Top 5 Dalit news: अगर दलितों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना है तो शायद अब उन्हें संविधान की कॉपी अपने साथ लेकर ही चलनी पड़ेगी.. जो सबूत है कि देश में जातिवाद पर रोक है.. भेदभाव कानूनन अपराध है.. लेकिन जो संविधान को ताक पर रख कर दलितों का उत्पीड़न कर रहे है, उन्हें कम से कम ये याद तो आये कि उनकी करनी की सजा जेल की सलाखें है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बताते है, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
बुंदेलखंड में बीजेपी नेता ने की दलित की पिटाई
1, दलितों से जुड़ा पहला मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड से है, जहां दलितो की स्थिति दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। जी हां, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक बीजेपी नेता अपने कुछ गुर्गो के साथ सरेआम एक दलित युवक के साथ मारपीट कर रहे है, उसके माथे पर कट्टा लगा कर उसे उठाने की बात कर रहा है। ये मामला छतरपुर के बिजावर थाना इलाके के पठार तालाब का है, पीड़ित युवक का नाम छन्नूलाल अहिरवार है, और मारपीट करने वाला शख्स ने खुद को बीजेपी नेता आशीष रैकवार बताया। वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और जांच शुरु की गई।
हैरानी की बात है कि इस घटना के बाद से ही पीड़ित काफी डरा हुआ है और उसने मामला दर्ज तक नहीं कराया है लेकिन फिर भी वीडियो के आधार पर एसपी अगम जैन ने खुद संज्ञान लेते हुए कार्यवाई के आदेश दिये है। वहीं पीड़ित ने आपबीती बताते हुए कहा कि वो जटाशंकर मत्स्य हरिजन समिति का प्रबंधक है, लेकिन कुछ दिनों पहले आशीष रैकवार ने पीड़ित के तालाब से जबरन मछली चोरी कर ली थी, जिसे रोकने की ही कोशिश में आरोपियों ने दलित युवक को बुरी तरह से पीटा, उसके साथ गाली गलौच की थी। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपी जल्द से जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
भीम आर्मी चीफ का बहुजन छात्रों को संदेश
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है। यूजीसी के नए नियमों पर लगे रोक के खिलाफ आंदोलन कर रहे एससी एसटी वर्ग के छात्रो को आजाद ने वीडियो जारी कर एक बड़ा मैसेज दिया है। दरअसल स्टे के बाद से पूरा दलित समाज इसके खिलाफ आंदोलन कर रहा है, जिसमें जानबूझ कर एससी एसटी और ओबीसी समाज के छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसे देखते हुए नगिना सांसद ने छात्र-छात्राओं से आंदोलन करने की जगह पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि हमारे समाज के बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, रही बात यूजीसी के लिए आंदोलन करने की, तो वो जिम्मेदारी उन नेताओं की है जिन्हें चुनकर आपने अपना प्रतिनिधि बनाया है। उन्होंने बहुजन समाज के छात्रों को आश्वासन दिया कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन होगा और कोई सड़क सूनी नहीं रहेंगी। आजाद ने ये भी बताया कि रोक के खिलाफ आजाद समाज पार्टी 11 फरवरी को दिल्ली में बड़ा आंदोलन करने जा रही है।
वहीं जरूरत पड़ी तो भविष्य में वो ऐसे और भी आंदोलन करेंगे। आजाद ने सीधा मैजेस दिया है कि बहुजन छात्रों को इधर उधर की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने भविष्य पर ध्यान दें, इस तरह के आंदोलन करके आपका भविष्य खराब होगा। आजाद की इस अपील की बहुजन समाज में काफी तारीफ हो रही है। अब देखना ये होगा कि आजाद की बातों पर बहुजन छात्र छात्रायें क्या रिएक्शन देते है। वैसे आप आजाद की बात से कितने सहमत है कमेंट में बतायें।
एमपी में बढ़ रहे है लव जिहाद के मामले
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के उज्जैन से है, जहां लव जिहाद का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग दलित बच्ची को ही शिकार बनाने की कोशिश की गई। दरअसल पुलिस को तहरीर दी गई थी कि 2 फरवरी को उज्जैन के चिमनगंज मंडी पुलिस स्टेशन इलाके से एक दलित नाबालिग लड़की लापता हो गई है, पुलिस ने जब मामले की जांच में सीसीटीवी को खंगाला तो दो मुस्लिम आरोपियों के नाम सामने आये, पुलिस ने दोनो आरोपियों को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया, जहां पीड़ित लड़की भी बुर्का पहने हुए आरोपी के एक रिश्तेदार में मिली।
पुलिस ने जब पीड़िता का बयान दर्ज किया तो पता चला कि आरोपी ने पहले उसे प्यार के जाल में फंसाया था, और उसके इस्लाम के अनुसार रहने के लिए कहा था, पीड़िता मान भी गई थी, लेकिन आरोपी ने पीड़िता को भगाने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया.. जिसकी मोडिकल में भी पुष्टि हुई। वहीं हिंदू जागरण मंच ने इस घटना को “ग्रूमिंग गैंग पैटर्न” बताया है। आरोपी के साथ साथ उसका दोस्त मोईन भी इन अपराध में शामिल है। फिलहाल दोनो आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है। जहां उन पर जेजे एक्ट के साथ साथ पोक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच कर रही है।
सीतामढ़ी में महादलितों की स्थिति दयनीय
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार सीतामढ़ी का है, जहां दलित सामज के लोग अपना जान को हथेली में रख कर रोजाना जिंदगी जीने पर मजबूर है। ये मामला सीतामढ़ी के परसौनी थाना क्षेत्र के मुशहरी गांव का है, जहां बागमती नदी के पुरानी धार के पास एक महादलित गांव बसा हुआ। रोजमर्रा के कानो के लिए भी गांव के लोग नांव के सहारे नदी पार करने को मजबूर है, पहल तो सरकार की तरफ से नांव दी गई थी, लेकिन हैरानी की बात है कि एक महीने पहले वो नांव हटवा दी गई, वहीं ग्रामीणों ने कच्चे तरीके से नदी पार करने का तरीका भी अपनाया, लेकिन वो महिलाओं और बच्चों के लिए बड़ा खतरा हो सकते है।
इस तरह से नदी पार करने से बड़ा हादसा होने के भी पूरे चांसेस है, गांव वालों ने किसी तरह से किराये पर नांव लिया भी था, लेकिन नाव चलाने और नाव के किराये के लिए 7500 रूपय देने पड़ते है। गांव के लोग मजदूरी करके अपनी जीवन यापन करते है ऐसे में इतनी रकम उनके लिए काफी भारी है। गांव वालो ने सरकार से अपील की है कि वो इस मामले में संज्ञान लें और उनके लिए कोई मदद मुहैया करायें। हैरानी की बात है कि जहां विकास की गति इतनी तेज दिखाई जा रही है, वहां आज भी लोग रोजाना नाव से नदी पार करने पर मजबूर है, और उसमें भी सरकार मदद नहीं कर रही है।
दामोह में दलित दूल्हे की अनोखी बारात
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के दामोह से है, जहां आज भी दलित समाज के लिए घोड़ी पर चढ़ना एक गुनाह माना जाता है, वहीं दामोह के हटा पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक दलित दूल्हे ने पिछले 75 सालों की परंपरा तो तोड़ते हुए घोड़ी पर बारात निकाली, और इस दौरान उसने संविधान के एक पन्ने की कॉपी अपने हाथों में रखी हुई थी, जो समाज में समानता की बात करती है। दरअसल बंसल समुदाय के दूल्हे, नंदू बंसल ने अपनी शादी से पहले एससी महासभा के साथ मिलकर पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी को सुरक्षा के लिए एक आवेदन दिया था, जिसके बाद पुलिस ने गांव में चौकसी बढ़ा दी थी।
वहीं घोड़ी पर जुलुस निकालने पर गांव वालों ने भी किसी तरह की आपत्ति होने से इंकार किया, जिसके बाद ये जुलुस शांति से पूरा हो गया। दूल्हे के भाई, जीवन बंसल ने पुलिस वालों और गांव वालों को धन्यवाद दिया.. वहीं संविधान की कॉपी हाथ में लेकर जुलुस निकालने को लेकर अब दूल्हे की काफी चर्चा हो रही है। वैसे दलित समाज के लोगो के लिए ये डर कोई नया नहीं है। घोड़ी चढ़ने पर दलित सामज के लोगो के साथ हिंसा औऱ भेदभाव होते रहे है, ऐसे में नंदू बंसल की ये पहल वाकई में काबिले तारीफ है।



