कौन है भारत के पहले दलित मुख्यमंत्री डी. संजीवय्या
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दामोदरम संजीवय्या, जिन्हें दुनिया डी संजीवय्या के नाम से जानती है..उनका जन्म 14 फरवरी, 1921 को मद्रास प्रेसीडेंसी के
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कुरनूल जिले के कल्लू मंडल क्षेत्र के पेद्दापाडु गांव में एक दलित परिवार में हुआ था।
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कुरनूल जिले के कल्लू मंडल क्षेत्र के पेद्दापाडु गांव में एक दलित परिवार में हुआ था।
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संजीवय्या का बचपन काफी मुश्किलों में बीता था, मगर फिर भी उन्होंने हालातो से हार मानने के बजाय नगर पालिका विद्यालय से अपनी स्कूलिंग पूरी की
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जब कॉलेज में थे तभी उन्होने गुलाम भारत को आजाद कराने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेना शुरु कर दिया।
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जिसके कारण वो कांग्रेस के उंचे नेताओं की नजरों में आ गए थे। 1948 में मद्रास लॉ कॉलेज से वकालत की डिग्री हासिल की ताकि वो देश के संविधान को दलितों की सही स्थिति का अवलोकन कर सकें।
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कांग्रेस के लिए एक अहम सूत्रधार बनने वाले डी संजीवय्या को संयुक्त मद्रास के मंत्री चुने गए.. उनका राजनीतिक सफर शुरु हो चुका था।
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और 1950 में वो मद्रास के ही अंतरिम सांसद चुने गए.. औऱ 1952 तक अंतरिम सांसद रहे थे।
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संजीवय्या ने राजनीति में रहकर दलित उत्थान और उनके अधिकारों के लिए भी लड़ना शुरु कर दिया था।
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उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण ही कांग्रेस ने उन्हें 1960 में 39 वर्ष की आयु में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर आसीत किया।