UP News: मेरठ में दलित महिला की हत्या कर बेटी का अपहरण, गांव में तनाव लगाई गई कई थानों की फोर्स जमकर शुरु हुई राजनीति

Dalit Mahila murder
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UP News: बीते कुछ सालों में उत्तर प्रदेश दलितों के लिए नरक में तब्दील हो रहा है, दिनदहाड़े जाति के नाम पर उनके साथ मॉबलिंचिंग करना तो वहीं गो रक्षा के नाम पर उनकी निर्मम हत्या, जातियों का दंभ भरने के लिए उनके बच्चों के साथ हिंसा तो उनकी बहू बेटियों के साथ घिनौने अपराध तो यूपी में बेहद आम हो गये है। ताजा मामला.. मेरठ जिले से है, जहां अपनी बेटी को बचाने वाली मां को न केवल अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, बल्कि ये परिवार अपनी 20 साल की बेटी को भी खोने के कगार पर खड़ा है।

ये सनसनीखेज मामला है मेरठ जिले के सरधना के कपसाड़ गांव का। आज मेरठ का कपसाड़ गांव देखते ही देखते एक पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है… गांव में जितने लोग नजर नहीं आ रहे है उससे ज्यादा पुलिस बल लगी हुई है। पूरे गांव में 250 इंस्पेक्टर और सीओ लेवल के अधिकारी समेत PAC की जवानों की तैनाती की गई है लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ..जिसने पूरे गांव को न केवल मातम में बदल दिया बल्कि आज दलित समाज वर्सेज पुलिस बल हो चुका है।

जानते है क्या है पूरा मामला

दरअसल दलित समाज के आने वाली सुनिता जो कि खेतो में काम करती थी, और गुरुवार 8 जनवरी को भी रोज की तरह सुबह 8 बजे अपने खेतों में काम के लिए निकली थी, लेकिन यहां उन्होंने सबसे बड़ी गलती ये की कि वो अपनी बेटी रूबी को भी साथ ले गई… खेतों पर जाते वक्त रास्ते में गांव का ही पारस राजपूत अपने कुछ साथियों के साथ उनका रास्ता रोके खड़ा था, वो सुनीता को जातिसूचक गालियां देते हुए रूबी को जबरन अपने साथ ले जाने लगा.. लेकिन जब सुनीता ने इसका विरोध किया और वो शोर मचाने लगी तो आरोपी ने फरसे से उसके सिर पर वार कर दिया, सुनीता खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ी, और आरोपी रूबी को अगवा कर ले गए। ग्रामीणों को जब इसका पता चला तो वो आनन फानन में सुनीता को तुरंत एसडीएस ग्लोबल हॉस्पिटल, मोदीपुरम ले गए।

इलाज के दौरान हुई महिला की मौत

जहां ईलाज के दौरान सुनीता की मौत हो गई… सुनीता की मौत ने दलित समाज में काफी गुस्सा भर दिया..उन लोगो ने थाने के बाहर बुरी तरह से प्रदर्शन शुरु कर दिया… और शव का न तो पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार हुए और न ही उसका अंतिम संस्कार करने के लिए। काफी समझाने के बाद महिला का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के साथ करवाया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया लेकिन गुस्साये ग्रामीणों ने सुनीता के शव को लाये गए एंबुलेंस के साथ तोड़फोड़ की, फिर भी वो अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार नही हुए।

गांव वालों ने सीधे तौर पर मांग की कि जब तक पारस राजपूत और उसके साथियों की गिरफ्तारी नहीं होती, और रूबी सही सलामत घर नहीं आती तब तक सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं किया जायेगा। लोगो का विरोध और गुस्सा देखते हुए ADG मेरठ जोन भानु भास्कर ने गांव में दो कंपनी पीएसी 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी 15 इंस्पेक्टर और CO लेवल के अफसर गांव में तैनात कर दिया गया है, ताकि गांव में किसी तरह की जातिगत हिंसा न भड़के, वहीं मामले की संगीनता को समझते हुए पुलिस की दस टीमों को लड़की और अपहरकर्ताओं की तलाश के लिए यूपी के साथ साथ उससे जुड़े राज्यों में भी भेजा गया है लेकिन अभी तक किसी का भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।

केस में प्रेम प्रसंग का भी मामला

सोर्सेज की माने तो रूबी की किडनेपिंग को लेकर ग्रामीणों ने अलग ही कहानी सुनाई है, उन्हें तो ये भी शक है कि इस हत्या में रूबी भी पारस के साथ शामिल हो सकती है। गांव वालों ने बताया कि कुछ समय पहले ही रूबी और पारस के बीच प्रेम प्रसंग होने का खुलासा हुआ था। जिसके बाद काफी हंगामे के बाद एक पंचायत भी बिठाई गई थी, पारस का परिवार किसी भी हाल में एक दलित लड़की को अपनी बहु बनाने के लिए राजी नहीं हुआ और न ही रूबी के परिवार वाले इस रिश्ते के लिए राजी थे, जिसके बाद पारस के परिवार वालो ने सुनीता को कुछ पैसे दिये थे कि वो जल्द से जल्द रूबी की कहीं शादी करा दें, जिसे लेकर पारस और रूबी काफी नाराज भी थे, लेकिन उसके बाद दोनो ने मिलना जुलना छोड़ दिया था।

लेकिन अचानक जब सब शांत हो गया तब रूबी की उपस्थिति में ही पारस ने उसकी मां पर हमला कर दिया और उसे बाइक पर अपहरण करके ले गए.. और हैरानी की बात है कि ग्रामीणों को सुनीता के घायल होने के बाद जानकारी मिली..जबकि रूबी की आवाज किसी ने नहीं सुनी थी.. ऐसे में कहीं न कहीं शक की सुई रूबी पर भी जाती है कि कहीं उसने ही तो पारस के साथ मिलकर सुनीता की हत्या नहीं की है। हालांकि पीड़ित परिवार ने ग्रामीणों के इन आरोपो को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस मामले को जानबूझ कर दूसरी दिशा में मोड़ा जा रहा है। लेकिन  पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है, और जब तक रूबी की बरामदगी नहीं हो जाती या फिर आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आते तब तक कुछ भी सीधे तौर पर कहना जल्दबाजी होगी।

जमकर शुरु हुई राजनीति

एक दलित महिला की निर्मम हत्या को लेकर एक तरफ समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने यूपी सीएम को घेरते हुए इस घटना को बहुत गंभीर मामला बताया तो वहीं बसपा सुप्रीमों ने इस कृत्य को बेहद शर्मनाक घटना बताया। विपक्ष ने कहा कि बीजेपी सरकार अपराधियों को सरंक्षण देने में इतनी आगे बढ़ गई है कि अब वो वापिस लौटी तो उनके सारे राज खुल जायेंगे। सच तो ये है कि अब सरकार से न्याय की कोई उम्मीद ही नहीं बची है।

वहीं इस मुद्दे पर जानकारी लेने के लिए सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान भी गांव गए थे, लेकिन उन्हें वापिस लौटा दिया गया, वहीं पीड़ित परिवार से मिलने के लिए भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद भी जाने वाले है। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि क्या पुलिस आजाद को पीड़ित परिवार से मिलने देती है। एक दलित महिला की दिनदहाड़े हत्या और एक दलित बच्ची का अपहरण यूपी में जातिगत हिंसा का एक बड़ा उदाहरण है, ऐसे में पीड़ित परिवार ये उम्मीद कर रहा है कि राज्य के सीएम इस मुद्दे पर उनके लिए कोई ठोस कदम उठायें। अब देखना ये होगा कि कब तक आरोपियो की गिरफ्तारी होगी..और क्या सच निकल कर सामने आयेगा।    

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