Top 5 dalits news: कहने के लिए तो कानून सबके लिए बराबर है, लेकिन जब मामला दलित और पिछड़ो का होता है तो कानून की बराबरी कौन सी नींद में सो जाती है। दलितों को रिपोर्ट लिखवाने के लिए भी महीनों चक्कर लगाने पड़ते है, उनके मामले को रफा दफा करके उन्हें जबाने की साजिश की जाती है.. फिर कानून कैसे बराबर हो गया। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है।
रोहिणी घावरी ने फिर से चंद्रशेखर पर लगाए संगीन आरोप
दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को लेकर है, उनकी कथित एक्स गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर एक और वीडियो जारी कर आजाद को बदनाम करने की फिर से कोशिश की है। दरअसल रोहिणी ने दावा किया है कि ये वीडियो साल 2021 का है जब वो आजाद के साथ रिश्ते के थी और आजाद तब राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। रोहिणी ने सीधे आजाद को धोखेबाज कहते हुए कहा कि ये उनका विश्वास था कि आजाद बड़ी हस्ती बनेंगे लेकिन 2024 में जीत के बाद घावरी को दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकल फेंका है।
घावरी ने आजाद को तीखे शब्दों में कहा दुनिया में कभी कोई धोखेबाज़ महापुरुष या अच्छा शासक नहीं बन पाया तुम हमेशा इस कलंक के साथ जिओगे चंद्रशेखर की तुमने अपने संघर्ष की सच्ची ईमानदार साथी के साथ धोखा किया !! तुम्हारे बुरे दिन शुरू हो चुके है बस तुम देख नहीं पा रहे हो। बता दे पिछले कुछ महीनों से रोहिणी घावरी ने आजाद पर संगीन आरोप लगाए लेकिन हैरानी की बात है कि तमाम दावों के बाद भी वो कभी मीडिया के सामने नहीं आई है। खबरें तो ये भी आई कि वो इंडिया आने वाली है लेकिन वो नहीं आई है। वहीं कोर्ट ने आजाद को पहले ही क्लीनचिट दे दी है लेकिन घावरी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। ऐसे में देखना ये होगा कि आजाद के सब्र का बांध कब टूटेगा और वो कब घावरी के आरोपों का जवाब देंगे।
धनबाद में दलितों के साथ बड़ा खेल
दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के धनबाद से है। ऐसा लगता है कि जैसे दलितों के अधिकारों को छीनने के लिए कोई बड़ी साजिश पूरे देश के होने लगी है। ताजा मामला धनबाद से है। जहां धनबाद नगर निगम में मेयर सीट को दलित के लिए आरक्षित की गई थी लेकिन अब सरकार की तरफ से अनारक्षित कर दिया गया है। लेकिन इस खबर के सामने आने के बाद दलित समाज को अब डर सताने लगा है कि अगर दलित मेयर नहीं होगा तो उनके साथ अत्याचार और ज्यादा बढ़ जाएगा।
सीट अनारक्षित करने को लेकर दलित संगठनों ने जन अधिकार रैली निकलते हुए कोर्ट रोड और रणधीर वर्मा चौक जनसभा किया, और राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपना विरोध जताया है। इस मुद्दे पर रविदास समाज संघर्ष समिति के संस्थापक दिलीप राम और शांतनु चंद्रा उर्फ बबलू पासवान ने कहा कि सरकार कन्या फैसला असल में दलितों के हनन करने वाला है और सरकार दलितों के साथ धोखा कर रहीं है। जबकि 2022 में ही यहां रहने वाले दो लाख दलितों को देखते हुए ये पद दलितों के लिए आरक्षित की गई थी। दलित संगठन के विरोध और आरोपों को लेकर अभी तक सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना ये होगा कि दलितों के अधिकारों की छीनने की ये साजिश आखिर कब जारी रहेगी।
यूपी में जातिगत भेदभाव चरम पर
दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश कौशांबी से है, जहां जातिगत भेदभाव के कारण एक दलित महिला ने स्पर्श क्या कर दिया, जातिवादी दबंगों ने महिला को पीट दिया। ये घटना कौशांबी जिले के मंझनपुर कोतवाली के उनो का है, जहां पीड़िता सुमन देवी ने पुलिस थाने के शिकायत दर्ज कराई थी कि 15 अक्टूबर 2025 को वो पैसे निकालने के लिए स्थानीय सहज जन सेवा केंद्र पर गई थी, जहां गांव के ही कुसुम देवी पांडेय शुभम पांडेय और गीता पांडेय मौजूद थे। भीड़ के कारण उसने गलती से कुसुम देवी पांडेय को छू दिया था, लेकिन उससे कुसुम देवी काफी गुस्सा हो गई और उन तीनों ने मिलकर सुमन को जातिसूचक गालियां देते हुए अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया।
जब महिला ने विरोध किया तो तीनों के मिलकर महिला के साथ मारपीट शुरू कर दी। किसी तरह ग्रामीणों ने पीड़िता को बचाया, पीड़िता ने जा पुलिस में इसकी जानकारी दी तो पुलिस वालों ने भी मामले को रफा दफा करने के लिए पीड़िता को ही झूठा ठहरा दिया, जिसके बाद उसे कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज करके अब इसकी जांच शुरू कर दी है। वहीं थाना के इंस्पेक्टर अभी भी इसे मामूली विवाद बता रहे है। हालांकि इस मामले की जांच मंझनपुर डीएसपी करेंगे। अब जांच के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
कांग्रेस पर फिर से लगा दलितों की अनदेखी का आरोप
दलितों से जुड़ा अगला मामला संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब के परपोते राजरतन आंबेडकर को लेकर है, जिन्होंने बाबा साहब को अवहेलना करने के मामले में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस के कथित दलित हितैषी होने के दावों को बखिया उधेड़ते हुए कहा कि कांग्रेस केवल नाम के लिए दलितों के भले के लिए राजनीति करने का दावा करती है लेकिन असल में वो हिस्सेदारी देने के सबसे पीछे है। उन्होंने मांग की है कि अगर वाकई में कांग्रेस बाबा साहब के विचारधारा और दलित समाज का सम्मान करती तो केवल राज्यसभा में बाबा साहब की तस्वीर लगाने के बजाय किस तरह से बाकी राजनैतिक परिवारों को राजनीति में मजबूत जगह दी गई वैसे ही आंबेडकर परिवार को भी सम्मान मिलता।
सच तो ये है कि राजनीति रोटियां सेंकने के लिए कांग्रेस बाबा साहब के नाम का सहारा लेती है। लेकिन सत्ता या संवैधानिक पदों पर वास्तविक हिस्सेदारी नहीं देती। अब जरूरी है कि कांग्रेस के लुभावने वादों में फंसने के बजाय दलित समाज को वास्तविक हिस्सेदारी मिले, ताकि दलित समाज मजबूत हो सके। पहले कांग्रेस के ही नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने आरोप कांग्रेस पर दलितों की अनदेखी का आरोप लगाया और अब ये नया आरोप, इन आरोपों से कैसे बचेगी कांग्रेस ये देखने वाली बात होगी। वैसे आपको क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
निवाड़ी जिलाध्यक्ष प्रमोद अहिरवार की गिरफ्तारी के खिलाफ आंदोलन
दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले से है, जहां मध्यप्रदेश में भीम आर्मी के निवाड़ी जिलाध्यक्ष प्रमोद अहिरवार गलत मामले फसां कर जेल भेजने तो लेकर अब पूरा दलित समाज सड़कों पर उतर आया है। इस आंदोलन के तहत जब भीम आर्मी के कार्यकर्ता एसपी ऑफिस के बाहर पहुंचे तो पुलिस भीम आर्मी के सवालो का जवाब तक नहीं दे पायें। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने ऐलान किया है कि अगर पर्मोद अहिरवाद को जेल से नहीं निकाला गया तो संविधानिक अधिकारों का हनन कर रही।
मोहन सरकार और प्रशासन के खिलाफ 28 जनवरी 2026 को जेल भरो आंदोलन किया जायेगा.. बता दें कि प्रमोद अहीरवार पर हत्या का मुकादमा लगा कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसे लेकर भीम आर्मी ने आरोप लगाया है कि न तो इस मामले में निष्पक्ष जांच की गई और न ही कोई रिपोर्ट दिखाई गई है, केवल दलित होने के कारण प्रमोद अहिरवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन राज्य सरकार की ये दमनकारी नीति अब दलित समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।



