Top 5 Dalits news: तमिलनाडु कोर्ट का बड़ा फैसला, तिहरी उम्रकैद से गूंजा गलियारा

Dalit murder Case, Raebareli News
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Top 5 Dalits news: ये तो आपने सुना होगा कि जब भी विकास होता है तब कुछ लोगो को विस्थापित होना पड़ता है, लेकिन हैरानी की बात है कि विकास का फायदा हर की लेता है लेकिन उसकी कीमत अक्सर दलित और पिछड़े समाज के लोग ही चुकाते है। उन्हें क्यों घर से बेघर होकर दर दर भटकना पड़ता है। नमस्कार पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है।

तमिलनाडु में दुष्कर्म और हत्या के मामले में तिहरी उम्रकैद

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला तमिलनाडु के चैन्नई से है, जहां एक 18 साल की दलित लड़की के साथ उसकी ही मां के प्रेमी द्वारा पहले बलात्कार करने और फिर उसकी निर्मम हत्या करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को तिहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। ये घटना नवंबर 2022 की है, मृतका का मां ने बताया था कि वो अपनी 18 साल की बेटी और अपने प्रेमी नज़मुद्दीन उर्फ ​​राजू मणि नायर के साथ तमिलनाडु के पूनमल्ली के पास सेन्नेरकुप्पम रह रहे थे और कंस्ट्रक्शन मज़दूर के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन नवंबर 2022 में जब महिला काम से बाहर गई हुई थी तब आरोपी ने उसकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाते हुए उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया, उसकी हत्या की और उसके गहने ले कर फरार हो गया।

पीड़िता की तहरीर पर पूनमल्ली पुलिस ने तुरंत छानबीन शुरु की और आरोपी को मुम्बई से गिरफ्तार कर लिया। वहीं इस मामले में करीब 3 सालों से बाद पीड़िता को न्याय मिला और तिरुवल्लूर की एक अदालत ने आरोपी को तिहरी उम्रकैद की सज़ा सुनाते हुए 35,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पुलिस की तेजी के कारण आरोपी को जल्दी सजा मिल सकीं जिसके लिए अवडी शहर पुलिस के आला अधिकारियों ने पुलिस टीम की तारीफ की, और कहा कि अगर पुलिस अपना काम पूरी कर्मठता से करती है तो कोई आरोपी सजा से नहीं बच सकेगा।

अमरावती में दलित कार्यकर्ता की हत्या

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला आंध्र प्रदेश के अमरावती से है, जहां जातिगत भेदभाव का प्रभाव दिखाने के लिए एक दलित कार्यकर्ता को ही पीट पीट कर मार डाला गया.. और अब इस हत्या पर जमकर राजनीति शुरु हो गई है वहीं हत्या के बाद पुलिस के रवैये पर भी सवाल खड़े होने लगे है। इस मुद्दे पर पूर्व विधायक कोरामूटला श्रीनिवासुलु राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि सलमान की हत्या सरकार प्रायोजित है, उसका कसूर केवल इतना था कि वो अपनी पसंद की पार्टी को सपोर्ट कर रहा था, इस कारण गांव के जातिवादी दबंग उसे गांव में रहने तक नहीं दे रहे थे, वो डर से गांव के बाहर रहता था।

लेकिन बीमार पत्नी को देखने के लिए अपने गांव पिन्नेली गया था, जहां मौका देखकर उसे घेर कर रॉड से इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गई..लेकिन राज्य में दलितों और पिछड़ों की स्थिति इतनी खराब है कि उल्टा सलमान पर ही मामला दर्ज कर लिया गया। उसके शव को पुलिस ने दिखाने तक से इंकार कर दिया था, लेकिन जब वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि वह खुद आकर शव को दफ़नाएंगे, तो सलमान के शव को दिया गया। हैरानी की बात है कि उसके ही गांव में उसके शव को दफनाने तक नहीं दिया जा रहा था।

इस मुद्दे पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने  डीजीपी कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया। ताकि वो डीजीपी से मुलाकात करके इस मामले की निष्पक्ष जांच करा सकें, वहीं इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा, पांच एकड़ ज़मीन और एक सरकारी नौकरी की मांग की है।वहीं इस मुद्दे पर पुलिस की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए..एक पार्टी कार्यकर्ता के साथ जब पुलिस का ऐसा रवैया है तो आम जनता के साथ पुलिस क्या ही करती होगी।

दिल्ली के पूर्व मंत्री का बड़ा बयान

3, दलितों तो जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से जुड़ा है, जहां दिल्ली के पूर्व मंत्री व वाल्मीकि समाज के बड़े नेता संदीप वाल्मीकि का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने ब्राह्मणी समाज और मनुवादियों की सोच पर गहरा प्रहार किया है। संदीप वाल्मीकी ने सीधे पर देश में दलितो और पिछड़ो के साथ होने वाली अत्याचार और भेदभाव के लिए ब्राह्मणों को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जातिगत भेदभाव की असली वजह ब्राह्मण ही है, उन लोगो ने वर्ण व्यवस्था बनाई है।

जिसके कारण जातिगत भेदभाव हुआ और आज दलित और बहुजनों को इतना कुछ सहना पड़ रहा है। उन्होंने ये भी मांग की है अगर वाकई में देश से किसी को भगाना चाहिए तो वो ब्राह्मणों को भगाना चाहिए, दलित समाज को मिलकर ब्राह्मणों भारत छोड़ो आंदोलन चलाना चाहिए, क्योंकि जब तक देश में ब्राह्मण रहेंगे तब तक दलितो को बराबरी का हक नही मिलेगा, तब तक उन्हें समाज में सम्मान नहीं मिलेगा।

आपको बता दें कि संदीप वाल्मिक आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य AAP की सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री थे, लेकिन एक घोटाले में फंसने के बाद उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया गया था, वहीं संदीप वाल्मिकी ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि वो दलित जाति से है इसलिए उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया गया था। फिलहाल संदीप वाल्मिकी किसी पार्टी का हिस्सा नहीं है लेकिन वो अक्सर दलितों और पिछड़ों के लिए आवाज उठाते है. संदीप वाल्मीकी के ब्राह्मणों पर किये गए टिप्पणी पर आप कितने सहमत है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

मैंगलौर में पहले कोस्ट अकादमी पर लटकी तलवार

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के मैंगलौर से है, जहां भारत की पहली ‘कोस्ट गार्ड अकादमी’  बनाये जाने के आड़ में दलित परिवारों के साथ शोषण किया जा रहा है। मैंगलौर के  केन्जर में 159 एकड़  में बनने वाली ‘कोस्ट गार्ड अकादमी’ की बाहरी दीवार को बनाने के लिए दलितो की बस्ती के रास्ते को ही बंद कर दिया गया है। इस इलाके में मूडुबालिके दलित बस्ती में रहने वालों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि इस इलाके में पिछले 70 सालों से 10 दलित परिवार रह रहे है, और बारही इलाके में जाने के लिए एक ही कच्चा रास्ता मौजूद था, लेकिन अकादमी बनाने के लिए उस कच्चे रास्ते को भी बंद कर दिया गया।

जबकि 1994 में सरकार की ‘आश्रय आवास योजना’ के तहत मालिकाना हक (टाइटल डीड) भी दिया गया था, लेकिन फिर भी उनके लिए पक्की सड़क नहीं बनाई गई। वो किसी तरह से कच्चे रास्ते से काम चला रहे थे, लेकिन अब तो वो रास्ता भी बंद कर रहे है। पीड़ित परिवारों के लिए दलित संघर्ष समिति (DSS) के जिला संयोजक सदाशिव पदुबिद्री ने आवाज उठाते हुए कहा कि जब तक दलित परिवारों के लिए की दूसरा आवास नहीं होता, तब तक यहां निर्माण कराना केवल दलितो के साथ अत्याचार है।

खासकर बारिश के इलाकों में तो पूरा इलारा जलमग्न हो जाता है। ऐसे में दीवार खड़ी करने से उनका रोजमर्रा का जीवन भी अस्त व्यस्त हो गया है। उन्होंने कोस्ट गार्ड बनाने वालों से अपील की है कि दलित बस्ती के लिए आवाजाही का रास्ता छोड़ा जाये, वर्ना वो मजबूरी में दलितो के हक के लिए आवाज उठाने को मजबूर है। वहीं एक अधिकारी का कहना है कि पंचायत के रिकॉर्ड में दलित बस्ती और सड़क का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है, तो भला कैसे दलितों को रास्ता मिल सकता है। अब ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर पंचायत में10 दलित परिवारों के बारे में कोई जानकारी आखिर क्यों नहीं हैं, कहीं ये दलितों को वहां से उखाड़ फेंकने की साजिश तो नहीं है।

UGC के नए नियमों के खिलाफ सड़को पर उतरा सवर्ण समाज

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला University Grants Commission के उस फैसले को लेकर है, जिसे लिया तो दलितो छात्रों के हितों के लिए..लेकिन अब सवर्ण समाज के छात्रों को वो बिल्कुल नागावार गुजर रहा है। दलित बच्चों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव और उनके साथ होने वाले शैक्षणिक संस्थानों में प्रताड़ना को देखते हुए UGC ने कई कड़े कदम उठाये है, जो दलित छात्रों को सम्मान के साथ शिक्षा लेने और उनके साथ होने वाले अपराधों को कम करने के लिए तय किया गया है, लेकिन अब अब सवर्ण समाज भाजपा के विरुद्ध सड़कों पर उतर चुका है।

और UGC के नए नियमो के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जा रहा है, उसके लिए सवर्ण समाज के छात्रों ने यूपी के बरेली से आंदोलन भी शुरु कर दिया है। उन लोगो ने मांग की है कि UGC से जुड़े प्रावधानों को और उसके साथ साथ SC–ST एक्ट को तत्काल ख़त्म कर दिया जायें। तभी आंदोलन खत्म होगा। हैरानी की बात है कि अभी हाल ही में UGC ने एक रिपोर्ट दी थी जिसमें बताया गया था शैक्षणिक संस्थानों में ही दलितों और पिछड़े छात्रों के साथ अपराध 118 प्रतिशत तक बढ़ गए है। जिसके बाद नए नियम बनाये गए थे, अब देखना ये होगा कि क्या सवर्ण समाज के विरोध के बाद UGC अपने नियमों में फिर से बदलाव करेगी।

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