Top 5 Dalit news: हमें लगता है कि दलितो के लिए अगर दलित प्रतिनीधि होगा तो न्याय मिलेगा, लेकिन कहते है न कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है, वैसे ही जब तक बहुजन समाज एकजुट होकर नहीं लड़ेगा तब तक एक प्रतिनीधि भी कुछ नहीं कर सकता है। हैरानी की बात है कि दलित आपस में ही बंटे हुए है तो भला कैसे वो जातिवादी मानसिकता के खिलाफ जीतेंगे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो इस वक्त शोसल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
रोहिणी घावरी फिर से हुई आजाद पर हमलावर
1, दलितों से जुड़ी पहली खबर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद और उनकी तथाकथिक एक्स गर्लफेंड्र रोहिणी घावरी को लेकर है। एक तरफ आजाद यूपी के आगामी चुनावों की तैयारी कर रहे है तो वहीं घावरी उनपर लगातार हमलावर है। हाल ही में खबर आई है कि यूपी विधानसभा चुनावों में आजाद मेरठ के हस्तिनापुर सीट से चुनाव लड़ सकते है, जिसके बाद एक तरफ दलित समाज और भीम आर्मी के लोग बधाई दे रहे हैं तो वहीं घावरी ने खुली चुनौती दी है कि वो चुनाव लड़ कर देखे हार पक्की है !!
इतना ही नहीं आजाद की जमानत भी जब्त हो सकती है। घावरी ने ये भी कहा कि वो आजाद का घिनौना सच खुद घर घर जाकर बताएगी। घावरी के इस बयान से ये तो साफ हो गया है कि चाहे लोग उन्हें कितना ट्रोल कर ले वो आजाद का पीछा नहीं छोड़ने वाली। वहीं दूसरी बात ये भी है कि आजाद का सच बताने के लिए उन्हें भारत आना पड़ेगा, और वो तो केवल आने के दावे करती है, अब तो रोहिणी घावरी ने संवेदनाएं रखने वाले लोगों को भी समझ आने लगा है कि वो गरजने वाली बादल है बरसने वालीं नहीं। वैसे आपको क्या लगता है क्या घावरी के इन बेतुके प्रयासों से आजाद की छवि को कोई नुकसान हुआ है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
डीग में दलित दूल्हे की बारात में हंगामा
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के डीग जिले से है, जहां दलित दूल्हे की बारात में हुई आतिशबाजी को लेकर शादी की खुशी को जातिवादी आतंकियों ने खूनी संघर्ष में बदल दिया। ये मामला डीग जिले के कुम्हेर थाना क्षेत्र के बनी गांव का है. जहां 21 फरवरी को दलित बच्ची राखी की शादी थी और जब बारात आई तो सभी खुशी में नाज रहे थे और आतिशबाजी कर रहे थे, इस दौरान उंची जाति के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि पटाखा उसके उपर जा कर गिरा था, जिससे बाराती के साथ उसकी बहस शुरु हो गई, जो धीरे धीरे खूनी संघर्ष में बदल गया.
बारात पर पथराव और लाठी डंडों से हमला कर दिया गया, जिससे बारातियों ने भी जवाबी हमला दिया। हालांकि इस हमले में 6 लोगो बुरी तरह से घायल हो गए है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं दुल्हन के पिता ने कुम्हेर थाने में शिकायत दर्ज करा कर न्याय की मांग की है, उन्होंने कहा कि दलित की बारात होने के कारण जानबूझ कर हमला किया गया, और छोटे से मुद्दे को इतना बड़ा बना दिया गया, वहीं पुलिस ने दोनो समुदाय के तनाव को देखते हुए गांव में शांति बनाये रखने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया है। और इस मामले की जांच शुरु कर दी है। जांच के बाद ही आगे की कार्यवाई होगी।
फतेहपुर पर दलित युवक पर हमला
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से है, जहां एक दलित युवक का हाथ गलती से टच क्या हो गया, जातिवादी दबंगो ने दलित को बुरी तरह से पीटा.. यूपी में जातिवादी मानसिकता चरम पर पहुंच चुकी है, ताजा मामला गाजीपुर के मर्दनपुर गांव का है, पीड़ित दलित युवक संदीप वाल्मिकी ने बताया कि देर रात वो अपने काम से वापिस लौट रहा था, तभी उंची जाति के कुछ लोग उसके पास से गुजरे, और चलते हुए टच हो गया था, जिससे वो लोग संदीप को गालियां देने लगे।
लेकिन जब पीड़ित ने इसका विरोध किया उसके साथ मारपीट शुरु कर दी, इतना ही नहीं जब वो घायल अवस्था में घर पहुंचा तो दबंगो भी लाठी डंडो के साथ उसके पीछे से आ गए और उसके घर में घुसकर उससे मारपीट करने लगे, जब घर की औरते उसे बचाने आई तो उनके साथ भी मारपीट की गई। पीड़ित संदीप वाल्मिकी ने अपने साथ हुई बर्बरता के लिए पुलिस के पास न्याय की गुहार लगाई तो अगले दिन आने की बात कहकर पुलिस वालों ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की और उसे टरकाने की कोशिश की। वहीं थाना प्रभारी हनुमान प्रताप सिंह ने बताया है कि तहरीर के आधार पर जांच शुरु कर दी गई है, जांच के बाद ही आगे की कार्यवाई होगी।
हैदराबाद में दलित छात्र के साथ मारपीट
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद यूनिवर्सिटी (Hyderabad University) से है, जहां दलित छात्र के साथ जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न की खबरें सामने आई है। जिसके बाद अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने दलित छात्र अनुज कुमार को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन शुरु कर दिया है। एसोसिएशन ने दावा किया है कि अनुज कुमार जो कि MA सोशियोलॉजी के सेकंड ईयर का स्टूडेंट है, उस पर सूर्यवर्धन सिंह बबलू ने हमला किया था। जो कि आपसी झगड़े के बाद किया गया था, आरोपी ने दलित छात्र को जातिसूचक गालियां भी दी और उसके सहपाठी को धमकी भी दी।
यूजीसी के नये नियमो को सवर्णों के खिलाफ
पीड़ित छात्र ने अपने साथ हुई घटना के बाद एडमिनिस्ट्रेशन से कई बार शिकायत भी की लेकिन अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई, दलित छात्र के साथ हुई इस घटना की खबर जैसे ही सामने आई, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) और फ्रेटरनिटी मूवमेंट जैसे दूसरे स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन भी छात्र के लिए न्याय की मांग करने लगे। हैरानी की बात है कि एक तरफ यूजीसी के नये नियमो को सवर्णों के खिलाफ बता कर उसपर रोक लगा दी गई, वहीं शैक्षणिक संस्थानों में दलितों को न्याय तक नहीं मिल रहा.. इनमें तो न जाने कितने इस भेदभाव के खिलाफ आवाज तक उठाने से डरते है।
वहीं अब संगठन ने मांग की है कि इस मामले की जांच एंटी डिस्क्रिमिनेशन कमेटी करें, और जो रिपोर्ट वो देंगे, उसके बाद ही आंदोलन रूकेगा। वहीं यूनिवर्सिटी का कहना है कि जांच शुरु कर दी गई है स्टूडेंट वेलफेयर के डीन, चीफ प्रॉक्टर और चीफ वार्डन को सिफारिशें सौंप दी गई है, वहीं आरोपी छात्र ने भी पीड़ित छात्र पर रैगिंग करने का आरोप लगाया है। ऐसे में जांच अभी भी जारी है और एक हफ्ते में रिपोर्ट आ जायेगी। दलित छात्र के साथ रैगिंग की खबरे तो सुनी सुनाई है लेकिन ये शायद पहली बार होगा कि जब एक दलित छात्र पर ही रेगिंग का आरोप लग रहा है, वैसे क्या इस आरोप पर विश्वास किया जा सकता है।
कर्नाटक की राजनीति में बवाल
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है, जहां की राजनीति में फिर से भारी उथल पुथल मची हुई है। राज्य में एक बार फिर से दलित प्रतिनिधि को सीएम बनाने की मांग को लेकर सीएम सिद्दाररमैया पर फिर से हमला किया गया है। इतना ही नहीं कांग्रेस और कर्नाटक सीएम पर भेदभाव करने का आरोप लगाये हुए केंद्रीय मंत्री HD कुमारस्वामी ने खुलासा किया है कि सीएम ने जानबूझ कर आज तक दलित सीएम नहीं बनने दिया, जब कि AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और गृह मंत्री जी परमेश्वर जैसे दलित नेता इतने काबिल है कि वो कब से सीएम बन जाते।
लेकिन कांग्रेस की जातिवादी मानसिकता के कारण खड़गे को जानबूझ कर दिल्ली बुला लिया गया और 2013 में विधानसभा चुनावों में पूरी चाल के तहत जी परमेश्वर को हराया गया, जबकि वो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, ताकि उनकी छवि कमजोर की जा सकें, और राज्य को कभी दलित सीएम न मिले। इतना ही नहीं सिद्धारमैया को दगाबाज कहते हुए कुमारस्वामी ने उन्हें मेंटली इम्बैलेंस्ड कहा है, और आरोप लगाया कि सीएम ने अपने फायदे के लिए वोक्कालिगा समुदाय के लोगों को दंगे के लिए भड़काया, और जाति कार्ड दिखा कर अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश की। कुमारस्वामी के इन आरोपो के बाद कर्नाटक की राजनीति और क्या रंग दिखाती है, ये देखना बेहद दिलचस्प होने वाला है।



