India-Nepal Buddha dispute: जब बौद्ध धर्म के जड़ों की खोज शुरु हुई तो 18वी शताब्दी के अंत में पहली बार पता चला कि बुद्ध कि जन्म स्थली लुम्बिनि भारत और नेपाल बॉर्डर पर है जो कि वर्तमान में नेपाल की हिस्सा है, तो वहीं जब आप उनके वैरागी बनने के बाद के जीवन को देखते है तो उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो, पहला प्रवचन हो, या उनका परिनिर्वाण हो, सब कुछ भारत की धरती पर ही हुआ, बुद्ध के जीवन के करीब 50 साल भारत की धरती पर ही बीतें थे, ऐसे में ये बहस लगातार जारी है कि आखिर बुद्ध किसके है, भारत के या फिर नेपाल के.. एक तरफ बुदध की जन्म स्थली नेपाल है तो वहीं एक तरफ है उनकी कर्मस्थली भारत.. ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि बुद्ध वाकई में है किसके।
नेपाल से बुदध का रिश्ता
करीब 563 ईसा पूर्व एक महान कुल अनार्य शाक्य कुल में कपिलवस्तु नगर के लुंबिनी में राजा शुद्धोधन के यहां राजकुमार सिद्धार्थ गौतम का जन्म हुआ था। हालांकि उनके जन्म के सातवें दिन ही उनकी मां देवी महामाया की मृत्यु हो गई थी, लेकिन मां की कमी कभी न खले इसलिए राजा शुद्धोधन ने सिद्धार्थ की मौसी महाप्रजापति से शादी कर ली थी, गौतम गौत्र में होने के कारण सिद्दार्थ गौतम कहलायें थे। जब बुद्ध का जन्म हुआ तब वो साधारण बालक थे जो राजकुमारों की ही तरह राजशी और ठाटबाठ के साथ जीवन जी रहे थे।
कोलीय वंश की राजकुमारी यशोधरा
राजपुरोहितों ने कहा था कि वो वैरागी बन सकते है तो कोशिश की गई कि कभी उन्हें कुछ ऐसा न देखना पड़े जिससे वैराग्य की तरफ से जायें, 16 साल की उम्र में उस वक्त की सबसे खूबसूरत कोलीय वंश की राजकुमारी यशोधरा से विवाह कर दिया गया, जल्द ही बेटे राहुल के पिता भी बने, लेकिन राजा बनने से पहले राज्य भ्रमण की इच्छा ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया..उन्होनें अपने भ्रमण के दौरान. एक बूढ़ा, एक मृत देह, एक बीमार व्यक्ति और एक सन्यासी को देखा, जिससे वो विचलित हो उठे, उन्हें अपने जीवन का ध्येय मिल गया था, बस फिर क्या था।
उन्होंने तय कर लिया था कि वो इस बात की खोज करेंगे कि किसी भी व्यक्ति को दुख क्यों होता है, जिसके लिए विरक्ति जरूरी थी, और वो राज के अंधेरे में 29 साल की उम्र में अपनी पत्नी और बच्चें को छोड़ गए.. यहां तक बुद्ध बुद्ध नहीं बल्कि केवल राजकुमार सिद्धार्थ गौतम थे। कपिलवस्तु की सीमा पर उन्होंने राजसी वस्त्र उतारे और वैरागी का वस्त्र धारण कर लिया.. जहां से वो भारत में दाखिल हुए।
भारत में तय की बुद्ध बनने की यात्रा
सिद्धार्थ गौतम मीलो चल कर बिहार के बोधगया पहुंचे, जहां उन्होंने सत्य की खोज में पीपल वृक्ष के नीचे करीब 7 साल और 7 दिनो तक कठोर तप किया और उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिस पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी उसे बोधि वृक्ष कहा गया और सिद्धार्थ गौतम बुद्ध कहलाये, बुद्ध जिसका मतलब है जागृत व्यक्ति या ज्ञानी व्यक्ति। 35 साल उम्र में उन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त किया था। तप के बाद उन्हें समझ आया कि जीवन का मूल स्वभाव दुख है, और हमारे दुखों का कारण हमारी अपनी इच्छाएँ और आसक्तियाँ हैं, जीवन के हर दुख का निवारण संभव है और दुख से मुक्ति पाने के लिए आर्य अष्टांगिक मार्ग ही एक मात्र उपाय है।
कुशीनगर में 80 साल की उम्र में महापरिनिर्वाण
बुद्ध ने भले ही बोधगया बिहार में ज्ञान प्राप्त किया था, लेकिन उन्होंने पहला प्रवचन यूपी के सारनाथ में दिया था, जहां 5 पहले शिष्य मिले थे। गौतम बुद्ध कई स्थानो में गए थे, जिसमें श्रावस्ती, संकिसा, राजगीर, वैशाली, कुशीनगर जैसे स्थानों जाकर उन्होंने जीवन भी बिताया और लोगो को ज्ञान भी दिया था। वहीं 483 ईसापूर्व में गौतम बुद्ध को यूपी के ही कुशीनगर में 80 साल की उम्र में महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था। यानि की बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से लेकर उनके महापरिनिर्वाण तक बुद्ध भारत की ही धरती पर थे।
ऐसे में अगर ये कहा जायें कि बुद्ध किसके है, तो लॉजीकली तो बुद्ध भारत के है, क्योंकि बौद्ध धर्म भी भारत से दुनियाभर में गया है, हां, हम ये कह सकते है कि राजकुमार सिद्धार्त गौतम का जन्म स्थल नेपाल है, लेकिन अगर आप बुद्ध जिसे ज्ञान प्राप्त हुआ, वो भारत में हुआ, तो उनकी ज्ञान की नगरी से लेकर कर्म भूमि तक भारत ही थी, इसलिए इस बात पर तो जंग होनी ही नहीं चाहिए कि बुद्ध किसके है, क्योंकि जैसा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत ने ही बुद्ध दिया है।



