Top 5 Dalit News: मौजूदा समय में एक ऐसी आंधी चल गई है कि जिन मनुवादियों को सुर्खियों में आना है वो मुंह उठा कर सीधा बाबा साहब के बनाए हुए संविधान का ही अपमान करने लग जाते है, और जब उनपर कानूनी शिकंजा कसता है तो इसी संविधान पर भरोसा करने की बात है। मनुवादियों का ये दोहरा चरित्र वाकई में हास्यास्पद है।
ग्वालियर में दलित संहगठ की एकजुटता दिखी
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से है, जहां दलित संगठन की ताकत का एक और नजारा देखने को मिला। जी हां, मनुवादी वकील अनिल मिश्रा के खिलाफ बहुजन समाज की एकजुटता के बाद उसके खिलाफ कार्यवाही करने वाले फरियादी में से एक दलित नेता मकरंद बौद्ध को किसी पुराने ममाले में गिरफ्तार किया गया था, एक तरफ जहां अनिल मिश्रा को जेल से बाहर निकालने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है तो वहीं मकरंद बौद्ध को कोर्ट से जमानत मिल गई है, जिससे मनुवादी तिलमिला उठे है। वो इसे दुखद घटना बता रहे है।
वहीं अनिल मिश्रा के वकील का बयान भी सामने आया है कि उन्हें संविधान पर पूरा भरोसा है और अनिल मिश्रा के साथ न्याय जरूर होगा। हालांकि दलित नेता की जमानत बताती है कि कोर्ट के फैसले ने बता दिया कि न्याय तो बाबा साहब के संविधान के हिसाब से होगा, और उसी संविधान का जो अपमान करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा, बहुजन समाज अनिल मिश्रा पर बाबा साहब और संविधान का अपमान करने के लिए रासुका लगाने की मांग कर रहे है। अब देखना ये होगा कि अनिल मिश्रा पर कोर्ट का क्या फैसला आता है।
यूपी में छेड़खानी से तंग होकर दलित ने लगाई फांसी
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले है, जहां छेड़छाड़ और अश्लील टिप्पणियों से तंग आकर एक दलित नाबालिक किशोरी ने आत्महत्या करने जैसा सनसनीखेज कदम उठा लिया.. मृतक का कसूर केवल इतना था कि वो एक दलित जाति से आती थी। ये घटना बदायूं के उझानी गांव की है, मृतका के पिता ने पुलिस को तहरीर दी कि वो लोग गरीब मजदूर है, और पूरी परिवार घर चलाने के लिए खेतों में काम करता है। काम के दौरान जब भी उनकी बेटी काम पर आती थी तो गांव के ही अजय और अनमोल नाम के दो सगे भाई उसपर टिप्पणी करते थे, उसे हमेशा परेशान किया करते थे।
जिससे तंग आकर उसने घर में फांसी लगा कर जान दे दी। जब परिवार काम के बाद घर पहुंचा तो किशोरी फंदे से लटकी हुई मिली थी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया जिसमें मरने की वजह हैंगिंग ही आई है, वहीं पिता की तहरीर पर पुलिस ने दोनो युवको के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच शुरु कर दी है। प्रभारी निरिक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि दोनो आरोप फिलहाल फरार है, पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
अजमेर में अवैध खनन के खिलाफ कार्यवाई पड़ी महंगी
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के अजमेर से है, जहां दलित समाज से आने वाले ASI राजेश मीणा को केवल इसीलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने अवैध खनन माफिया के खिलाफ बड़ी कार्यवाई की थी, पहले मारपीट सहना पड़ा और फिर निलंबन भी कर दिया गया। उल्टा ASI राजेश मीणा पर राजकीय अस्पताल के सामने मारपीट करने, पिस्टल दिखाकर दहशत फैलाने, कार में तोड़फोड़ करने और थाने में मारपीट करने जैसे संगीन आरोप लगा कर सस्पेंड कर दिया गया। वहीं राजेश मीणा ने खुलासा किया कि उन्होंने अवैध खनन माफिया के खिलाफ बड़ी कार्यवाई करते हुए चार डंपर, चार ट्रैक्टर और दो जेसीबी जब्त किया था।
दवाब के बाद भी छोड़ने से इंकार कर दिया था। राजेश मीणा अजमेर जिले के केकड़ी सदर थाने में तैनात है, अवैध खनन के खिलाफ कार्यवाई करने के कारण उन्हें झूठे आरोपो और निलंबन से गुजरना पड़ा। जबकि उन्होंने आरोपी को गिरफ्तार करके सावर पुलिस को सौंप दिया था। उन्हें आनन फानन में देवपुरा बुलाया गया, जहां 60-70 लोगो ने हंगामा कर रखा था और दंपत्ति की पिटाई भी की थी, जिसकी जानकारी उन्होंने एसएचओ और सीओ को भी दी थी, लेकिन स्थानीय़ एमएलए की दवाब में उन्हें सभी को छोड़ना पड़ा और उसने मीणा को धमकी भी दी थी।
राजेश मीणा के निलंबन से ये मामला अब काफी तूल पकड़ चुका है। जिस पर जमकर राजनीति शुरु हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजेश मीणा का समर्थन करते हुए कहा कि अवैध खनन रोकने पर पहले उन्हें बुरी तरह से पीटा गया और फिर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। जो राज्य में कानून व्यवस्था की कैसे धज्जियां उड़ाई जा रही है, इसका सबूत है।
बिहार के वैशाली में दलित बस्ती में लगी आग
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के वैशाली जिला से है, जहां एक दलित बस्ती में लगी आग की खबर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। ये घटना वैशाली के भगवानपुर थाना क्षेत्र के प्रतापतांड गांव में रहने वाले दलित बस्ती की है। आग के कारण करीब आधा दर्जन घर जल कर खाक हो गए और करीब 20 लाख रूपयों का नुकसान हो गया है। वहीं आग को बुझाने के लिए हाजीपुर, भगवानपुर और गौरौल थानों से दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं और करीब 2 घंटे में आग पर काबू पाया गया। वहीं आग कैसे लगी अभी तक इसका कारण पता नहीं चल पाया है, और पुलिस इसकी जांच कर रही है, लेकिन इस कड़ाके की ठंड में दलितों को खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ऐसे मे हैरानी की बात है कि अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई मदद तक नहीं आई है, पीड़ित परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता और आवश्यक सामग्री की मांग की है। आग के कारण दलितों को काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में देखना ये है कि सरकार दलितों की मदद के लिए कौन सा कदम उठाने वाली है।
पंजाब में अभी भी जारी है दलित संगठनो का प्रदर्शन
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब के अमृतसर से है, जहां मनरेगा के नाम बदलने और उसकी कुछ नीतियो में किए गए बदलावों के बाद से ही दलित संगठन का प्रदर्शन जारी है। लेकिन अब इस मामले में दलित दस्तन विरोधी आंदोलन ने ज़िला प्रशासनिक परिसर के सामने धरना दे कर अपना विरोध जताया है। जिसमें मजदूरो के साथ साथ गरीब महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। DDVA के ज़िला अध्यक्ष रंजीत सिंह शकरी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि पंजाब के भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा, जिसमें सैकड़ो लोगो के घर गिर गए, सरकार उन्हें तो मदद दे ही नहीं पाई, उपर से केंद्र सरकार NREGA के तहत सालाना 150 दिन का रोज़गार देने की बात कर रही है
जबकि यहां तो 100 दिनो का भी काम नही दिया जाता है। और न ही मजदूरी न मिलने वाले लोगो को बेरोजगारी भत्ता मिलता है, खासकर जो ताकतवर लोग है, वो मनरेगा का पैसा खा लेते है, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित तो दलित और पिछड़े लोग ही होते है। इस मामले में DDVA ने अलग-अलग गांवों के 336 बाढ़ प्रभावित परिवारों के आवेदन जमा किए थे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें लेने से साफ इनकार कर दिया। जिससे ये तो साफ हो गया है कि दलितों की स्थिति से सरकार को कोई मतलब नहीं है.. वो केवल ताकतवर लोगो को और ताकत देने के लिए काम कर रही है। ऐसे में दलित और गरीब लोग कहां जायेंगे। वहीं इसका नाम बदलना भी दलितों के खिलाफ उठाये गए कदम का एक नमूना है।



