Mayawati attacks on SP: उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति के वर्चस्व को लेकर बसपा और सपा के बीच आर-पार की जंग शुरू हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मान्यवर कांशीराम की विरासत पर दावा ठोकते हुए अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। सपा द्वारा कांशीराम जयंती को ‘पीडीए दिवस’ के रूप में मनाने के ऐलान को मायावती ने ‘दलितों के साथ विश्वासघात’ और राजनीतिक नाटकबाजी करार दिया है। उन्होंने सपा को पुराने दिनों की याद दिलाते हुए पूछा है कि दलित महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम क्यों बदले गए?
और पढ़े : Top 5 Dalit news: महिला अधिकारी के अपमान से उबाल, जिले के सभी विकास खंडों में कामकाज ठप, तालाबंदी
सोशल मीडिया पर साधा निशाना
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से दलितों, पिछड़ों और बहुजन समाज के खिलाफ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने बहुजन समाज के संतों, गुरुओं और महापुरुषों का सम्मान नहीं किया, बल्कि समय-समय पर उनका अनादर किया है।
उन्होंने कहा कि कांशीराम जयंती पर सपा द्वारा पीडीए दिवस मनाना “सिर्फ राजनीतिक दिखावा” है और यह उपेक्षित वर्गों के वोट के लिए किया जा रहा प्रयास है।
1995 गेस्ट हाउस कांड का जिक्र
मायावती ने 1993 में सपा-बसपा गठबंधन और 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस घटना को इतिहास कभी नहीं भूल सकता। उनके मुताबिक गठबंधन सरकार के दौरान दलितों पर अत्याचार रोकने की शर्त के बावजूद हालात नहीं बदले, जिसके बाद बसपा ने समर्थन वापस लिया।
जिलों और संस्थानों के नाम बदलने का आरोप
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने बहुजन नायक कांशीराम के नाम पर बनाए गए जिलों और संस्थानों के नाम बदले।
उन्होंने कहा कि जब बसपा सरकार ने कासगंज को ‘कांशीराम नगर’ नाम दिया तो सपा सरकार ने बाद में उसका नाम बदल दिया। इसी तरह संत रविदास नगर और लखनऊ में कांशीराम के नाम पर बने उर्दू-फारसी अरबी विश्वविद्यालय का नाम भी बदला गया।
मायावती ने यह भी कहा कि सहारनपुर में कांशीराम के नाम पर बने अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया था।
सपा पर अन्य गंभीर आरोप
बसपा चीफ ने सपा पर मुस्लिम विरोधी रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि सपा सरकारों के दौरान सांप्रदायिक दंगे हुए, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के भड़काऊ रवैये से भाजपा को फायदा मिलता रहा और दोनों दलों की राजनीति का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ा।
कांशीराम को राजकीय सम्मान क्यों नहीं?
मायावती ने सवाल उठाया कि कांशीराम के निधन के बाद सपा सरकार ने एक दिन का भी राजकीय शोक क्यों घोषित नहीं किया। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को इन बातों को ध्यान में रखकर सतर्क रहना चाहिए। कांशीराम जयंती को लेकर बसपा और सपा के बीच बयानबाजी से उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।



