दलित होने का खुलासा करते ही CJP संस्थापक अभिजीत दिपके पर जातीय हमले तेज

Abhijeet Dipke, CJP on social media
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CJP news: BJP और कांग्रेस के दिन अब जाने वाले है क्योंकि, देश में एक नई पार्टी आते ही तहलका मचा दिया है, नाम है—’कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)! लॉन्च होने के महज कुछ ही घंटों में लाखों फॉलोअर्स जुटाकर यह हैंडल हर तरफ छा गया है..  वही  सोशल मीडिया पर छाने वाली नवनिर्वाचित पार्टी क्रोकरॉच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। चूँकि वह दलित समुदाय से आते हैं, इसलिए अब वे जाति-आधारित हमलों का निशाना बन गए हैं।

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पार्टी के 5 वादों ने नेताओं के पसीने छुड़ाए

हाल ही में सोशल मीडिया पर छाने वाली नवनिर्वाचित पार्टी क्रोकरॉच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से लेकर राजनीतिक दलों तक, हर जगह हलचल मचा दी है। दरअसल, CJI सूर्यकांत ने युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से कर दी थी, बस फिर क्या था, युवाओं ने इसे ही अपना नाम बना लिया, इस पार्टी से जुड़ने की शर्तें भी बड़ी मजेदार हैं, पहली—आप बेरोजगार हों, दूसरी—आलसी हों, तीसरी—ऑनलाइन रहने की लत हो, और चौथी—प्रोफेशनली भड़ास निकालना जानते हों, भले ही यह अंदाज मजाकिया लगे।

लेकिन इस पार्टी के 5 वादे नेताओं के पसीने छुड़ा रहे हैं, पहला—रिटायरमेंट के बाद किसी भी CJI को राज्यसभा सीट नहीं मिलेगी, दूसरा— चुनाव आयोग ने किसी का वैध वोट काटा, तो CEC को सीधे UAPA में गिरफ्तार किया जाएगा, तीसरा—महिलाओं को संसद और कैबिनेट में 50% आरक्षण मिले, चौथा—बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के चैनलों के लाइसेंस रद्द हो और एंकर्स के बैंक खातों की जांच होगी, और 5वां—दलबदल करने वाले नेताओं पर 20 साल का चुनावी बैन लगेगा…अब कई नेताओं और विपक्षी सांसदों ने भी इस पर रिएक्ट किया है।

अभिजीत दिपके पर जातिगत हमले

वही सोशल मीडिया पर छाने वाली नवनिर्वाचित पार्टी क्रोकरॉच जनता पार्टी (Cockroach People’s Party) के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) को लेकर एक चौकाने वाली खबर सामने आई है। दरअसल जब से उन्होंने खुलासा किया है कि वो एक दलित जाति से है, तब से उन पर लगातार जातिगत हमले शुरु हो गए है, लोगो की मानसिकता देखियें, कल तक जिस पार्टी के जेन जी का सबसे बड़ा रैव्यूलेशन कहा जा रहा था। आज वहीं पार्टी जातिगत एजेंडे से भरी हुई कहलाने लगी है। जो केवल यहीं साबित करती है कि जब किसी मुद्दे में दलित आ जाये तो वो मुद्दा फिर समाज का नहीं बल्कि केवल दलितो का मुद्दा बन जाता है।

दलित विरोधी कटाक्ष शुरु

अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अभिजीत दिपके ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की भारतीय युवाओ को लेकर “तिलचट्टे” और “परजीवी” जैसी की गई टिप्पणी के बाद दिपके ने ये आंदोलन शुरु किया था, लेकिन जब इस आंदोलन को लेकर कटाक्ष करने लगे तो दिपके ने खुलासा किया वो एक दलित है, उनका कोई गलत एजेंडा नहीं है, बस फिर क्या था.. उन पर दलित विरोधी कटाक्ष शुरु हो गए, जबकि मोहुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद जैसे नेता भी सीजेपी  को सपोर्ट कर रहे है, लेकिन अब सवाल ये है कि कल तक जिस पार्टी को लोग वास्तविक रूप से राजनीति में आते हुए देखना चाहते थे अब वो उससे दूर भाग रहे है।वजह साफ है कि भारत में जातिगत भेदभाव इस कदर चिपका हुआ है कि किसी दलित को वो उंचे उठते देखना ही नहीं चाहते है, चाहे वो सोशल मीडिया पर ही क्यों न हो।

 TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने किया सपोर्ट

इसके अलवा आपको बता दें  TMC सांसद महुआ मोइत्रा इसको सपोर्ट करते हुए इसे जॉइन करने की इच्छा जताई, इसके बाद पूर्व क्रिकेटर और नेता कीर्ति आजाद ने जब अपनी एलिजिबिलिटी पूछी, तो CJP ने मजेदार रिप्लाई दिया—”सर, आपके लिए तो 1983 का वर्ल्ड कप जीतना ही काफी है…इसके मास्टरमाइंड हैं अभिजीत है, जो बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में मास्टर्स कर रहे हैं यह पार्टी कहती है कि वह उन्हें रिप्रजेंट कर रही है जिन्हें यह सिस्टम गिनना भूल गया है।

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