Top 5 Dalit news: बाबा साहब ने संविधान में सभी के लिए कानून बराबर ही बनाया था, लेकिन ऐसा लगता है कि जातिवादी आतंकियो के लिए आज भी मनुवाद का ही कानून चलता है, तभी तो दिनदहाड़े दलितो को मार दिया जाता है, उन पर हमला किया जाता है, लेकिन न तो कानून रक्षा करती है और न ही उन्हें संविधान का कोई डर है..
नमस्कार, पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
यूपी में जातिगत नाम वाले गांव का नाम बदलने की पेशकश
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला यूपी से है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने है, लेकिन उससे पहले पक्ष हो या विपक्ष दलितो को साधने में लग गई है, ताजा मामला है दलितो के सम्मान को बनाये रखने के लिए उनकी जाति पर रखे नामों को बदलने की मांग की जा रही है। इसके लिए बीजेपी के विधान परिषद सदस्य एमएलसी लालजी प्रसाद निर्मल ने सीएम योगी आदित्यानाथ को एक लिस्ट सौंपते हुए कहा कि जाति के नाम पर गांव के नाम रखना उनका अपमान करने जैसा है. जो कि जातिसूचक शब्दों के उच्चारण की तरह है इसलिए ये नाम बदले जाने चाहिए।
इसके लिए बहुजन सशक्तिकरण संघ (बीएसएस) के कार्यकर्तोओ ने भी नाम बदलने का आग्रह किया है। इन गांवो में चमारी, चमरौआ, चमेड़, चमारसेना, चमरौली, भँगियाना, चमरौआ, चमरन खेड़ा और नटपुरवा जैसे नाम वाले गांव शामिल है। उन्होंने कहा कि इस तरह के नाम समाज के बड़े वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और उनका मनोबल गिराने के लिए किया जाता है, ताकि उनकी पहचान हमेशा नीचे तबके की ही रहे। उन्होंने सीएम से मांग की है कि इन गांवो के सम्मानजनक नाम रखे जायें, और भविष्य में कोई इनके जातिगत नाम से बुलाता हो तो उस पर एससी एसटी एक्ट लगाया जायें। चुनाव से पहले दलितो को साधने का ये तरीका वाकई में काफी अच्छा है, लेकिन देखना ये होगा कि सीएम का इस मामले में क्या फैसला आता है.. और इसका चुनाव में कितना फायदा होगा।
रोहतक में दलित गांव में खौफ का माहौल
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला हरियाणा के रोहतक से है, जहां होली के दिन दलित महिला ने जब छेड़छाड़ का विरोध किया तो राजपूत समाज के लोगो ने उसे बाइक हटाने का मुद्दा बना कर पूरे दलित समाज के साथ मारपीट की, जिसके कारण पूरा दलित गांव दहशत में है और गांव के करीब 10 परिवार अपने घरो पर ताला लगा कर पलायन कर गए है। ये घटना रोहतक के बनियानी गांव का है। पीड़िता ने बताया कि होली के दिन राजपूत समाज का विक्रम दलित महिलाओ को शराब पीकर जबरन रंग लगाने की कोशिश कर रहा था, वो महिला के साथ अश्लील हरकतें कर रहे था।
जिससे महिला ने उसे जोर से धक्का दिया था, और विक्रम किसी चीज से टकरा कर गिरा और उसकी मौत हो गई, लेकिन राजपूत समाज के लोगों ने उसे बाइक हटाने को लेकर हुआ विवाद बना कर दलितों के साथ मारपीट शुरु कर दी थी। विवाद इतना बढ़ गया कि भारी पुलिस बल को गांव में तैनात कर दिया है, बावजूद इसके दलित समाज के लोग खौफ से गांव से बाहर ही नहीं निकल रहे है। वहीं पीड़ित लोगो ने बताया कि उनके घर के लोग कई दिनो से लापता है, उन्हें नहीं पता कि वो लोग कहां है, बच्चों के दसवी के पेपर है लेकिन खौफ के कारण कोई नहीं निकल रहा है। अब देखना ये होगा कि क्या गायब लोग सुरक्षित घर लौट आयेंगे या फिर उनके साथ वाकई में कोई अनहोनी हो गई है।
यूपी के अलीगढ़ मे दलितो की बारात पर हमला
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से है, जहां दलितो की बारात में उनकी जाति का गुणगाण करने वाला गाना क्या बजा, ठाकुरों को ये इतना नागावार गुजरा कि उन लोगो ने चढ़ती बारात पर लाठी डंडो से हमला कर दिया। ये मामला अलीगढ़ के जवा थाना क्षेत्र के एक गांव की है। जहां जाटव समाज के युवक की बारात गांव से बड़े धूमधाम से निकल रही थी, तभी खुशी के माहौल में डीजे पर जातिगत गाना बजाया गया, लेकिन ठाकुर समाज के लोगो ने जातिसूचक गाना न बजाने को कहा, लेकिन जब जाटव समाज के लोगो ने उनकी बात मानने से इंकार कर दिया तो उन लोगो ने बारात पर हमला कर दिया।
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है, जिसमें हंगामा होते हुए साफ देखा जा सकता है। पुलिस ने वहां पहुंच कर मामले को शांत कराने की कोशिश की और अज्ञात लोगो के खिलाफ मामले की जांच शुरु कर दी है, हालांकि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। वैसे यूपी में दलितो की बारात पर ठाकुरो का हमला कोई नई बात नहीं है, बस देखना ये होगा कि आखिर उन्हें न्याय कब मिलेगा।
अनिल मिश्रा ने लगाया बीजेपी पर संगीन आरोप
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है, उन्होंने एक बार फिर से यूजीसी की आड़ में केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। इतना ही नहीं यूजीसी को लेकर जो भी विरोध हो रहा है, उसके लिए अनिल मिश्रा ने केंद्र सरकार और भीम आर्मी चीफ को जिम्मेदार ठहराया है। दरअसल अनिल मिश्रा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यूजीसी की नई गाइडलाइंस लाकर बीजेपी ने हिंदूओं को हिंदूओं से ही लड़वाने की साजिश की है। सरकार ने पहले हिंदूओ को मुसलमान से अलग किया था, अब हिंदू को हिंदू के खिलाफ खड़ा कर दिया।
उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि बांटने के लिए भीम आर्मी चीफ के साथ सांठगांठ करके उन्हें आंदोलन करने दिया गया लेकिन हमें नहीं। यूजीसी के नाम पर बांटने की अच्छी कोशिश है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा कर उनके मंसूबो पर पानी फेर दिया, और वो उम्मीद करते है कि कोर्ट इसे पूरी तरह स निरस्त कर देगी। वहीं चंद्र शेखर आजाद और बीजेपी की सांठगांठ का पर्दाफाश भी हो जायेगा कि कैसे राजनीति रोटियां सेंकने के लिए ये बंटवारा करवा रहे है।
हैरानी की बात है कि आजाद जो यूजीसी को दुबारा लाने के लिए लड़ रहे है, अनिल मिश्रा जैसे मनुवादी वकील ने उन्हें भी बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.. सच तो ये है कि वो खुद दिल्ली राजनीतिक रोटियां सेंकने आया था, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उसके मंसूबो पर पानी क्या फेर दिया, उसकी हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचें जैसी हो गई है, वैसे आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
शिवगंगा में दलित आकाश की मौत पर बड़ा खुलासा
5, दलितों से जुड़ा अगला खबर तमिलनाडु के शिवगंगा से है, जहां दलितों के साथ पुलिस और प्रशासन का रवैया किता अमानवीय हो सकता है उसका जीता जागता उदाहरण सामने आया है। पुलिस कस्टडी में दलित युवक आकाश की मौत से पूरे शिवगंगा में सनसनी फैली हुई है, जहां पुलिस ने आकाश पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उसने भागने की कोशिश की थी और उससे रोकने के दौरान वो घायल हो गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी, लेकिन वहीं अब पुलिस की बर्बरता की सबूत आकाश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आ गई है। आकाश के शरीर पर 28 गंभीर चोटे होने की पुष्टि हुई है। उसका पैर जबरन तोड़ा गया था।
बता दें कि 8 मार्च को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में इलाज के दौरान आकाश ने दम तोड़ दिया था, जिसके बाद से आकाश का परिवार लगातार पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगा रहा था, आकाश डेलिसन मनमदुरै का रहना वाला था, और पेशे से इंजीनियर था, 6 मार्च को उस पर पड़ोसी गांव में मारपीट का आरोप लगा था, जिस मामले में पूछताछ करने के लिए पुलिस जबरन उसे ले गई थी।
आकाश की मौत के बाद से परिवार वालो ने हंगामा कर दिया, जिससे बाद कोर्ट ने इस मामले को क्राइम ब्रांच क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CB-CID) को सौंप दिया है, जो अब इस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद अब किस किस अधिकारी पर गाज गिरेगी ये देखना अभी भी बाकि है.. अब देखना ये है कि आकाश और उसके परिवार को कब तक न्याय मिलेगा।



