BNS Section 238 in Hindi: भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 238 अपराध के सबूतों को गायब करने या अपराधी को बचाने के इरादे से झूठी जानकारी देने से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (Bhaarateey dand sanhita) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 238 क्या कहती है? BNS Section 238 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 238 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238 यह धारा किसी अपराध के साक्ष्य छिपाने या नष्ट करने, या अपराधी को बचाने के लिए झूठी जानकारी देने से संबंधित है। इसका उद्देश्य न्याय में बाधा डालने वाले ऐसे कृत्यों को रोकना है, और सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है।
उदाहरण के लिए मान लीजिये यदि ‘ए’ यह जानते हुए कि ‘बी’ ने हत्या की है, ‘बी’ को सजा से बचाने के इरादे से शव को छिपाने में मदद करता है, तो ‘ए’ को धारा 238 बीएनएस के तहत सात साल तक की कैद और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
बीएनएस धारा 238 की महतवपूर्ण बातें
- यह धारा उस व्यक्ति को दंडित करती है जो यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है।
- अपराधी को कानूनी दंड से बचाने के इरादे से अपराध के बारे में गलत जानकारी देता है।
- यह एक गंभीर अपराध है, जिसका अर्थ है कि पुलिस बिना वारंट के गिरफ़्तारी कर सकती है।
- मूल अपराध की प्रकृति के आधार पर, यह गैर-ज़मानती या ज़मानती हो सकता है।
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बीएनएस धारा 238 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 238 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, दोषी व्यक्ति को उसी तरह दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो या गढ़ा (fabricated) हो। इस धारा के अंतर्गत दोषी पाए गए व्यक्ति को झूठी गवाही देने के समान ही दंड दिया जाता है। इसमें अपराध की गंभीरता के आधार पर कारावास, जुर्माना या दोनों शामिल हो सकते हैं। इतना ही नहीं यदि अपराध मृत्युदंड योग्य है, तो इस धारा में सात साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।



