By: Shikha
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क्या होता है बौद्ध भिक्षु की मृत्यु के बाद?
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बौद्ध धर्म में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और समय सीमा को लेकर आपकी जिज्ञासा बहुत तार्किक है।
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जबकि असलियत में 7 का अंक बौद्ध अंत्येष्टि परंपराओं में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
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अक्सर लोगों को लगता है कि बौद्ध भिक्षुओं के लिए 7 दिनों का कोई विशेष नियम नहीं है।
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बौद्ध दर्शन के अनुसार, मृत्यु के बाद चेतना तुरंत नया शरीर धारण नहीं करती, बल्कि वह एक मध्यवर्ती अवस्था में रहती है जिसे 'बारदो' कहा जाता है।
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माना जाता है कि हर 7वें दिन चेतना के पुनर्जन्म की संभावना सबसे प्रबल होती है।
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यह माना जाता है कि अधिकतम 49 दिनों के भीतर व्यक्ति निश्चित रूप से नया जन्म ले लेता है।
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इसलिए, भिक्षुओं और आम अनुयायियों दोनों के लिए हर 7वें दिन विशेष प्रार्थनाएँ की जाती हैं।
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कुछ परंपराओं में (विशेषकर तिब्बती बौद्ध धर्म में) माना जाता है कि महान गुरु मृत्यु के बाद भी कुछ दिनों तक 'समाधि' की स्थिति में रहते हैं।