Rohit Pisal: कौन है गोल्ड किंग रोहित पिसाल, जिसने बाबा साहब के नाम कर दी है अपनी पूरी जिंदगी

Rohit Phisal, Rohit Popet Phisal
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Who is Rohit Pisal: पूरी दुनिया में आपको लाखों लोग बाबा साहब डॉ भीम राव अंबेडकर के विचारों को फॉलो करने वाले मिल जायेंगे, जिन्हें कतिथ तौर पर खुद को अंबेडकरवादी कहलाना पसंद है। इतनी ही नहीं बाबा साहब के विचारों को दुनिया के कोने कोने में फैलाने के लिए अनगिनत संस्थायें भी है, लेकिन बाबा साहब के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए अपना सबकुछ ही नही बल्कि खुद को भी बाबा साहब के लिए समर्पित करने वाले आपको शायद ही कुछ लोग मिलेंगे, और उन्ही में से एक है मुम्बई के रहने वाले रोहित पिसाल….रोहित जो कि पेशे से एक गोल्ड व्यापारी है, जो ऐसे ऐसे अनोखी चीजे बनाते है।

जिसे देखकर किसी की भी आंखे चमक उठे… और वो भी सोने से… जी हां, रोहित को गोल्ड इतना पसंद है, कि वो अपनी हर चीज गोल्ड से ही बनवाना पसंद करते है, लेकिन उससे भी खास है बाबा साहब के प्रति उनका लगाव…क्योंकि उनकी बनाई चीजो में उनका नहीं बल्कि बाबा साहब का नाम झलकता है। बाबा साहब के प्रति ऐसा प्रेम बेहद ही कम देखने को मिलता है, अपने इस वीडियो में हम “गोल्ड मैन ऑफ महाराष्ट्र” या “मुंबई का गोल्ड मैन” के नाम से मशहूर रोहित पिसाल की कहानी जानेंगे…कि कैसे वो आज दुनिया भर में गोल्ड मैन के रूप में प्रचलित हो गये और बाबा साहब से उन्हें इतना लगाव कब और कैसे हो गया।

कौन है रोहित पिसाल – Who is Rohit Pisal?

महाराष्ट्र के मुम्बई में गोल्ड के आइटम बनाने वाली एक नामी कंपनी पिसाल ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक और अपने यूनिक स्टाईलिस मेनुफेक्चरिंग को लेकर फेमस हो चुके डॉ. रोहित पोपट पिसाल… आज महाराष्ट्र के ही नहीं बल्कि दुनियाभर में काफी प्रचलित है। रोहित पिसाल दुनिया के उन लोगो में शामिल है जिनके पास भारत में अंडर वाटर सोने की खदान का लाइसेंस है। दुनिया में तीन ऐसी कंपनी जो अंडरवाटर गोल्ड ढूंढती है और माइनिंग करती है उसमें से एक कंपनी रोहित पिसाल की भी है। रोहित पिसाल असल में बौद्द धर्म को ही मानते है, जो कि बाबा साहब के बौद्ध अपनाने से प्रेरित है।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारधारा के कट्टर समर्थन और बौद्ध धर्म के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के कारण रोहित ने अपनी बनाई हर वस्तु को बौद्द धर्म और बाबा साहब को समर्पित कर दिया है। रोहित का मानना है कि गोल्ड असल में बौद्ध धर्म का ही प्रतीक है, इसलिए उन्होंने सोने का बुद्ध की प्रतीमा का निर्माण भी किया है। बाबा साहब के विचारों और बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए रोहित पिसाल ने सोने को ही अपना जरिया बनाया है।

पिसाल ग्रुप ऑफ कंपनीज का हेड

मुम्बई के मलाड में पिसाल ग्रुप ऑफ कंपनीज का हेड ऑफिस है, जहां जाते ही आपको ऐसा लगेगा कि जैसे आप स्वर्ग में आ गए हो… क्योंकि टीवी फिल्मों और सीरियल में तो स्वर्ग को कुछ ऐसा ही दिखाया जाता है जहां सबकुछ सोने का है.. तो फिर रोहित के हेडऑफिस को आप स्वर्ग मान सकते है…जहां चप्पल तक सोने की है..जी हां, सोने की चप्पल, सोने की साईकिल, सोने की मूर्तियां और सोने के बिस्टिक… चारों तक केवल सोना ही सोना दिखाई देता है। ये चीजे तो केवल शुरुआत है..इस लिस्ट में सोने के बर्तन, सोने के ही पत्थर, सिक्के, पेंटिंग्स भी शामिल है।

रोहित पिसाल खुद भी सोने से लदे हुए है, वो सोने को गॉड एलिमेंट मानते है जो आपको तरक्की करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। बुद्ध के विचारों मानने वाले रोहित खुद गले में एक गोल्ड लॉकेट पहनते है जो कि करीब 1 किलो सोने से बने हुए बुद्दा का है। रोहित कहते है कि महात्मा ज्योतिराव फूले ही इकलौते ऐसे इंसान थे जिनकी गोल्ड में मोनोपॉली थी, और उन्ही की विरासत को वो आगे बढ़ा रहे है।

भारत में पहली बार सोने की खोज बुद्ध के समय में

रोहित मानते है कि भारत में पहली बार सोने की खोज बुद्ध के समय में ही की गई थी, ये बुद्ध की ही विशेषता थी कि उनके प्रभाव से सोना पहली हर धरती पर नजर आया इसलिए गोल्ड असल में बौद्ध को प्रदर्शित करने वाला एलिमेंट है। रोहित के ऑफिस में अलग अलग तरीके की बुद्ध की मूर्ति और तस्वीरें हैं जिन्हें सोने और हीरो से बनाया गया है लेकिन उसमें सबसे खास है एक ऐसी पेंटिंग जिसमें बुद्ध बासुंरी बजा रहे हैं, रोहित ने बताया कि ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि बुद्ध एक बहुत बेहतरीन बांसुरी वादक थे।

थाईलैंड के रॉयल पैलेस

रोहित पिसाल ने बाबा साहब के प्रति अपने समर्पण को दिखाते हुए उनकी चैत्यभूमि को सोने से बने थेरिगाथा ग्रंथ दान किया है, इसके अलावा सोने और हीरों से बना एक बेशकीमती कलात्मक सेब भी बनाया जिसकी कीमत 10 करोड़ रूपय है, उन्होंने इस सेब को 18 कैरेट सोने और बेशकीमती हीरों, जिसमें लगभग 1396 छोटे छोटे हीरे जड़े हुए है। इस सेब को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया है, और रोहित ने थाईलैंड के रॉयल पैलेस में प्रदर्शित किया गया था। इसके अलावा रोहित ने 1.5 करोड़ रूपय का एक पेन भी बनाया जिसपर बाबा साहब के हस्ताक्षर अंकित है, रोहित का सपना सोने की मर्सिडीस बनाने का है जिसपर बाबा साहब के हस्ताक्षर अंकित हो।

बाबासाहेब आंबेडकर की फिल्म का निर्माण

हालांकि जब उनसे पूछा गया कि इतना सोना चोरी होने का डर नहीं है उन्हें तो उन्होंने बताया कि उनके हर प्रोडक्ट में एक स्पेशल मार्किंग है, जिसकी जांच करने पर तुरंत पता चल जाता है कि वो प्रोडक्ट रोहित की कंपनी का बना है। हालांकि रोहित मानते है कि मुम्बई इस मामले में सबसे सेफ है। रोहित ने बाबा साहब के जीवन के संघर्षों को दुनिया तक पहुंचाने के लिए ‘डॉ. करवाया, हालांकि वो खुद चंकाचौंध से दूर रहते है, लेकिन बाबा साहब पर केंद्रित कई फिल्में तैयार कराई है, जिसमें अनपोस्टेड लव लेटर टू भीमराव’ जल्द रिलीज होने वाली है।

रोहित केवल दलित, पिछड़े और गरीब किसानों और मजदूरों के लिए ही काम नहीं करते है बल्कि वो उन्हें शसक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत रहते है। रोहित असल में एक मिसाल है हर उस इंसान के लिए जो खुद को अंबेडकरवादी कहते है..रोहित की सच्ची श्रद्धा बताती है कि वाकाई में महापुरूषों को सम्मान कैसे दिया जाता है।

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