पर मारपीट करने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था।
छात्रा के साथ 18 सितंबर 2025 को भी इन तीनों ने बुरी तरह से मारपीट की थी, जिसके बाद उसे लुधियाना के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वो करीब तीन महीनों तक लड़ती रही लेकिन 26 दिसंबर 2025 को उसने दम तोड़ दिया। छात्रा की मौत के मामले में न्याय के लिए रवि कुमार दलित और उनके साथियों द्वारा शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया जा रहा है।
उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है, अगर जल्द से जल्द जांच नहीं हुई तो वो अब सीएम आवास के आगे धरना प्रदर्शन करेंगें। उन्होंने राज्य की पुलिस पर संगीन आरोप लगाते हुए लापरवाह कहा, जो कि आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि अभी तक इस मामले में पुलिस की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। ऐसे में देखना ये होगा कि दलित छात्रा के साथ हुए अन्याय के खिलाफ सरकार का क्या रवैया होता है।



