Top 5 Dalit news: सरकार कहती है कि दलितों और पिछड़ो को उनपर भरोसा करना चाहिए, लेकिन जैसी स्थिति में वो इस वक्त है, उसके बाद क्या वाकई में दलितों का भरोसा सरकार जीत पायेगी.. दलितों की बहू बेटियों को सरेआम उठा लिया जाता है, उनके साथ बर्बरता होती है, लेकिन प्रशासन तब तक नींद से नहीं जागती जब तक दलित खुद मोर्चा न संभाले। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है।
मैनपुरी में दलित किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश से है,. जो दलितों महिलाओं के लिए नरक बनता जा रहा है, जहां दिनदहाड़े महिलाओं को उनके घर से उठा लिया जाता है, लेकिन उनकी सुध लेनी न तो प्रशासन को पड़ी है और न ही शासन को.. ताजा मामला यूपी के मैनपुरी से है, जहां एक नाबालिग दलित बच्ची को पहले उसके घर में घुस कर मारपीट की गई और फिर उसे तमंचे के बल पर अगवा कर ले गए, और कार में जबरन उसके साथ गैंगरेप करके गांव के बाहर फेंक कर चले गए। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई है।
पीड़िता के परिवार ने दो आरोपियों आशीष यादव औऱ अंकित यादव के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए बताया कि दोनो आरोपी लगातार कई बार पीड़िता से पहले भी छेड़खानी कर चुके थे, लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाई नहीं की थी, आरोपियों ने कई बार पीड़िता का रिश्ता तुड़वा दिया है, वो नहीं चाहते है कि उसकी कहीं शादी हो, और अब उन लोगो ने सरेआम तमंचे के बल पर पीड़िता को उसके घर से अगवा कर दुष्कर्म किया।
पुलिस ने दोनो आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है, दोनो आरोपी फिलहाल फरार है.. वहीं यूपी में लगातार दलित महिलाओं के साथ दिनदहाड़े होने वाले अपराधों को लेकर भीम आर्मी चीफ ने भी रोष व्यक्त करते हुए कहा कि दलित बेटियों के साथ ये दरिंदगी कानून व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता का भी आईना हैं, राज्य में दलितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्या सरकार की नहीं बनती..उन्होंने इस तरह के घिनौने अपराध को अंजाम देने वालों अपराधियों को सख्त सजा दिलाने का मांग की है।
हिमाचल प्रदेश में मानवता शर्मसार
2,दलितो से जुड़ा अगला मामला हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर का है, जहां से मानवता का शर्मसार करने का मामला सामने आया है। जहां जातिगद भेदभाव इतना बढ़ चुका है कि दलित बच्चों को बाकि बच्चों से अलग खाना खाने पर मजबूर किया जा रहा है। दरअसल ये खबर सदर पंचायत समिति के तहत आने वाली मोर सिंघी पंचायत के कसोहल गांव की है, जहां महाशिवरात्रि के बाद हुए समारोह में जानबूझ कर एससी एसटी बच्चों को बाकियों से अलग बिठाया गया, ये हरकत करने वाले राजपूत समाज के लोग थे, उन्होंने जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक कार्यक्रम के दलित बच्चो को दौरान मंदिर से काफी दूर बिठाया गया, जिससे दलित समाज में काफी रोष है।
उन्होंने कहा कि मासूम बच्चो को भी जातिवादी आतंकियों ने नहीं छोड़ा। इतना ही नहीं उन लोगो ने विरोध करते हुए पूछा कि अब कहां गई हिंदू समाज की एकता, क्या एससी एसटी समाज के आने वाले हिंदू नहीं है, फिर उनके बच्चों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया गया। राजपूत समाज का ये व्यवहार पूरी तरह से अमानवीय है, और उसके खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग शुरु हो गई है। बच्चों के साथ हुए भेदभाव को लेकर अभी तक राजपूत समाज की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं हुई है। अब देखना ये होगा कि प्रशासन या सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
तेलंगाना में दलितो को छोड़ना पड़ रहा है अपना घर
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना से है, जहां दलितो को अपना ही घर छोड़ने पर मजबूर करने के लिए उनके इलाके की पानी और बिजली सप्लाई ही बंद कर दी गई है। ये घटना तेलंगाना के हनमकोंडा जिले के चेराबांडा राजू नगर की है, इस इलाके में करीब 300 दलित परिवार रहते है, लेकिन जातिगत भेदभाव के कारण उनके पड़ोसी सोसाइटियों के लोगों ने बिना वजह शिकायत की, जिसके बाद सालो से रह रहे दलित परिवारों को घर खाली करने का नोटिस भेज दिया गया। पीड़ित परिवारो का कहना है कि उंचे ओहदे वालों के काऱण उन्हें घर से विस्थापित होना पड़ रहा है, और उन्होंने ऐसा करने से इंकार कर दिया तो पानी और बिजली के कनेक्शन गैर-कानूनी तरीके से काट दिए गए।
जिसके बाद अब इस मामले तेलंगाना राज्य मानवाधिकार आयोग ने दलित परिवारों के लिए न्याय की मांग करते हुए आवाज उठाई है। वहीं अधिकारियों ने भेदभाव करने जैसी बात को खारिज करते हुए कहा कि दलित बस्ती ने बकाया रकम नहीं चुकाई थी इसलिए कटौती की गई थी, वहीं वो लोग गैर कानूनी तरीके से रह रहे है, इसलिए नोटिस जारी किया गया था, हैरानी की बात है कि दलित परिवार सालों से यहां रह रहा है लेकिन अब अचानक शिकायतों के बाद उनके खिलाफ कार्यवाई कैसे हो गई, और बिजली पानी देते वक्त भी उन्हें जगह के बारे में कैसे जानकारी नहीं मिली.. ये इशारा है कि जानबूझ कर दलितो की बस्ती को उजाड़ने की साजिश की जा रही है।
जातिवादी वकीलों ने की बीएन राव की प्रतीमा की मांग
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट से है, जहां अब तक बाबा साहब की मूर्ति को लगाने को लेकर विवाद हो रहा था, लेकिन अब तो शायद पहली बार होगा कि बीएन राव की प्रतीमा को स्थापित करने की मांग उठने लगी है। जातिवादी विवादित वकील अनिल मिश्रा ने बाबा साहब का अपमान करते हुए बीएन राव को संविधान का लेखक बताया था, जिस पर काफी विवाद हुआ था, लेकिन एक बार फिर से इस विवाद को हवा देने के लिए भिंड न्यायालय में बीएन राव की मूर्ति लगाने की मांग तेज कर दी गई है।
इसके लिए कुछ वकीलो ने 26 फरवरी को बीएन राव की जयंति के मोके पर प्रतीमा को स्थापित करने की मांग की है, साथ ही ये भी चेतावनी दी है कि मूर्ति की पूजा उसी दिन होगी, अगर किसी में हिम्मत हो तो रोक कर दिखाये, रोकने वाले को डेढ़ लाख जूतो की माला पहना कर विदा करेंगे। हैरानी की बात है कि वकीलों का ये व्यवहार देखकर लगता है कि जैसे अब कानून और सरकार से भी ऊपर ये लोग आ गये है, जिन्होंने कोर्ट परिसर को भी जातिवादी मानसिकता का गढ़ बना दिया है। अब देखना ये होगा कि इस ऐलान के बाद न्यायलय का क्या रिएक्शन आता है।
रूचि तिवारी की फिर से ओच्छी हरकत
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला तथाकथित जातिवादी पत्रकार रूचि तिवारी को लेकर है। सोशल मीडिया पर लगातार रो रो कर अपने आप को पीड़ित बताने वाली रूचि तिवारी का एक और नया चेहरा सामने आया है। रूचि तिवारी की मनुवादी पत्रकारिता का पर्दाफाश करने वाले नवीन कुमार नंदन पर भी अब मुसीबतें आने लगा है। रूचि तिवारी ने नवीन को बदनाम करने के लिए उनपर संगीन आरोप लगाये है।
रूचि तिवारी ने कहा कि नवीन ने उनके साथ अभद्रता की है, अश्लील हरकत की… जिसके बाद नवीन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर इन आरोपो में कोई सच्चाई है तो उन्हें सबूत दिखायें, लेकिन दुनिया देख चुकी है कि रूचि तिवारी ने भीम आर्मी का आंदोलन खराब करने के लिए कैसी चाल चली थी, जांच की तो पता चला कि वो राइट विंगर है, और ऐजेंडे के तहत ही आंदोलन में आई थी, लेकिन जब उनका पर्दाफाश करते हुए हमने उनकी पोल खोल दी तो अब वो 6 दिनों के बाद हम पर ही आरोप लगा रही है कि हमने उनके साथ गलत किया है।
नवीन ने अपील की है कि उनके साथ न्याय होना चाहिए, वर्ना उनके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। नवीन ने मांग की है कि कौन सच बोल रहा है कौन झूठ, इसके लिए दोनो का नार्को टेस्ट करवा लिया जाये, मुझे झूठे केस में फंसाया जा रहा है। नवीन ने कहा कि उनके लिए न्याय की आवाज उठाई जायें। अब देखना ये होगा कि नवीन कुमार नंदन के इस खुलासे के बाद पुलिस क्या कार्यवाई करती है।



