By: Shikha
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क्यों ओमप्रकाश वाल्मीकि की किताब जूठन जरुर पढ़नी चाहिए?
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ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा 'जूठन' (Joothan) भारतीय साहित्य की एक कालजयी रचना है।
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इसे पढ़ने से हमें जाति व्यवस्था की उस क्रूर और अमानवीय सच्चाई का पता चलता है, जिसे अक्सर मुख्यधारा के समाज द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है
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यह किताब हमें बताती है कि किस तरह केवल एक जाति में जन्म लेने के कारण इंसान को अमानवीय यातनाएं, बहिष्कार और अपमान सहना पड़ता है।
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यह भारतीय समाज के उस छिपे हुए और गहरे सच को उजागर करती है जो अक्सर किताबों और मुख्यधारा की चर्चाओं से गायब रहता है।
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यह केवल एक आत्मकथा नहीं, बल्कि 'दलित साहित्य' का एक प्रमुख मील का पत्थर है।
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यह पुस्तक सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि हाशिए पर धकेले गए पूरे समाज के संघर्ष और आत्मसम्मान का जीवंत दस्तावेज है।