Top 5 Dalits news: कागजी पट्टे लेकर भटक रहे 600 परिवार, कटिहार में दलितों के साथ प्रशासनिक क्रूरता

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Top 5 Dalits news: बाबा साहब मानते थे शिक्षा आपको सही गलत समझने की ताकत देती है, लेकिन जब यहीं शिक्षा दलितों के शोषण की वजह बन जायें, तो दलितों को सड़को पर ही उतरना पड़ेगा..हैरानी की बात है सभ्य समाज के बच्चे ही मनुवादी मानसिकता के शिकार है..तो कैसा होगा उनका भविष्य. तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो इस वक्त शोसल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

यूजीसी के नए नियमों पर एमके स्टालिन का बयान

1, दलितों से जुड़ा पहला मुददा यूजीसी के नई गाइडलाइंस पर है, जिसपर सवर्ण समाज काफी विरोध कर रहा है, इसे काला कानून बता रहा है, वहीं भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने भी बिल वापिस न करने की खुली चुनौती दी है, इन तमाम विरोधो के बीच अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने यूजीजी के नए नियमों की सराहना की है, स्टालिन ने ये तक कहा कि इस कानून को और मजबूत करने की जरूरत है। स्टालिन ने कहा कि ये नियम उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए ज़रूरी सुधार का काम करेंगे… उन्होंने केंद्र सरकार को भी ये सुझाव दिया कि दवाब में आकर उन्हें नियमों में बदलाव नहीं करना चाहिए..इससे इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य की कमजोर हो जायेगा।

हालांकि उन्होंने बिना नाम लिए कुछ शैक्षणिक संस्थानो का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें केवल इस बात की चिंता है कि संस्थागत प्रमुखों की अध्यक्षता वाली इक्विटी समितियां स्वतंत्र रूप से कैसे काम कर सकती हैं, जबकि रोहित वेमुला जैसे मामलों में तो खुद वाइस चांसलर पर ही आरोप लगे थे, इसमें कई संस्थान ऐसे है जिन्हें आरएसएस के नियमों के अंतर्गत चलाया जाता है। इसलिए इन कानून को और ज्यादा मजबूत करने की जरूरत है। ताकि वाकई में दलित छात्रों के साथ भेदभाव न हो। स्टालिन के बयान ने यूजीसी बिल को लेकर हो रहे विरोध को कमजोर करने का काम किया है..अब देखना ये होगा कि सवर्ण समाज के तमाम विरोधो के बाद भी क्या सरकार अपने फैसले पर टिकी रहेगी..या इनमें बदलाव करेंगी।

मध्य प्रदेश में भीम आर्मी का जेल भरो आंदोलन

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के निवाड़ी से है, जहां राजनीति तुष्टिकरण का शिकार हुए निवाड़ी में भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी ने जिलाध्यक्ष प्रमोद अहिरवार की गिरफ्तारी के खिलाफ भीम आर्मी ने जेल भरो आंदोलन शुरु कर दिया है। इस विरोध में अब तक 90 कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी दे दी है। दरअसल 18 जनवरी को  अमरपाल सिंह नाम के एक शख्स की हत्या कर दी गई थी, जिसमें 7 लोगो को आरोपी बनाया गया था, और 19 जनवरी को प्रमोद अहिरवार को गिरफतार कर लिया गया, जबकि भीम आर्मी का कहना है कि घटना के वक्त अहिरवार उस इलाके में भी नहीं थे। पुलिस ने बिना किसी जांच के उन्हे आरोपी बनाया, जो कि राजनीतिक षडयंत्र के तहत किया गया है।

पुलिस पर दवाब बनाया गया है कि वो अहिरवार के खिलाफ कदम उठाये.. भीम आर्मी के कार्यकर्तांओं ने 21 जनवरी को भी इस मामले में ज्ञापन सौंपा था, लेकिन तब भी कोई कार्यवाई नहीं हुई..जिससे नाराज कार्यकर्ताओं ने जेल भरो आंदोलन शुरु कर दिया। वहीं पुलिस अधीक्षक डॉ. राय सिंह नरवरिया के मुताबिक अमरपाल सिंह की राजनीतिक रंजिश के तहत की गई है, जिसमें उनके परिवार के बयान के आधार पर ही 7 लोगो को आरोपी बनाया गया था, जिसमें से 2 आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि भीम आर्मी के विरोध के बाद एसआईटी का गठन करके जांच के आदेश दिये गये है, लेकिन तब तक अहिरवार पर हत्या में शामिल होने का शक लगा ही रहेगा। अब देखना ये होगा कि एसआईटी जांच में क्या सामने आता है।

कटिहार में जमीन के हक के लिए भटक रहे दलित

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के कटिहार से है, जहां 600 दलितो को अपने हक की जमीन के लिए 21 सालों से दर दर भटकना पड़ रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद से वहां काफी सनसनी है। ये मामला कटिहार के  मनिहारी अंचल के बैजनाथपुर दियारा का है। जहां दलित समाज अपने हक के लिए 21 साल से भटक रहा है। पीड़ितो ने हाथों में जमीन का पट्टा ले रखा है, और अपनी आपबीती बताते हुए कह रहे है कि करीब 600 दलित जिसमें नगर पंचायत, बाघमारा, दिलारपुर, केवाला, नवाबगंज, नारायणपुर सहित अन्य पंचायत क्षेत्र शामिल है।

उन्हें 2004-05 में बैजनाथपुर दियारा में बंदोबस्ती परवाना दिया गया था, लेकिन 21 साल बीत जाने के बाद भी आज तक  मापी नहीं कराई गई, इतना ही नहीं इन जमीनों पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है, दलित परिवारों को अपनी जमीन के लिए हर साल मालगुजारी रसीद कटवानी पड़ती है लेकिन उन जमीनों पर खेतीबाड़ी दबंग करते है।

इस मुद्दे  में उन्होंने अंचल कार्यालय और अनुमंडल कार्यालय में शिकायत दी है, जिसके बाद मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने आदेश जारी किये है कि सरकारी अधिकारियों को जल्द से जल्द इस मुद्दे पर काम शुरु करें, तो वहीं विधायक के इस मामले में पड़ने के बाद प्रशासन नींद से जागी है और प्रभारी सीओ मनियारी मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि अधिकारियों को आदेश दे दिये गये है कि वो जल्द से जल्द नाप शुरु करें। हैरानी की बात है कि 21 सालों से दलित परिवार दर दर भटक रहे है लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी..तो क्या ऐसे में बिहार में दलितों के साथ न्याय होगा..जवाब आप खुद दीजिये।

चंडीगढ़ में दलित छात्र के साथ जातिगत भेदभाव

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब के चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च चंडीगढ़ को लेकर है, जहां एक मेडीकल के छात्र को जातिगत भेदभाव के कारण DM में प्रवेश लेने से रोकने के लिए उसे फेल कर दिया गया। पीड़ित छात्र का नाम अनिल कुमार गंगवार है, अनिल ने मेडिकल के DM कोर्स के लिए पहले लिखित परिक्षा दी थी जिसमें उन्हें सबसे ज्यादा 43.15 नंबर मिले थे, लेकिन वही जब उनका इंटरव्यू किया गया तो उन्हें सबसे कम मात्र 8 नंबर दिये गये, जिसके कारण उन्हें एडमिशन नहीं दिया गया। दलित समाज ने अनिल के परिक्षा परिणामो को देखते हुए कॉलेज प्रशासन पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि एक दलित छात्र डीएम करने जा रहा था।

ये कुछ मनुवादी मानसिकता के द्रोणाचार्य को नागावार है, इसलिए जानबूझ कर एक होनहार छात्र को जातिगत भेदभाव की तहत फेल कर दिया गया.. दलित समाज ने आवाज उठाई है कि कॉलेज प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, ताकि कोई होनहार छात्र का जीवन न खराब हो जाये,,, वहीं उन्होंने ये भी पूछा कि शैक्षणिक संस्थानों पर दलित छात्रों के साथ जो भेदभाव होता है, उसे लेकर कोई शोर क्यों नहीं मचा रहा है। केवल यूजीसी के नए नियमों पर विरोध कर रहे है, लेकिन जो सही मायने में भुक्तभोगी है उनके लिए कभी क्यों खड़े नहीं होते।

विवादित वकील अनिल मिश्रा का यूजीसी को लेकर बड़ा बयान

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है, अब तक बाबा साहब अंबेडकर और संविधान का अपमान करने वाले अनिल मिश्रा अब यूजीसी के नये नियमों के खिलाफ सड़को पर उतर कर सभी सवर्णों को विरोध करने के लिए कह रहे है। अनिल मिश्रा ने अपने शोसल मीडिया अकाउंट पर ऐलान किया है कि .यूजीसी के नियमों का विरोध दर्ज करने के लिए 30 जनवरी 2026 को रूप सिंह स्टेडियम, ग्वालियर में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ये चुप रहने का नहीं. सड़को पर उतरने का समय है, नहीं तो आने वाली पीढ़ी को क्या जवाब देंगे।

सभी सवर्णों को, खासकर छात्रों को एकजुट होकर राष्ट्र हित की रक्षा करनी है। हैरानी की बात है कि बाबा साहब अंबेडकर के बनाये संविधान को न मानने वाले अनिल मिश्रा यूजीसी बिल को देश में न्याय के खिलाफ बता रहे है..और इसके होने वाले विरोध को एक मजबूत और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण की लड़ाई बता रहे है। लेकिन सवाल ये है कि जब दलितों के साथ अन्नाय होता है तो क्या तब न्यायपूर्ण भारत की जरूरत नहीं होती है… ये तमाम हथकंडे अपनाये जा रहे है यूजीसी के नियमों को वापिस लेने के लिए लेकिन, क्या इन दवाबों के बाद केंद्र सरकार झुकती है या और कड़े नियम जुड़ेगे, ये देखने वाली बात होगी।

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