Top 5 Dalit news: यूजीसी नियमों पर आर-पार के मूड में रावण, जातिगत भेदभाव की भेंट चढ़ते बच्चों को अब और मरने नहीं देंगे

Chandrshekhar azad, Chandrshekhar azad controversy
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Top 5 Dalit news:  ऐसा लगता है जैसे अगर कोई दलित जाति में पैदा हो गया है, तो न तो उन्हें खुशियां मनाने का अधिकार है और न ही आजादी में सांस लेने का। जातिगत भेदभाव की विकृत मानसिकता इस तरह से लोगो के अंदर घर कर गई है कि दलितों को खुशिया मनाते हुए देखना भी मनुवादियों को गवांरा नहीं है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

हापुड़ में दलित और यादव समाज के बीच मारपीट

1, दलितो से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ से है, जहां दलित समाज की होली के रंग में भंग मिलाने से भी बाज नहीं आये जातिवादी आतंकी। यूपी में किसी दलित बेटी के साथ दिनदहाड़े कोई गुनाह हो रहा है तो वो आम बात ही मानी जानी चाहिए, ताजा मामला हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव सिखेड़ा के मजरा नयाबसा की है, जहां होली के खुशियों की बीच दलित समाज और यादव समाज आपस में बुरी तरह से भिड़ गए।

दरअसल दलित समाज की एक नाबालिग बच्ची गांव के ही यादव समाज के व्यक्ति के दुकान पर सामान लाने गई थी, लेकिन सामान देने के बजाए वो बच्ची के साथ अभद्रता करने लगा, उसे जातिसूचक शब्द कह कर अपमान किया, जिसकी जानकारी बच्ची ने अपने परिवार को दी, जिसके बाद दलित समाज के लोग दुकानदार के पास पहुंचे थे, और ऐसा करने का कारण पूछ ही रहे थे कि यादव समाज के कई लोग इक्ट्ठा हो गए और मामला हाथापाई करने लगे। इस मारपीट में करीब 6 लोग घायल हो गए है। पीड़ित परिवार ने तहरीर दी है, जिसके बाद पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है, और इस उपद्रव के लिए जो भी जिम्मेदार है, उन्हें जल्द गिरफ्त में लिया जायेगा।

भीम आर्मी चीफ की सरकार को चुनौती

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने सवर्ण समाज के साथ साथ सरकार को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि चाहे कुछ भी हो जायें, वो यूजीसी के नए नियमों को लागू करवा कर ही रहेंगे। आजाद ने कहा कि जातिगत भेदभाव के कारण शैक्षणिक संस्थानों में हमारे बहुत बच्चे मर चुके है, हमने उन्हें तड़पते देखा है लेकिन अब और नहीं, वो यूजीसी की गाइडलाइंस को लागू करने के लिए देश भर में यात्राएं करेंगे, जागरूक करेंगे अपने समाज के लोगों को, लेकिन इसे हर हाल में लागू करवा कर रहेंगे, वो अब और बहुजनों और दलितों के बच्चों को भी मरने देंगे।

आपको बता दें कि नए गाइडलाइंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद से ही दलित और पिछड़े समाज के लोग इसे फिर से लागू करने के लिए आंदोलन कर रही है, जहां भीम आर्मी लगातार उनके समर्थन में खड़ी है वहीं सरकार की तरफ से अभी तक इसे फिर से लागू करने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जिससे दलित समाज का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर क्या वाकई में ये स्टे हटेगा, या इन चंद मुट्ठी भर सवर्णों के सामने दलितों को हार माननी पड़ेगी। आपकी क्या राय है हमें बताएं।

बिहार  में भू माफियाओं की दबंगई

3,  दलितो से जुड़ा अगला मामला बिहार के रोहतास से है, जहां दलितों की जमीन पर जबरन न केवल कब्जा किया जा रहा है, बल्कि उनके लिए आवाज उठाने वाले बिहार के भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेश अध्यक्ष अमर ज्योति पासवान को जबरन बिना किसी मामले के गिरफ्तार कर लिया गया है। दरअशल ये मामला रोहतास ज़िले के दरिहट थाने के अंतर्गत आने वाले बलभद्रपुर गांव का है, जहां गांव के कुछ दबंगों ने पासवान समाज के एक शख्स की जमीन को हथिया कर अवैध रूप से उस पर मंदिर बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जब पीड़ित ने पुलिस से मदद मांगी तो उन लोगो ने भी भू माफियाओं के खिलाफ कोई कार्यवाई करने से पल्ला झाड़ लिया जिसके बाद पीड़ित ने भीम आर्मी भारत एकता मिशन से मदद मांगी।

वहीं जानकारी मिलने पर अमर ज्योति पासवान जब वहां पहुंचे और उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से दबंगो को समझाने की कोशिश की तो वो उन लोगो हमला कर दिया, उनकी कई गाड़ियों को बुरी तरह से तोड़ा फोड़ा। लेकिन सबसे हैरान करती है पुलिस की कार्यवाई..पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के बजाये उल्टा अमर ज्योति पासवान को ही गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया है। इस गिरफ्तारी से दलित समाज में काफी रोष है, वो राज्य में दलितो के प्रति प्रशासन की भूमिका पर सवालियां निशान खड़े कर रही है। हालांकि अभी तक पुलिस की तरफ से कोई बयान नहीं आया है कि आखिर अमर ज्योति पासवान को क्यों पकड़ा गया है, औऱ क्यों अभी तक एक भी आरोपी के खिलाफ कार्यवाई नहीं की गई है। लेकिन ये तो तय है कि पद कोई भी हो, अगर दलित है तो पुलिस भी गहरी नींद में सो जाती है।

तमिलनाडु में जातिगत हिंसा

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के नांगुनेरी से है, जहां केवल अपना रूआब बढ़ाने के लिए और दलित युवाओं को डराने और चुप कराने के लिए दबंग इंटरमीडिएट जातियों के कुछ नौजवानों ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगो पर हमला कर दिया था, जिसमें एक विकलांग और एक प्रवासी मजदूर की मौत भी हुई थी। ये घटना नांगुनेरी के पास पेरुमपत्थु गांव में 2 मार्च को घटित हुई थी। गांव में अपनी जाति का रूआब दिखाने के लिए ये हिंसा की गई थी, जिसमें DMK के नांगुनेरी यूनियन सेक्रेटरी आरएस सुदालईकन्नू का भतीजा भी शामिल है, हालांकि इससे पहले भी वो एक जातिगत हमले में शामिल था, जिसके बाद से सुदालईकन्नू ने उससे अपना रिश्ता तोड़ लिया था।

पुलिस ने इस हिंसा के मामले में 7 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, आपको जानकारी हैरानी होगी कि जाति का दंभ भरने वाले ये सातों आरोपी मात्र 19 और 21 साल के है। तमिलनाडु जातिगत भेदभाव का गड़ बनता जा रहा है। जहां आये दिन दलितो के साथ उत्पीड़न और हमले की खबरे सामने आ रही है, ऐसे में अब देखना ये होगा कि पुलिस कब तक सातों आरोपियों को गिरफ्तार करती है और कब तक मारे गए लोगो को न्याय मिलेगा।

तनाव के बीच कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला

5, दलितों से जुड़ी अगली खबर कर्नाटक से है, जहां एक तरफ लगातार दलित सीएम की मांग को लेकर पूरे राज्य की राजनीति में तनाव में है, वहीं दलितों को साधने के लिए अब सरकार नई चाल चल रही है। दरअसल अब खबर आ रही है कि कर्नाटक कैबिनेट अब अनुसूचित जाति के आनुपातिक इंटरनल रिज़र्वेशन को लेकर होने वाली समस्याओ को दूर करने की तैयारी में है, दरअसल सरकार ने 2022 में दलितो को साधने के लिए SC समुदायों को 15 से बढ़ाकर 17 परसेंट और ST समुदायों के लिए 3 से 7 परसेंट कोटा बढ़ा दिया था, जिससे कुल कोटा 56 प्रतिशत हो गया था लेकिन वो सुप्रीम कोर्ट के 50 प्रतिशत के दायरे से बाहर चला गया था।

नजीता इस पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी गई, हायरिंग में और कानूनी प्रक्रिया में देरी के कारण दलित समाज काफी गुस्से में था, लेकिन अब फिर से सरकार उन्हें साधने की कोशिश में लग गई है। सोर्सेस की माने तो आगामी मीटिंग में SC लेफ्ट और SC राइट कम्युनिटी, दोनों को लगभग 5.29 परसेंट रिज़र्वेशन मिलेगा, जबकि बाकी 4.42 परसेंट हिस्सा SC टचेबल ग्रुप्स को दिये जाने पर फैसला हो सकता है। अब देखना ये होगा कि सरकार के इस कदम से क्या दलित संगठनो की नाराजगी सरकार के प्रति कम हो पायेगी, आपकों क्या लगता है, सच में दलितो के लिए उठाया गया कदम है या फिर केवल राजनीतिक एजेंडा।

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